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सिंहस्थ 2028: उज्जैन में 40 करोड़ श्रद्धालुओं की तैयारी, CM मोहन यादव ने बताया भव्य खाका

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सिंहस्थ 2028: उज्जैन में 40 करोड़ श्रद्धालुओं की तैयारी, CM मोहन यादव ने बताया भव्य खाका

सारांश

उज्जैन में 2028 के सिंहस्थ की तैयारी अभी से युद्धस्तर पर है — 40 करोड़ श्रद्धालु, ₹25,000 करोड़ के विकास कार्य और 24 घंटे में 4 करोड़ स्नानार्थियों की क्षमता। CM मोहन यादव का लक्ष्य है कि उज्जयिनी एक बार फिर विक्रमादित्य-युगीन वैभव को प्राप्त करे।

मुख्य बातें

CM मोहन यादव ने 27 जून 2025 को उज्जैन में कहा कि सिंहस्थ 2028 में 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आने का अनुमान है।
शिप्रा नदी के घाटों पर 24 घंटे में लगभग 4 करोड़ श्रद्धालु अमृत स्नान कर सकेंगे।
उज्जैन और आसपास के जिलों में ₹25,000 करोड़ से अधिक के विकास कार्य अभी से प्रगति पर हैं।
कार्यशाला का विषय था 'सिंहस्थ-2016 के अनुभव, 2028 का संकल्प' — प्रशासनिक, पुलिस, स्वास्थ्य और निर्माण अधिकारी शामिल।
सरकार का संकल्प: स्वच्छ सिंहस्थ, स्वस्थ सिंहस्थ ; भीड़ प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं पर विशेष ध्यान।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 27 जून 2025 को उज्जैन में आयोजित एक वृहद प्रशिक्षण कार्यशाला में घोषणा की कि सिंहस्थ 2028 के दौरान 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के उज्जैन पधारने का अनुमान है। कार्यशाला का विषय था 'सिंहस्थ-2016 के अनुभव, 2028 का संकल्प', जिसमें प्रशासनिक, पुलिस, स्वास्थ्य और निर्माण एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कार्यशाला में बताया कि शिप्रा नदी के नवीन और मौजूदा घाटों पर एक ही दिन में लगभग 4 करोड़ श्रद्धालु अमृत स्नान कर सकेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी श्रद्धालुओं को मां शिप्रा के जल से ही स्नान की सुविधा मिले, इसके लिए राज्य सरकार व्यापक प्रबंध कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब 2016 के सिंहस्थ के अनुभवों को आधार बनाकर इस बार और बड़े पैमाने पर आयोजन की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

अवसंरचना और विकास कार्य

मुख्यमंत्री ने बताया कि उज्जैन और आसपास के जिलों में अभी से ₹25,000 करोड़ से अधिक के विभिन्न विकास कार्य प्रगति पर हैं। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने पर उज्जयिनी को सम्राट विक्रमादित्य के काल की भव्यता फिर से प्राप्त होगी — ऐसा मुख्यमंत्री ने कहा। गौरतलब है कि यह निवेश धार्मिक पर्यटन को आर्थिक समृद्धि से जोड़ने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन

कार्यशाला में भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन सेवाओं और त्वरित राहत व्यवस्थाओं पर विशेष बल दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 'स्वच्छ सिंहस्थ, स्वस्थ सिंहस्थ' उनकी सरकार का संकल्प है और करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों, कर्मचारियों, स्वयंसेवी संगठनों और जनप्रतिनिधियों को एक टीम की तरह सेवाभाव से कार्य करने का आह्वान किया।

सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सिंहस्थ को केवल मेला नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि हर 12 वर्ष में आयोजित होने वाला यह महाकुंभ भारत ही नहीं, विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है — भारतीय संस्कृति, दर्शन और पीढ़ियों की आध्यात्मिक विरासत का महासंगम। मां शिप्रा के जल में स्नान को पापमोचन का माध्यम बताते हुए उन्होंने इस आयोजन की गरिमा बनाए रखने की सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर दिया।

आगे की राह

सरकार का लक्ष्य सिंहस्थ 2028 को 'नव्य प्रारूप में भव्य, दिव्य और आध्यात्मिक' बनाना है। ₹25,000 करोड़ के विकास कार्यों के पूर्ण होने और व्यापक प्रशासनिक तैयारियों के साथ, उज्जैन एक नई मिसाल कायम करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — 2016 के सिंहस्थ में भी भीड़ प्रबंधन और स्वच्छता को लेकर गंभीर चुनौतियाँ सामने आई थीं। ₹25,000 करोड़ का निवेश तभी सार्थक होगा जब बुनियादी ढाँचा समय पर पूरा हो और शिप्रा में पर्याप्त जल प्रवाह सुनिश्चित हो — जो कि एक पर्यावरणीय चुनौती बनी हुई है। सरकार की 'टीम वर्क' की अपील सही दिशा में है, पर इतने विशाल आयोजन में जवाबदेही तय करने का ठोस ढाँचा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिंहस्थ 2028 कब और कहाँ होगा?
सिंहस्थ 2028 का आयोजन मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में वर्ष 2028 में होगा। यह हर 12 वर्ष में आयोजित होने वाला महाकुंभ है, जिसे विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक मेला माना जाता है।
सिंहस्थ 2028 में कितने श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है?
CM मोहन यादव के अनुसार सिंहस्थ 2028 में 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के उज्जैन आने का अनुमान है। शिप्रा नदी के घाटों पर 24 घंटे में लगभग 4 करोड़ श्रद्धालु अमृत स्नान कर सकेंगे।
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों पर कितना खर्च हो रहा है?
उज्जैन और आसपास के जिलों में अभी से ₹25,000 करोड़ से अधिक के विभिन्न विकास कार्य प्रगति पर हैं। इन कार्यों का उद्देश्य उज्जयिनी को धार्मिक, आध्यात्मिक और आर्थिक दृष्टि से पुनः समृद्ध बनाना है।
सिंहस्थ 2028 की कार्यशाला में क्या हुआ?
'सिंहस्थ-2016 के अनुभव, 2028 का संकल्प' विषय पर आयोजित इस वृहद प्रशिक्षण कार्यशाला में प्रशासनिक, पुलिस, स्वास्थ्य, नगर निगम और निर्माण एजेंसियों के अधिकारी शामिल हुए। CM मोहन यादव ने भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और स्वच्छता पर विशेष जोर दिया।
सिंहस्थ का धार्मिक महत्व क्या है?
सिंहस्थ हर 12 वर्ष में उज्जैन में आयोजित होता है और इसे भारतीय संस्कृति, दर्शन एवं आध्यात्मिक परंपराओं का महासंगम माना जाता है। मान्यता है कि मां शिप्रा के जल में अमृत स्नान से पापों का शमन होता है।
राष्ट्र प्रेस
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