नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल बोले — 'भारत से ऐतिहासिक और बहुआयामी संबंध, और मजबूत होंगे'
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने 7 जून 2026 को नई दिल्ली में कहा कि भारत और नेपाल के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंध हैं और दोनों देशों के पास कनेक्टिविटी, ऊर्जा, व्यापार तथा पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सहयोग के और अधिक अवसर मौजूद हैं। इस वर्ष की शुरुआत में पद संभालने के बाद खनाल की यह पहली भारत यात्रा है, जो तीन दिनों तक चली।
मुख्य घटनाक्रम
तीन दिवसीय दौरे के दौरान विदेश मंत्री खनाल ने भारत के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की। शनिवार को भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने खनाल के साथ द्विपक्षीय बैठक के बाद 2015 के भूकंप पुनर्निर्माण कार्यक्रम के अंतर्गत नेपाल को 72 स्वास्थ्य सुविधाएँ और 12 सांस्कृतिक विरासत परियोजनाएँ सौंपीं। यह कदम दोनों देशों के बीच विकास-साझेदारी की निरंतरता को दर्शाता है।
खनाल के बयान: संबंधों की परिभाषा
खनाल ने भारत-नेपाल संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा, 'हमारे बीच सच में बहुत अच्छे संबंध हैं। यह एक ऐतिहासिक संबंध है — पर्यटन से लेकर हमारी नदी प्रणाली, हमारे पानी, हमारी ऊर्जा और हमारे परिवारों से जुड़ा हुआ। यह बहुत बहुआयामी प्रकृति का है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देश इस ऐतिहासिक आधार को और आगे ले जाना चाहते हैं।
सीमा-विवाद पर स्पष्टीकरण
जब खनाल से नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के उस बयान के बारे में पूछा गया जिसमें उन्होंने कथित तौर पर भारतीय क्षेत्र पर कब्जे का उल्लेख किया था, तो खनाल ने कहा, 'मेरे विदेश मंत्रालय ने पहले ही इस पर स्पष्टीकरण दे दिया है। प्रधानमंत्री उस समय संसद में क्रॉस-बॉर्डर कब्जे से जुड़े एक सवाल का जवाब दे रहे थे।' इस प्रकार उन्होंने विवाद को शांत करने का प्रयास किया।
उच्च-स्तरीय दौरों की उम्मीद
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह की संभावित भारत यात्रा के बारे में पूछे जाने पर खनाल ने कहा कि फिलहाल कोई तारीख तय नहीं की गई है, लेकिन उनके इस दौरे से आने वाले महीनों में दोनों ओर से कई उच्च-स्तरीय यात्राओं का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद है। यह टिप्पणी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक उतार-चढ़ाव देखे गए हैं।
आगे की राह
गौरतलब है कि भारत और नेपाल के बीच कनेक्टिविटी, जल-विद्युत सहयोग और व्यापार को लेकर कई परियोजनाएँ विभिन्न चरणों में हैं। खनाल की इस यात्रा को इन परियोजनाओं को गति देने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच आगामी उच्च-स्तरीय दौरे इन क्षेत्रों में ठोस प्रगति की संभावनाएँ और मजबूत कर सकते हैं।