सीएम मोहन यादव का बयान: आदि शंकराचार्य का दर्शन है भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का स्तंभ

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सीएम मोहन यादव का बयान: आदि शंकराचार्य का दर्शन है भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का स्तंभ

सारांश

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आदि शंकराचार्य के दर्शन को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का आधार बताया। उनका योगदान सदियों से हमारे धर्म और संस्कृति को जीवित रखे हुए है।

Key Takeaways

  • आदि शंकराचार्य का दर्शन भारतीय संस्कृति का आधार है।
  • ओंकारेश्वर में प्रकटोत्सव का आयोजन किया गया।
  • मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
  • एकात्म पर्व १७ से २१ अप्रैल तक मनाया जाएगा।
  • भारतीय संस्कृति की सनातन विरासत को जीवित रखा गया है।

भोपाल, १७ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि आदि शंकराचार्य का दर्शन भारतीय संस्कृति, धर्म और आध्यात्मिक एकता का मुख्य आधार है। यदि आज हमारी सनातन विरासत, शास्त्र और आध्यात्मिक परम्पराएं जीवित और जागृत हैं, तो यह सब आदिगुरू शंकराचार्य के प्रयासों और आशीर्वाद के कारण ही संभव हुआ है।

आचार्य शंकराचार्य की जयंती के अवसर पर ओंकारेश्वर के एकात्म धाम में आयोजित पांच दिवसीय प्रकटोत्सव के शुभारंभ सत्र में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि अद्वैत ज्ञान के सूर्योदय का केंद्र ओंकारेश्वर की चेतना की अनुभूति आज सभी कर रहे हैं। मध्य प्रदेश ने ऐतिहासिक रूप से धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया है। हर युग में इसके प्रमाण विद्यमान हैं।

उन्होंने कहा कि श्रीरामचंद्र जी के वनवास के समय मंदाकिनी माता के किनारे चित्रकूट धाम पर जाकर प्रभु श्रीराम का जीवन मानवता के लिए पूजनीय बन गया और समाज ने रामराज्य का अनुभव प्राप्त किया। भगवान श्रीराम ने संस्कारों, व्यवहारगत मूल्यों और शासन के सूत्र प्रदान किए जो आज भी महत्वपूर्ण हैं। इसी तरह, श्रीकृष्ण ने कंस वध के बाद उज्जयिनी स्थित सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण की और कर्मवाद का संदेश दिया, जो आज भी प्रासंगिक है।

मुख्यमंत्री ने आदि शंकराचार्य के बारे में बात करते हुए कहा कि कालड़ी, केरल से आए ८ वर्षीय बालक शंकर ने ओंकारेश्वर में पहुँचकर गुरु गोविंदपाद के आशीर्वाद से आदि शंकराचार्य बनकर सनातन धर्म की धारा को अविरल रूप से बहाने का आधार प्रदान किया। आदि शंकराचार्य का दर्शन आज भी भारतीय संस्कृति, धर्म और आध्यात्मिक एकता का आधार बना हुआ है।

कार्यक्रम में श्री द्वारका शारदा पीठ के जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती, विवेकानंद केंद्र की उपाध्यक्ष पद्मश्री निवेदिता भिड़े, और स्वामी शारदानंद सरस्वती सहित कई वरिष्ठ संत उपस्थित थे। राज्य सरकार के संस्कृति विभाग और आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास के तत्वावधान में १७ अप्रैल से २१ अप्रैल तक एकात्म पर्व मनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने श्री द्वारका शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज के साथ वैशाख शुक्ल पंचमी के उपलक्ष में आयोजित आदि शंकराचार्य के प्रकटोत्सव 'एकात्म पर्व' कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। उन्होंने अद्वैत लोक एवं अक्षर ब्रह्म प्रदर्शनी का लोकार्पण किया और वैदिक अनुष्ठान में भी हिस्सा लिया।

Point of View

NationPress
19/04/2026

Frequently Asked Questions

आदि शंकराचार्य का योगदान क्या है?
आदि शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत का प्रचार किया और भारतीय संस्कृति को एक नई पहचान दी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किस कार्यक्रम में भाग लिया?
उन्होंने आदि शंकराचार्य की जयंती के अवसर पर ओंकारेश्वर में प्रकटोत्सव का शुभारंभ किया।
एकात्म पर्व कब मनाया जा रहा है?
एकात्म पर्व १७ अप्रैल से २१ अप्रैल तक मनाया जा रहा है।
आदि शंकराचार्य का जन्म स्थान क्या है?
आदि शंकराचार्य का जन्म स्थान कालड़ी, केरल है।
मध्य प्रदेश में आध्यात्मिकता का क्या महत्व है?
मध्य प्रदेश आध्यात्मिकता का केंद्र रहा है और यहां की संस्कृति में इसका गहरा प्रभाव है।
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