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चंपावत का पुराना बालेश्वर मंदिर: पत्थरों पर उकेरी सदियों पुरानी विरासत, CM धामी ने की तारीफ

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चंपावत का पुराना बालेश्वर मंदिर: पत्थरों पर उकेरी सदियों पुरानी विरासत, CM धामी ने की तारीफ

सारांश

उत्तराखंड के चंपावत में बसा पुराना बालेश्वर मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं — यह चन्द वंश की 10वीं-12वीं सदी की स्थापत्य प्रतिभा का जीवंत दस्तावेज़ है। सावन के पहले सोमवार पर CM धामी ने इसे देशभर के सामने रखा।

मुख्य बातें

पुराना बालेश्वर मंदिर उत्तराखंड के चंपावत में पिथौरागढ़ से 76 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
यह मंदिर समूह बालेश्वर , रत्नेश्वर और चंपावती दुर्गा को समर्पित है, जिसे चन्द वंश के राजाओं ने 10वीं-12वीं सदी के बीच बनवाया था।
मंदिर की छत और दीवारों पर उकेरी गई जटिल नक्काशी प्राचीन कारीगरी की अनूठी मिसाल है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सावन के पहले सोमवार पर एक्स पर मंदिर का वीडियो साझा कर इसे राष्ट्रीय पहचान दिलाई।
चंपावत में क्रांतेश्वर, मानेश्वर, ताड़केश्वर सहित कई अन्य शिव मंदिर और पाताल रुद्रेश्वर गुफा भी स्थित हैं।

चंपावत स्थित पुराना बालेश्वर मंदिर उत्तराखंड की देवभूमि की सबसे दुर्लभ स्थापत्य धरोहरों में से एक है — जहाँ पत्थरों पर उकेरी गई जटिल नक्काशी 10वीं से 12वीं सदी के बीच की कारीगरी की जीवंत गवाही देती है। सावन के पहले सोमवार के अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मंदिर परिसर का एक विशेष वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर इसकी भव्यता और आध्यात्मिक महत्ता को देशभर के श्रद्धालुओं तक पहुँचाया।

मुख्यमंत्री धामी का संदेश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर मंदिर का वीडियो साझा करते हुए लिखा, 'देवभूमि उत्तराखंड के चंपावत जिले में मौजूद पुराना बालेश्वर मंदिर, भगवान शिव में पवित्र आस्था, एक समृद्ध इतिहास और शानदार आर्किटेक्चरल कला का एक शानदार संगम है। पत्थरों पर की गई इसकी बेमिसाल नक्काशी और पुरानी कारीगरी सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत की शानदार गाथा बताती है।' उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि चंपावत आने पर इस पवित्र धाम के दर्शन अवश्य करें।

मंदिर का इतिहास और स्थापत्य वैभव

बालेश्वर मंदिर पिथौरागढ़ से लगभग 76 किलोमीटर की दूरी पर चंपावत नगर में स्थित है और इसे जिले का सर्वाधिक कलात्मक मंदिर माना जाता है। यह वास्तव में मंदिरों का एक समूह है — बालेश्वर, रत्नेश्वर और चंपावती दुर्गा को समर्पित — जिसे चन्द वंश के आरंभिक राजाओं ने निर्मित कराया था। मंदिर की छत और दीवारों पर अंकित जटिल नक्काशी आज भी उसी प्राचीन महिमा और शिल्प-उत्कृष्टता की साक्षी है।

पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह क्षेत्र एक समय नागों की राजधानी हुआ करता था। कथित तौर पर नगर का नाम चंपावती — चन्द वंश की संरक्षक देवी — के नाम पर रखा गया, जिन्होंने इसी बालेश्वर मंदिर में भगवान शिव की आराधना की थी। आज भी मंदिर परिसर में चंपावती देवी का एक अलग मंदिर है और वे इस क्षेत्र की रक्षक देवी के रूप में पूजी जाती हैं। 10वीं से 12वीं सदी के बीच चन्द वंश ने इसे अपनी राजधानी बनाया और बालेश्वर मंदिर परिसर का निर्माण कराया।

आसपास के अन्य शिव मंदिर

चंपावत केवल बालेश्वर मंदिर तक सीमित नहीं है — यहाँ भगवान शिव को समर्पित अनेक अन्य धाम भी हैं, जिनमें क्रांतेश्वर, मानेश्वर, ताड़केश्वर, ऋषनेश्वर, दिक्तेश्वर और मल्लारेश्वर प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त पाताल रुद्रेश्वर नामक एक प्राचीन गुफा भी यहाँ की धार्मिक विरासत का हिस्सा है।

पर्यटन और आस्था का केंद्र

सावन के पावन माह में बालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ उमड़ती है। मुख्यमंत्री धामी की इस पोस्ट के बाद मंदिर एक बार फिर चर्चा में आ गया है, और पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की डिजिटल पहल उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन को नई गति दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उत्तराखंड की उस सांस्कृतिक पहचान की है जो दशकों से मुख्यधारा की पर्यटन नीति में हाशिये पर रही। मुख्यमंत्री धामी की सोशल मीडिया पोस्ट स्वागतयोग्य है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार इन मंदिरों के संरक्षण और पहुँच के लिए ठोस बजटीय प्रावधान कर रही है। चन्द वंश की विरासत को डिजिटल प्रचार से परे भौतिक संरक्षण की ज़रूरत है — वरना ये नक्काशियाँ तस्वीरों में ही जीवित रहेंगी।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुराना बालेश्वर मंदिर चंपावत कहाँ स्थित है?
पुराना बालेश्वर मंदिर उत्तराखंड के चंपावत जिले में पिथौरागढ़ से लगभग 76 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह चंपावत नगर का सबसे प्रसिद्ध और कलात्मक मंदिर परिसर है।
बालेश्वर मंदिर किसने बनवाया था?
बालेश्वर मंदिर परिसर का निर्माण चन्द वंश के आरंभिक राजाओं ने 10वीं से 12वीं सदी के बीच कराया था। उस काल में चंपावत चन्द वंश की राजधानी भी थी।
बालेश्वर मंदिर में किन देवताओं की पूजा होती है?
यह एक मंदिर समूह है जिसमें बालेश्वर (भगवान शिव), रत्नेश्वर और चंपावती दुर्गा को समर्पित मंदिर शामिल हैं। चंपावती देवी इस क्षेत्र की संरक्षक देवी मानी जाती हैं।
CM धामी ने बालेश्वर मंदिर के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सावन के पहले सोमवार पर एक्स पर मंदिर का वीडियो साझा करते हुए इसे आस्था, इतिहास और स्थापत्य कला का संगम बताया। उन्होंने श्रद्धालुओं से चंपावत आने पर इस धाम के दर्शन करने का आग्रह किया।
चंपावत में बालेश्वर के अलावा और कौन-से शिव मंदिर हैं?
चंपावत में क्रांतेश्वर, मानेश्वर, ताड़केश्वर, ऋषनेश्वर, दिक्तेश्वर और मल्लारेश्वर जैसे कई शिव मंदिर हैं। इसके साथ ही पाताल रुद्रेश्वर नामक एक प्राचीन गुफा भी यहाँ की धार्मिक विरासत का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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