सिंहस्थ 2028: उज्जैन में शिप्रा के 29 किमी क्षेत्र में घाट और एप्रोच रोड निर्माण तेज, CM मोहन यादव कर रहे नियमित समीक्षा

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सिंहस्थ 2028: उज्जैन में शिप्रा के 29 किमी क्षेत्र में घाट और एप्रोच रोड निर्माण तेज, CM मोहन यादव कर रहे नियमित समीक्षा

सारांश

सिंहस्थ 2028 के लिए उज्जैन में तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं — शिप्रा नदी के 29 किमी क्षेत्र में नए घाट बन रहे हैं, 140 एप्रोच रोड स्थान चिन्हित हो चुके हैं और अधिकारी 36 किमी पैदल चलकर जमीनी हकीकत परख रहे हैं। CM मोहन यादव की सीधी निगरानी में यह महापर्व अब सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक विशाल लॉजिस्टिक चुनौती बन चुका है।

मुख्य बातें

सिंहस्थ 2028 के लिए शिप्रा नदी के 29 किलोमीटर क्षेत्र में नए घाटों का निर्माण जारी है।
अधिकारियों ने घाटों को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए 140 एप्रोच रोड स्थान चिन्हित किए; 18 स्थान उन्हेल रोड ब्रिज क्षेत्र में।
राजेश राजौरा और मेला अधिकारी आशीष सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने 36 किलोमीटर पैदल निरीक्षण किया।
घाट से 200 मीटर के दायरे में एप्रोच रोड निर्माण का खाका तैयार; पुलिस को भीड़ और यातायात प्रबंधन योजना बनाने के निर्देश।
ईंधन बचत के संदेश के तहत निरीक्षण दल एक ही बस में यात्रा कर स्थलों पर पहुँचा।
CM मोहन यादव नियमित रूप से सिंहस्थ तैयारियों की समीक्षा कर विभागों को निर्देश दे रहे हैं।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देशन में सिंहस्थ महापर्व 2028 की तैयारियाँ उज्जैन में पूरी गति से चल रही हैं। शिप्रा नदी के 29 किलोमीटर के दायरे में नए घाटों का निर्माण जारी है, जिससे विश्व भर से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को चौबीसों घंटे स्नान की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके और उन्हें सुरक्षित रूप से उनके गंतव्य तक पहुँचाया जा सके।

मुख्य घटनाक्रम

हाल ही में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने उज्जैन पहुँचकर तैयारियों का जायजा लिया। इसके साथ ही संभागायुक्त एवं सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह और उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ मेला क्षेत्र के महत्वपूर्ण स्थानों का पैदल निरीक्षण किया। अधिकारी दल ने विक्रांत भैरव मंदिर के समीप स्थित पुल से निरीक्षण शुरू कर करीब 5 किलोमीटर क्षेत्र में पैदल भ्रमण किया।

एप्रोच रोड और घाट निर्माण की योजना

अधिकारियों ने उन्हेल रोड ब्रिज के समीप तक शिप्रा नदी पर निर्माणाधीन नए घाटों को जोड़ने के लिए 18 स्थान एप्रोच रोड हेतु चिन्हित किए हैं। द्वितीय चरण के निरीक्षण में अधिकारियों ने शिप्रा किनारे 36 किलोमीटर की पैदल यात्रा की और घाटों से जोड़े जाने वाले प्रस्तावित मार्गों के लिए 140 स्थान चिन्हित किए। लाल पुल ब्रिज के नीचे स्थित घाट क्षेत्र से शुरू होकर गऊघाट, वेधशाला के पीछे, वाकणकर ब्रिज के समीप, जीवन खेड़ी और श्री शनि मंदिर के समीप तक पहुँच मार्ग चिन्हित किए गए हैं।

घाट से 200 मीटर के दायरे में चिन्हित स्थानों पर एप्रोच रोड का निर्माण इस प्रकार किया जाएगा कि श्रद्धालुओं का आवागमन सहज और सुविधाजनक रहे। शिप्रा नदी के दोनों किनारों पर निर्माणाधीन नए घाट और पुराने घाट दोनों को इस योजना में शामिल किया गया है।

भीड़ प्रबंधन और यातायात व्यवस्था

पुलिस विभाग को चिन्हित स्थानों पर भीड़ नियंत्रण और यातायात प्रबंधन की विस्तृत योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। श्रद्धालुओं के लिए वाहन पार्किंग क्षेत्र और घाट तक पहुँचने के लिए सुविधाजनक मार्गों का निर्माण भी प्रगतिरत है, ताकि लाखों की भीड़ का प्रबंधन व्यवस्थित तरीके से हो सके।

ईंधन मितव्ययिता का संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान और मुख्यमंत्री मोहन यादव की पहल पर पेट्रोल-डीजल की बचत का संदेश देते हुए निरीक्षण दल के अधिकारी एक ही बस में सवार होकर निरीक्षण स्थल पर पहुँचे। यह पहल सरकारी कार्यों में संसाधन-संयम की दिशा में एक प्रतीकात्मक कदम के रूप में देखी जा रही है।

आगे की तैयारी

मुख्यमंत्री मोहन यादव नियमित रूप से सिंहस्थ तैयारियों की समीक्षा कर संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दे रहे हैं। सभी विभागों ने निर्माणाधीन विकास कार्यों की गति तेज कर दी है। सिंहस्थ 2028 के लिए उज्जैन को विश्वस्तरीय धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में तैयार करने की दिशा में यह तैयारियाँ एक निर्णायक पड़ाव मानी जा रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

140 चिन्हित स्थान, 36 किमी पैदल निरीक्षण — लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की गति होगी। 2016 के उज्जैन सिंहस्थ में भी बड़े दावे किए गए थे, फिर भी भीड़ प्रबंधन और बुनियादी सुविधाओं को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। यह देखना होगा कि घाट से 200 मीटर के दायरे में प्रस्तावित एप्रोच रोड वास्तव में करोड़ों श्रद्धालुओं के दबाव को झेल पाते हैं या नहीं। पुलिस की भीड़ प्रबंधन योजना अभी तैयार होनी बाकी है — और यही वह बिंदु है जहाँ योजना और हकीकत के बीच फासला तय होगा।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिंहस्थ 2028 क्या है और यह कहाँ आयोजित होगा?
सिंहस्थ 2028 एक प्रमुख हिंदू महापर्व है जो मध्य प्रदेश के उज्जैन में शिप्रा नदी के तट पर आयोजित होगा। यह कुंभ मेले का एक स्वरूप है, जिसमें विश्व भर से करोड़ों श्रद्धालु पवित्र स्नान के लिए एकत्रित होते हैं।
सिंहस्थ 2028 के लिए उज्जैन में कौन-कौन से निर्माण कार्य हो रहे हैं?
शिप्रा नदी के 29 किलोमीटर क्षेत्र में नए घाटों का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा घाटों को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए 140 एप्रोच रोड स्थान चिन्हित किए गए हैं और श्रद्धालुओं के लिए वाहन पार्किंग व्यवस्था भी तैयार की जा रही है।
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों की निगरानी कौन कर रहा है?
मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं नियमित रूप से तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, संभागायुक्त एवं मेला अधिकारी आशीष सिंह और उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी नियमित रूप से स्थलीय निरीक्षण कर रहे हैं।
सिंहस्थ 2028 में भीड़ प्रबंधन की क्या योजना है?
पुलिस विभाग को चिन्हित 140 स्थानों पर भीड़ नियंत्रण और यातायात प्रबंधन की विस्तृत योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। घाट से 200 मीटर के दायरे में एप्रोच रोड इस प्रकार बनाई जाएगी कि श्रद्धालुओं का आवागमन सुचारु रहे।
सिंहस्थ 2028 की तैयारियाँ 2016 के आयोजन से कैसे अलग हैं?
इस बार शिप्रा नदी के 29 किमी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नए घाट बनाए जा रहे हैं और 140 एप्रोच रोड स्थान चिन्हित किए गए हैं, जो पिछले आयोजन की तुलना में अधिक व्यवस्थित ढाँचे का संकेत देते हैं। अधिकारी 36 किलोमीटर पैदल निरीक्षण कर जमीनी स्तर पर तैयारियों का आकलन कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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