7 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भारत-नेपाल बिजली व्यापार विस्तार: 1,650 मेगावाट निर्यात और 1,400 मेगावाट आयात पर सहमति

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारत-नेपाल बिजली व्यापार विस्तार: 1,650 मेगावाट निर्यात और 1,400 मेगावाट आयात पर सहमति

सारांश

पोखरा में हुई JSC की 13वीं बैठक में भारत और नेपाल ने बिजली व्यापार की सीमा बड़े पैमाने पर बढ़ाई — नेपाल अब 1,650 मेगावाट निर्यात और 1,400 मेगावाट आयात कर सकेगा। धालकेबार-सीतामढ़ी लाइन के आसन्न चालू होने के साथ यह ऊर्जा साझेदारी दक्षिण एशियाई बिजली सहयोग की नई इबारत लिख रही है।

मुख्य बातें

नेपाल-इंडिया JSC की 13वीं बैठक 15 जुलाई 2026 को पोखरा में आयोजित हुई।
नेपाल अब भारत को अधिकतम 1,650 मेगावाट बिजली निर्यात और भारत से 1,400 मेगावाट आयात कर सकेगा।
धालकेबार-मुजफ्फरपुर (2016 से चालू) और धालकेबार-सीतामढ़ी (निर्माणाधीन) — दो 400 केवी लाइनें व्यापार का माध्यम होंगी।
चामेलिया-जौलजीबी 220 केवी लाइन की DPR मंजूर; निर्माण लक्ष्य दिसंबर 2028 ।
NEA और PGCIL के JV द्वारा इनरुवा-न्यू पूर्णिया व डोडोधारा-बरेली 400 केवी लाइनें विकसित होंगी।
न्यू बुटवल-गोरखपुर लाइन का नेपाल हिस्सा अगस्त 2026 तक पूरा होगा; MCC फंडिंग से निर्मित।

नेपाल और भारत ने 15 जुलाई 2026 को पोखरा में आयोजित नेपाल-इंडिया जॉइंट स्टीयरिंग कमेटी (JSC) की 13वीं बैठक में दो 400 केवी सीमा पार ट्रांसमिशन लाइनों के माध्यम से द्विपक्षीय बिजली व्यापार की सीमा बढ़ाने पर सहमति जताई है। इस समझौते के तहत नेपाल भारत को अब अधिकतम 1,650 मेगावाट बिजली निर्यात कर सकेगा और भारत से 1,400 मेगावाट तक बिजली आयात कर सकेगा — जो पिछली सीमा से क्रमशः 550 मेगावाट और 400 मेगावाट अधिक है।

मुख्य घटनाक्रम

यह ऊर्जा सचिव स्तर की द्विपक्षीय बैठक थी, जिसकी सह-अध्यक्षता नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्रालय की सचिव सरिता दवाडी और भारत के बिजली मंत्रालय के सचिव पंकज कुमार ने की। JSC बैठक से एक दिन पहले संयुक्त सचिव स्तर की संयुक्त कार्य समूह (JWG) की बैठक भी आयोजित हुई।

बिजली व्यापार के लिए दो ट्रांसमिशन लाइनों का उपयोग किया जाएगा — धालकेबार-मुजफ्फरपुर 400 केवी ट्रांसमिशन लाइन, जो वर्ष 2016 से चालू है, और धालकेबार-सीतामढ़ी 400 केवी ट्रांसमिशन लाइन, जो अब लगभग पूर्ण होने की स्थिति में है। धालकेबार-सीतामढ़ी लाइन का निर्माण भारत की सरकारी कंपनी एसजेवीएन लिमिटेड की सहायक इकाई एसजेवीएन अरुन-तीन पॉवर डेवलपमेंट कंपनी कर रही है, जो नेपाल के पूर्वी हिस्से में 900 मेगावाट की अरुण-तीन जलविद्युत परियोजना भी विकसित कर रही है।

नई ट्रांसमिशन परियोजनाओं को मंजूरी

बैठक में कई नई उच्च क्षमता वाली सीमा पार ट्रांसमिशन परियोजनाओं पर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। चामेलिया (नेपाल)-जौलजीबी (भारत) 220 केवी डबल सर्किट ट्रांसमिशन लाइन की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को मंजूरी दी गई और इसके निर्माण का लक्ष्य दिसंबर 2028 तक रखा गया है।

नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (NEA) और भारत की पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (PGCIL) के बीच संयुक्त उद्यम कंपनी (JV) गठन की प्रक्रिया में तेजी लाने पर भी सहमति बनी। यह JV इनरुवा-न्यू पूर्णिया और डोडोधारा (न्यू लामकी)-बरेली 400 केवी सीमा पार ट्रांसमिशन लाइन परियोजनाओं को विकसित करेगी। दोनों कंपनियाँ पहले ही शेयरहोल्डर्स एग्रीमेंट (SHA) और जॉइंट वेंचर समझौते पर हस्ताक्षर कर चुकी हैं।

मोतिहारी-निजगढ़ 400 केवी डबल सर्किट ट्रांसमिशन लाइन की DPR को भी स्वीकृति मिली। यह परियोजना वर्ष 2034-35 तक नेपाल से भारत को अतिरिक्त बिजली निर्यात करने में सक्षम बनाएगी। इसके अतिरिक्त, मुजफ्फरपुर-धालकेबार 400 केवी ट्रांसमिशन लाइन की क्षमता बढ़ाने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी मिली — इसके लिए मौजूदा तारों को हाई टेम्परेचर लो सैग कंडक्टर से बदला जाएगा।

बुटवल-गोरखपुर लाइन और एमसीसी फंडिंग

न्यू बुटवल-गोरखपुर 400 केवी सीमा पार ट्रांसमिशन लाइन परियोजना पर भी महत्वपूर्ण सहमति बनी। नेपाल वाले हिस्से का निर्माण अगस्त 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है, जबकि न्यू बुटवल 400 केवी सबस्टेशन दिसंबर 2027 तक तैयार होगा। सबस्टेशन बनने तक यह लाइन अस्थायी रूप से 220 केवी क्षमता पर संचालित की जाएगी।

नेपाल के ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, इस अंतरिम व्यवस्था के तहत यह ट्रांसमिशन लाइन भारत से 130 मेगावाट तक बिजली आयात करने और नेपाल से 200 मेगावाट तक बिजली निर्यात करने में सक्षम होगी। इस परियोजना के नेपाल वाले हिस्से का निर्माण अमेरिकी सरकार की सहायता एजेंसी मिलेनियम चैलेंज कॉर्पोरेशन (MCC) की फंडिंग से किया जा रहा है।

गौरतलब है कि प्रस्तावित लखनऊ-कोहलपुर (लमही) 400 केवी ट्रांसमिशन लाइन परियोजना को अंतिम रूप देने से पहले अतिरिक्त तकनीकी अध्ययन किए जाएंगे।

क्या होगा आगे

यह समझौता ऐसे समय में आया है जब नेपाल अपनी जलविद्युत क्षमता का तेजी से विस्तार कर रहा है और भारत को बिजली निर्यात को एक प्रमुख राजस्व स्रोत के रूप में देख रहा है। धालकेबार-सीतामढ़ी लाइन के चालू होने के बाद दोनों देशों के बीच बिजली व्यापार की मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि अपेक्षित है। आने वाले वर्षों में NEA-PGCIL संयुक्त उद्यम और मोतिहारी-निजगढ़ जैसी परियोजनाएँ इस ऊर्जा साझेदारी को और गहरा करेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

650 मेगावाट की यह नई सीमा संख्या में प्रभावशाली है, लेकिन असली परीक्षा धालकेबार-सीतामढ़ी लाइन के वास्तविक चालू होने की तारीख होगी — जो 'लगभग तैयार' की स्थिति में कई वर्षों से है। नेपाल की जलविद्युत क्षमता मानसून पर अत्यधिक निर्भर है, जिसका अर्थ है कि शुष्क मौसम में निर्यात क्षमता सैद्धांतिक अधिकतम से काफी कम रह सकती है। MCC फंडिंग से निर्मित बुटवल-गोरखपुर लाइन की राजनीतिक पृष्ठभूमि को देखते हुए, इसका समय पर पूरा होना भी कूटनीतिक दृढ़ता की परीक्षा है। दीर्घकालिक दृष्टि से यह साझेदारी नेपाल को ऊर्जा-निर्यातक राष्ट्र बनाने की दिशा में ठोस कदम है, पर क्रियान्वयन की गति ही इसकी विश्वसनीयता तय करेगी।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-नेपाल बिजली व्यापार में नई सीमा क्या तय की गई है?
JSC की 13वीं बैठक में तय हुआ कि नेपाल अब दो 400 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के माध्यम से भारत को अधिकतम 1,650 मेगावाट बिजली निर्यात और भारत से 1,400 मेगावाट आयात कर सकेगा। पहले यह सीमा क्रमशः 1,100 मेगावाट निर्यात और 1,000 मेगावाट आयात थी।
बिजली व्यापार के लिए कौन-सी ट्रांसमिशन लाइनें उपयोग होंगी?
धालकेबार-मुजफ्फरपुर 400 केवी ट्रांसमिशन लाइन (वर्ष 2016 से चालू) और धालकेबार-सीतामढ़ी 400 केवी ट्रांसमिशन लाइन (निर्माण लगभग पूर्ण) — ये दो लाइनें बिजली व्यापार का माध्यम होंगी। धालकेबार-सीतामढ़ी लाइन का निर्माण SJVN अरुन-तीन पॉवर डेवलपमेंट कंपनी कर रही है।
JSC बैठक में किन नई परियोजनाओं को मंजूरी मिली?
बैठक में चामेलिया-जौलजीबी 220 केवी डबल सर्किट लाइन की DPR (लक्ष्य: दिसंबर 2028) और मोतिहारी-निजगढ़ 400 केवी डबल सर्किट लाइन की DPR को मंजूरी मिली। NEA और PGCIL के संयुक्त उद्यम द्वारा इनरुवा-न्यू पूर्णिया व डोडोधारा-बरेली 400 केवी लाइनों के विकास में तेजी लाने पर भी सहमति बनी।
न्यू बुटवल-गोरखपुर ट्रांसमिशन लाइन की क्या स्थिति है?
नेपाल वाले हिस्से का निर्माण अगस्त 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है, जबकि न्यू बुटवल 400 केवी सबस्टेशन दिसंबर 2027 तक तैयार होगा। तब तक यह लाइन अस्थायी रूप से 220 केवी पर चलेगी और भारत से 130 मेगावाट आयात व नेपाल से 200 मेगावाट निर्यात कर सकेगी। इस परियोजना को MCC (मिलेनियम चैलेंज कॉर्पोरेशन) की फंडिंग मिल रही है।
यह समझौता नेपाल-भारत ऊर्जा संबंधों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह समझौता नेपाल को जलविद्युत निर्यात से राजस्व बढ़ाने का स्पष्ट मार्ग देता है और भारत को स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करता है। NEA-PGCIL JV और कई नई 400 केवी परियोजनाओं के साथ यह साझेदारी दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय बिजली सहयोग (SAARC/BIMSTEC) के लिए एक मॉडल बन सकती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 2 सप्ताह पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले