भारत-नेपाल बिजली व्यापार विस्तार: 1,650 मेगावाट निर्यात और 1,400 मेगावाट आयात पर सहमति
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल और भारत ने 15 जुलाई 2026 को पोखरा में आयोजित नेपाल-इंडिया जॉइंट स्टीयरिंग कमेटी (JSC) की 13वीं बैठक में दो 400 केवी सीमा पार ट्रांसमिशन लाइनों के माध्यम से द्विपक्षीय बिजली व्यापार की सीमा बढ़ाने पर सहमति जताई है। इस समझौते के तहत नेपाल भारत को अब अधिकतम 1,650 मेगावाट बिजली निर्यात कर सकेगा और भारत से 1,400 मेगावाट तक बिजली आयात कर सकेगा — जो पिछली सीमा से क्रमशः 550 मेगावाट और 400 मेगावाट अधिक है।
मुख्य घटनाक्रम
यह ऊर्जा सचिव स्तर की द्विपक्षीय बैठक थी, जिसकी सह-अध्यक्षता नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्रालय की सचिव सरिता दवाडी और भारत के बिजली मंत्रालय के सचिव पंकज कुमार ने की। JSC बैठक से एक दिन पहले संयुक्त सचिव स्तर की संयुक्त कार्य समूह (JWG) की बैठक भी आयोजित हुई।
बिजली व्यापार के लिए दो ट्रांसमिशन लाइनों का उपयोग किया जाएगा — धालकेबार-मुजफ्फरपुर 400 केवी ट्रांसमिशन लाइन, जो वर्ष 2016 से चालू है, और धालकेबार-सीतामढ़ी 400 केवी ट्रांसमिशन लाइन, जो अब लगभग पूर्ण होने की स्थिति में है। धालकेबार-सीतामढ़ी लाइन का निर्माण भारत की सरकारी कंपनी एसजेवीएन लिमिटेड की सहायक इकाई एसजेवीएन अरुन-तीन पॉवर डेवलपमेंट कंपनी कर रही है, जो नेपाल के पूर्वी हिस्से में 900 मेगावाट की अरुण-तीन जलविद्युत परियोजना भी विकसित कर रही है।
नई ट्रांसमिशन परियोजनाओं को मंजूरी
बैठक में कई नई उच्च क्षमता वाली सीमा पार ट्रांसमिशन परियोजनाओं पर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। चामेलिया (नेपाल)-जौलजीबी (भारत) 220 केवी डबल सर्किट ट्रांसमिशन लाइन की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को मंजूरी दी गई और इसके निर्माण का लक्ष्य दिसंबर 2028 तक रखा गया है।
नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (NEA) और भारत की पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (PGCIL) के बीच संयुक्त उद्यम कंपनी (JV) गठन की प्रक्रिया में तेजी लाने पर भी सहमति बनी। यह JV इनरुवा-न्यू पूर्णिया और डोडोधारा (न्यू लामकी)-बरेली 400 केवी सीमा पार ट्रांसमिशन लाइन परियोजनाओं को विकसित करेगी। दोनों कंपनियाँ पहले ही शेयरहोल्डर्स एग्रीमेंट (SHA) और जॉइंट वेंचर समझौते पर हस्ताक्षर कर चुकी हैं।
मोतिहारी-निजगढ़ 400 केवी डबल सर्किट ट्रांसमिशन लाइन की DPR को भी स्वीकृति मिली। यह परियोजना वर्ष 2034-35 तक नेपाल से भारत को अतिरिक्त बिजली निर्यात करने में सक्षम बनाएगी। इसके अतिरिक्त, मुजफ्फरपुर-धालकेबार 400 केवी ट्रांसमिशन लाइन की क्षमता बढ़ाने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी मिली — इसके लिए मौजूदा तारों को हाई टेम्परेचर लो सैग कंडक्टर से बदला जाएगा।
बुटवल-गोरखपुर लाइन और एमसीसी फंडिंग
न्यू बुटवल-गोरखपुर 400 केवी सीमा पार ट्रांसमिशन लाइन परियोजना पर भी महत्वपूर्ण सहमति बनी। नेपाल वाले हिस्से का निर्माण अगस्त 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है, जबकि न्यू बुटवल 400 केवी सबस्टेशन दिसंबर 2027 तक तैयार होगा। सबस्टेशन बनने तक यह लाइन अस्थायी रूप से 220 केवी क्षमता पर संचालित की जाएगी।
नेपाल के ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, इस अंतरिम व्यवस्था के तहत यह ट्रांसमिशन लाइन भारत से 130 मेगावाट तक बिजली आयात करने और नेपाल से 200 मेगावाट तक बिजली निर्यात करने में सक्षम होगी। इस परियोजना के नेपाल वाले हिस्से का निर्माण अमेरिकी सरकार की सहायता एजेंसी मिलेनियम चैलेंज कॉर्पोरेशन (MCC) की फंडिंग से किया जा रहा है।
गौरतलब है कि प्रस्तावित लखनऊ-कोहलपुर (लमही) 400 केवी ट्रांसमिशन लाइन परियोजना को अंतिम रूप देने से पहले अतिरिक्त तकनीकी अध्ययन किए जाएंगे।
क्या होगा आगे
यह समझौता ऐसे समय में आया है जब नेपाल अपनी जलविद्युत क्षमता का तेजी से विस्तार कर रहा है और भारत को बिजली निर्यात को एक प्रमुख राजस्व स्रोत के रूप में देख रहा है। धालकेबार-सीतामढ़ी लाइन के चालू होने के बाद दोनों देशों के बीच बिजली व्यापार की मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि अपेक्षित है। आने वाले वर्षों में NEA-PGCIL संयुक्त उद्यम और मोतिहारी-निजगढ़ जैसी परियोजनाएँ इस ऊर्जा साझेदारी को और गहरा करेंगी।