सिंहस्थ-2028: उज्जैन में ट्रैफिक और आपात सेवाओं के लिए एआई तकनीक, गूगल क्लाउड इंडिया से एमओयू की तैयारी
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ को स्मार्ट और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद ली जाएगी, जिसके लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव और गूगल क्लाउड इंडिया के पदाधिकारियों के बीच 20 मई को भोपाल स्थित मंत्रालय में उच्च स्तरीय राउंड टेबल बैठक हुई। इस बैठक में रियल टाइम भीड़ प्रबंधन से लेकर एआई आधारित आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली तक का विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया गया।
बैठक में क्या हुई चर्चा
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गूगल क्लाउड इंडिया के पदाधिकारियों के साथ प्रशासनिक दक्षता संवर्धन, एआई आधारित सुशासन और सिंहस्थ-2028 की तैयारियों में तकनीकी सहयोग के संबंध में विस्तृत विचार-विमर्श किया। यह बैठक इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 के पश्चात आयोजित की गई, जो इस साझेदारी की रणनीतिक अहमियत को रेखांकित करती है।
अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने बताया कि राज्य सरकार और गूगल क्लाउड इंडिया के बीच एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोग स्थापित किया जा रहा है, जिसके तहत शीघ्र ही औपचारिक एमओयू (MOU) पर हस्ताक्षर होंगे।
इंदौर में बनेगा 'सेंटर फॉर एक्सीलेंस'
इस साझेदारी के तहत इंदौर में एक 'सेंटर फॉर एक्सीलेंस' स्थापित किया जाएगा, जो एआई आधारित नवाचार, अनुसंधान, स्किल डेवलपमेंट और तकनीकी समाधान विकास का प्रमुख केंद्र बनेगा। इस सेंटर से 10,000 से अधिक एआई डेवलपर्स को जोड़ा जाएगा, जो मध्य प्रदेश सहित देश और साउथ ग्लोबल की आवश्यकताओं के अनुरूप रियल टाइम तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएंगे।
गूगल ने प्रदेश में 'एआई फॉर ऑल' स्किलिंग कार्यक्रम, उन्नत क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई व एमएल आधारित पायलट परियोजनाएँ, स्टार्ट-अप इको सिस्टम संवर्धन और साइबर सुरक्षा ढाँचे को मजबूत करने में सहयोग देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।
सिंहस्थ-2028 के लिए एआई फ्रेमवर्क
गूगल द्वारा प्रस्तुत एआई फ्रेमवर्क में चार प्रमुख तकनीकी व्यवस्थाएँ शामिल हैं — रियल टाइम भीड़ प्रबंधन, प्रेडिक्टिव ट्रैफिक एवं सुरक्षा विश्लेषण, एआई आधारित इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम और डिजिटल ट्विन मॉडल। ये सभी प्रणालियाँ मिलकर आयोजन के दौरान किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करेंगी।
गौरतलब है कि सिंहस्थ जैसे विशाल धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं की चुनौती अत्यंत जटिल होती है। 2016 के सिंहस्थ में करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन पहुँचे थे, और 2028 में यह संख्या और अधिक होने का अनुमान है।
'सहायक' एप: श्रद्धालुओं के लिए बहुभाषीय मार्गदर्शन
बैठक में 'सहायक' नामक एक बहुभाषीय एवं वॉइस-सक्षम एआई एप्लिकेशन की अवधारणा भी प्रस्तुत की गई। यह ऐप सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं को भीड़ की स्थिति, मार्गदर्शन, ट्रैफिक व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं की रियल टाइम जानकारी स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध कराएगा। इससे करोड़ों श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और आयोजन प्रबंधन में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार और गूगल क्लाउड इंडिया के बीच एमओयू शीघ्र होने की संभावना है, जिसके बाद इंदौर सेंटर फॉर एक्सीलेंस की स्थापना प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू होगी। 'समृद्ध मध्य प्रदेश' की अवधारणा के अनुरूप यह साझेदारी प्रदेश में एआई आधारित शासन का एक नया अध्याय शुरू कर सकती है।