सिंहस्थ 2028: शिप्रा घाटों तक पहुँच के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने 18 सड़क स्थलों की पहचान की

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सिंहस्थ 2028: शिप्रा घाटों तक पहुँच के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने 18 सड़क स्थलों की पहचान की

सारांश

सिंहस्थ 2028 की तैयारी में मध्य प्रदेश सरकार ने शिप्रा नदी के 29 किलोमीटर के दायरे में 18 पहुँच मार्ग स्थल चिन्हित किए। 140 अतिरिक्त स्थान भी पहचाने गए। मुख्यमंत्री यादव स्वयं समीक्षा कर रहे हैं।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश सरकार ने सिंहस्थ 2028 की तैयारी में शिप्रा नदी के किनारे घाटों तक पहुँचने के लिए 18 पहुँच मार्ग स्थलों की पहचान की।
प्रस्तावित सड़कें 29 किलोमीटर के दायरे में फैले नवनिर्मित घाटों को उन्हेल रोड पुल क्षेत्र से जोड़ेंगी।
निरीक्षण के दौरान घाट पहुँच मार्गों के लिए लगभग 140 अतिरिक्त स्थानों की भी पहचान की गई।
अधिकांश पहुँच मार्ग नदी किनारों से 200 मीटर के दायरे में प्रस्तावित हैं।
संभागीय आयुक्त आशीष सिंह और कलेक्टर रोशन कुमार सिंह की अगुवाई में पाँच किलोमीटर का संयुक्त निरीक्षण किया गया।
मुख्यमंत्री यादव नियमित रूप से तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं और निर्देश जारी कर रहे हैं।

मध्य प्रदेश सरकार ने सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को गति देते हुए उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे स्थित घाटों तक पहुँचने के लिए 18 नए पहुँच मार्ग स्थलों की पहचान की है। अधिकारियों ने गुरुवार, 14 मई को यह जानकारी देते हुए बताया कि ये प्रस्तावित सड़कें शिप्रा के 29 किलोमीटर के दायरे में फैले नवनिर्मित घाटों को आपस में जोड़ेंगी, जिससे धार्मिक समागम के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारु हो सके।

मुख्य घटनाक्रम

संभागीय आयुक्त एवं सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह, उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने गुरुवार को मेला क्षेत्र का संयुक्त निरीक्षण किया। सर्वेक्षण दल ने श्री विक्रांत भैरव मंदिर के समीप बने पुल से अपना निरीक्षण आरंभ किया और नदी के किनारे-किनारे लगभग पाँच किलोमीटर की दूरी पैदल तय की।

इस निरीक्षण के दौरान घाटों तक पहुँचने वाले प्रस्तावित मार्गों के लिए लगभग 140 अतिरिक्त स्थानों की भी पहचान की गई और संबंधित विभागों को प्रारंभिक कार्य तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए गए।

प्रस्तावित पहुँच मार्गों का विवरण

आधिकारिक बयान के अनुसार, चिन्हित किए गए 18 स्थान नवविकसित घाटों को उन्हेल रोड पुल क्षेत्र तक जोड़ेंगे। प्रमुख प्रस्तावित पहुँच बिंदुओं में गौ घाट के पास, वेधशाला के पीछे, वाकणकर पुल, जीवन खेड़ी, श्री शनि मंदिर के आसपास का क्षेत्र और लाल पुल के नीचे का घाट क्षेत्र शामिल हैं।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि अधिकांश पहुँच मार्गों का प्रस्ताव नदी के किनारों से 200 मीटर के दायरे के भीतर ही रखा गया है। मौजूदा और नवनिर्मित, दोनों प्रकार के घाटों को इस संपर्क योजना में एकीकृत किया जा रहा है।

योजना का उद्देश्य और बुनियादी ढाँचा

परियोजना में व्यवस्थित पार्किंग सुविधाओं और स्नान क्षेत्रों तक पैदल पहुँच के लिए बेहतर रास्तों की योजनाएँ भी शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि इसका मूल उद्देश्य पार्किंग क्षेत्रों और स्नान घाटों के बीच निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करना है, ताकि मेला अवधि के दौरान श्रद्धालु बिना किसी बाधा के आवाजाही कर सकें।

गौरतलब है कि सिंहस्थ महाकुंभ भारत के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है, जिसमें देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन पहुँचते हैं। ऐसे विशाल जनसमागम के लिए सुव्यवस्थित यातायात प्रबंधन और घाट-संपर्क अत्यंत महत्त्वपूर्ण होता है।

सरकार की प्रतिक्रिया और समीक्षा

आधिकारिक बयान में कहा गया है, 'सभी विभागों ने सिंहस्थ से जुड़े विकास कार्यों की गति तेज कर दी है। मुख्यमंत्री यादव नियमित रूप से तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं, ताज़ा जानकारी ले रहे हैं और आवश्यक निर्देश जारी कर रहे हैं।'

यह ऐसे समय में आया है जब सिंहस्थ 2028 के लिए लगभग दो वर्ष का समय शेष है और राज्य सरकार बुनियादी ढाँचे के विकास को प्राथमिकता देते हुए समय-सीमा के भीतर कार्य पूर्ण करने पर जोर दे रही है।

आगे की राह

विभागों को प्रारंभिक कार्य शुरू करने के निर्देश दिए जा चुके हैं और नियमित निरीक्षण का क्रम जारी रहेगा। बुनियादी ढाँचे की ज़रूरतों और कार्यों की प्रगति का आकलन करने के लिए अधिकारी मेला क्षेत्र में समय-समय पर संयुक्त सर्वेक्षण करते रहेंगे, ताकि 2028 तक सभी सुविधाएँ पूरी तरह तैयार हों।

संपादकीय दृष्टिकोण

140 अतिरिक्त पहुँच बिंदु, और मुख्यमंत्री की सीधी निगरानी। लेकिन असली कसौटी यह होगी कि क्या ये सड़कें और घाट-संपर्क समय-सीमा के भीतर पूरे होंगे, क्योंकि पिछले कुंभ आयोजनों में भी बुनियादी ढाँचे की घोषणाएँ अंतिम समय तक अधूरी रह जाने की शिकायतें सामने आई हैं। 200 मीटर के दायरे में पहुँच मार्गों का प्रस्ताव पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि शिप्रा नदी पहले से ही प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है। जन-सुविधा और नदी-संरक्षण के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होगा।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिंहस्थ 2028 के लिए शिप्रा घाटों पर 18 पहुँच मार्ग क्यों बनाए जा रहे हैं?
मध्य प्रदेश सरकार ने सिंहस्थ 2028 के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए शिप्रा नदी के किनारे 18 नए पहुँच मार्ग स्थलों की पहचान की है। ये सड़कें पार्किंग क्षेत्रों और स्नान घाटों के बीच निर्बाध संपर्क स्थापित करेंगी।
ये 18 पहुँच मार्ग कहाँ-कहाँ बनाए जाएँगे?
प्रमुख स्थानों में गौ घाट के पास, वेधशाला के पीछे, वाकणकर पुल, जीवन खेड़ी, श्री शनि मंदिर के आसपास और लाल पुल के नीचे का घाट क्षेत्र शामिल हैं। ये सभी मार्ग नवविकसित घाटों को उन्हेल रोड पुल क्षेत्र से जोड़ेंगे।
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों की निगरानी कौन कर रहा है?
संभागीय आयुक्त एवं सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह और उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह विभिन्न विभागों के साथ मिलकर नियमित निरीक्षण कर रहे हैं। मुख्यमंत्री यादव स्वयं तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं और आवश्यक निर्देश जारी कर रहे हैं।
शिप्रा नदी के किनारे कितने क्षेत्र में घाट विकसित किए जा रहे हैं?
प्रस्तावित सड़कें शिप्रा नदी के 29 किलोमीटर के दायरे में फैले नवनिर्मित घाटों को जोड़ेंगी। अधिकांश पहुँच मार्ग नदी किनारों से 200 मीटर के दायरे के भीतर प्रस्तावित हैं।
140 अतिरिक्त स्थानों की पहचान किस उद्देश्य से की गई है?
गुरुवार के निरीक्षण के दौरान घाटों तक पहुँचने वाले प्रस्तावित मार्गों के लिए लगभग 140 अतिरिक्त स्थानों की पहचान की गई है। संबंधित विभागों को इन स्थानों पर प्रारंभिक कार्य तत्काल शुरू करने के निर्देश दे दिए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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