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वैष्णो देवी मॉडल अपनाएगा मध्य प्रदेश: CM मोहन यादव ने जम्मू में किया ऐलान, उज्जैन सिंहस्थ 2028 के लिए ₹30,000 करोड़ की परियोजनाएं

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वैष्णो देवी मॉडल अपनाएगा मध्य प्रदेश: CM मोहन यादव ने जम्मू में किया ऐलान, उज्जैन सिंहस्थ 2028 के लिए ₹30,000 करोड़ की परियोजनाएं

सारांश

मध्य प्रदेश सिर्फ तीर्थस्थल नहीं बनाना चाहता — वह उन्हें विश्वस्तरीय ढंग से संचालित करना चाहता है। CM मोहन यादव का वैष्णो देवी दौरा इसी रणनीति की कड़ी है: डिजिटल पंजीकरण से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं तक, राज्य 2028 सिंहस्थ से पहले ₹30,000 करोड़ की नींव पर एक नया तीर्थ-अनुभव गढ़ने की तैयारी में है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 29 मई को जम्मू में घोषणा की कि मध्य प्रदेश वैष्णो देवी धाम की प्रबंधन प्रणाली का अध्ययन कर रहा है।
राज्य सरकार का प्रतिनिधिमंडल डिजिटल पंजीकरण , भीड़ नियंत्रण , आवास और दर्शन प्रबंधन का विस्तृत अध्ययन करेगा।
उज्जैन सिंहस्थ 2028 के लिए लगभग ₹30,000 करोड़ की विकास परियोजनाएं प्रगति पर हैं।
ओंकारेश्वर में एकतम धाम परियोजना पर लगभग ₹3,000 करोड़ की लागत से काम जारी है।
अध्ययन के निष्कर्षों को महाकाल मंदिर , ओंकारेश्वर धाम और भोजशाला पर लागू किया जाएगा।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 29 मई को जम्मू में मीडिया से बातचीत में बताया कि राज्य सरकार माता वैष्णो देवी धाम की प्रबंधन प्रणाली का विस्तृत अध्ययन कर रही है, जिसका उद्देश्य मध्य प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और श्रद्धालु-सुविधाओं को आधुनिक स्वरूप देना है। धाम के लिए रवाना होने से पूर्व दिए गए इस बयान में उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का एक प्रतिनिधिमंडल इस अध्ययन-कार्य में सीधे तौर पर लगा हुआ है।

अध्ययन में क्या शामिल है

मुख्यमंत्री यादव के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल को वैष्णो देवी धाम की डिजिटल पंजीकरण प्रणाली, भीड़ नियंत्रण उपाय, आवास सुविधाएं और सुव्यवस्थित दर्शन प्रबंधन का गहन अध्ययन करने का दायित्व सौंपा गया है। उन्होंने कहा, 'वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने श्रद्धालुओं के लिए एक सुव्यवस्थित और सेवा-उन्मुख व्यवस्था बनाई है। दर्शन व्यवस्था के साथ-साथ यह शैक्षणिक और स्वास्थ्य सेवा संस्थान भी संचालित कर रहा है।'

यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्य बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़-प्रबंधन की चुनौतियों से जूझ रहे हैं। गौरतलब है कि जनवरी 2025 में प्रयागराज महाकुंभ में भगदड़ की घटना के बाद तीर्थस्थलों पर भीड़ नियंत्रण राष्ट्रीय नीति-विमर्श के केंद्र में आ गया है।

मध्य प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर असर

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस अध्ययन से उज्जैन के महाकाल मंदिर, ओंकारेश्वर धाम और धार की भोजशाला सहित राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर प्रशासनिक व्यवस्थाओं के आधुनिकीकरण में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि लक्ष्य देश भर की सफल प्रणालियों को अपनाकर मध्य प्रदेश को तीर्थयात्रियों के लिए एक आदर्श गंतव्य के रूप में विकसित करना है।

सिंहस्थ 2028 और ओंकारेश्वर के लिए बड़े निवेश

धार्मिक अवसंरचना की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि 2028 के सिंहस्थ पर्व के लिए उज्जैन में लगभग ₹30,000 करोड़ की विकास परियोजनाएं प्रगति पर हैं। इसके अतिरिक्त, ओंकारेश्वर में एकतम धाम परियोजना पर लगभग ₹3,000 करोड़ की अनुमानित लागत से काम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

जम्मू-कश्मीर पर्यटन अधिकारियों से चर्चा

अपने जम्मू-कश्मीर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री यादव ने राज्य के पर्यटन विभाग के अधिकारियों के साथ तीर्थयात्रा प्रबंधन और पर्यटन अवसंरचना पर विस्तृत विचार-विमर्श भी किया। यह दौरा दोनों राज्यों के बीच धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं को भी उजागर करता है।

आगे क्या

प्रतिनिधिमंडल के अध्ययन के बाद राज्य सरकार वैष्णो देवी मॉडल के अनुकूल तत्वों को मध्य प्रदेश के धार्मिक स्थलों पर लागू करने की योजना तैयार करेगी। सिंहस्थ 2028 की समयसीमा को देखते हुए, अगले कुछ महीनों में ठोस प्रशासनिक खाका सामने आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह महज़ एक अध्ययन दौरे तक सीमित रहेगा या इसका ठोस क्रियान्वयन होगा। महाकाल कॉरिडोर के विस्तार के बाद उज्जैन में पहले ही भीड़-प्रबंधन की चुनौतियां सामने आ चुकी हैं, और 2028 सिंहस्थ में करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। ₹30,000 करोड़ का निवेश तभी सार्थक होगा जब डिजिटल पंजीकरण और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था समय रहते ज़मीन पर उतरे — न कि केवल योजना-दस्तावेज़ों में।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश वैष्णो देवी मॉडल का अध्ययन क्यों कर रहा है?
मध्य प्रदेश सरकार राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और श्रद्धालु-सुविधाओं को आधुनिक बनाने के लिए वैष्णो देवी धाम की सफल प्रबंधन प्रणाली से सीख लेना चाहती है। CM मोहन यादव के अनुसार, वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने दर्शन व्यवस्था के साथ-साथ शैक्षणिक और स्वास्थ्य सेवा संस्थान भी सफलतापूर्वक संचालित किए हैं।
अध्ययन में किन पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा?
प्रतिनिधिमंडल मुख्य रूप से डिजिटल पंजीकरण प्रणाली, भीड़ नियंत्रण उपाय, आवास सुविधाएं और सुव्यवस्थित दर्शन प्रबंधन का अध्ययन करेगा। इन तत्वों को बाद में मध्य प्रदेश के धार्मिक स्थलों पर अनुकूलित रूप में लागू करने की योजना है।
उज्जैन सिंहस्थ 2028 के लिए कितना निवेश हो रहा है?
उज्जैन में 2028 के सिंहस्थ पर्व की तैयारी के लिए लगभग ₹30,000 करोड़ की विकास परियोजनाएं चल रही हैं। इसके अलावा ओंकारेश्वर में एकतम धाम परियोजना पर लगभग ₹3,000 करोड़ की अनुमानित लागत से काम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
किन धार्मिक स्थलों पर इस मॉडल का असर होगा?
मुख्यमंत्री यादव ने उज्जैन के महाकाल मंदिर, ओंकारेश्वर धाम और धार की भोजशाला को प्राथमिक लाभार्थी स्थलों के रूप में गिनाया है। इन तीनों स्थलों पर प्रशासनिक व्यवस्थाओं के आधुनिकीकरण और सेवाओं में सुधार की योजना है।
CM मोहन यादव के जम्मू-कश्मीर दौरे का उद्देश्य क्या था?
मुख्यमंत्री यादव ने माता वैष्णो देवी धाम के दर्शन के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर पर्यटन विभाग के अधिकारियों से तीर्थयात्रा प्रबंधन और पर्यटन अवसंरचना पर विचार-विमर्श किया। यह दौरा मध्य प्रदेश की धार्मिक पर्यटन नीति को अन्य राज्यों के सफल मॉडलों से जोड़ने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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