सावन में बागनाथ मंदिर बना आस्था का केंद्र, CM धामी ने एक्स पर की दर्शन की अपील
सारांश
मुख्य बातें
देवभूमि उत्तराखंड के बागेश्वर जनपद में सरयू और गोमती नदियों के पावन संगम पर विराजमान श्री बागनाथ मंदिर इस सावन मास में श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है। 21 अगस्त को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो पोस्ट कर श्रद्धालुओं और पर्यटकों से इस दिव्य धाम के दर्शन करने की अपील की।
मुख्यमंत्री धामी की अपील
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर लिखा, 'बागेश्वर में सरयू और गोमती नदियों के पावन संगम के निकट स्थित श्री बागनाथ मंदिर भगवान शिव की आराधना को समर्पित एक प्राचीन एवं दिव्य धाम है। पवित्र सावन मास में यहां दर्शन एवं पूजन का विशेष महत्व है। बागेश्वर जनपद आगमन पर इस पवित्र मंदिर के दर्शन अवश्य करें।' उनकी यह अपील ऐसे समय आई है जब सावन के पवित्र महीने में शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।
बागनाथ मंदिर की पौराणिक मान्यता
मान्यता है कि इसी पावन स्थल पर भगवान शिव ने 'बाघ' अर्थात व्याघ्र का रूप धारण कर महर्षि वशिष्ठ की पूजा को सफल किया था, जिसके कारण इस धाम का नाम 'बागनाथ' पड़ा। यहाँ भगवान शिव व्याघ्रेश्वर रूप में प्रकट हुए थे। एक अन्य मान्यता के अनुसार, यहाँ शिव और पार्वती स्वयंभू रूप में एक साथ विराजमान हैं, जो इस स्थान को विशेष आध्यात्मिक महत्व प्रदान करता है।
ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व
इस मंदिर का धार्मिक महत्व 7वीं शताब्दी से भी पुराना माना जाता है। वर्तमान मुख्य पत्थर का मंदिर नागर शैली में चंद वंश के राजा लक्ष्मी चंद द्वारा लगभग 1450 से 1602 ईस्वी के बीच बनवाया अथवा जीर्णोद्धार किया गया था। मंदिर परिसर में एक संस्कृत शिलालेख भी है जो इससे भी पहले के काल का है। मंदिर परिसर में 8वीं से 10वीं शताब्दी की कई दुर्लभ मूर्तियाँ और ऐतिहासिक शिलालेख सुरक्षित रखे गए हैं।
गौरतलब है कि यह उत्तराखंड के चुनिंदा दक्षिणमुखी शिव मंदिरों में से एक है, जो इसे स्थापत्य दृष्टि से भी विशिष्ट बनाता है।
मंदिर परिसर और उत्सव
बागनाथ मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर के अतिरिक्त कई अन्य देव-स्थान भी हैं — भैरव मंदिर, दत्तात्रेय महाराज, गंगा माई मंदिर, हनुमान मंदिर, दुर्गा मंदिर, कालिका मंदिर, थिंगल भिरव मंदिर, पंचनाम जुनाखरा और वनेश्वर मंदिर शामिल हैं। शिवरात्रि के वार्षिक अवसर पर यहाँ भक्तों की विशाल भीड़ उमड़ती है।
आम जनता और पर्यटन पर असर
सावन माह में मुख्यमंत्री की इस अपील से बागेश्वर में धार्मिक पर्यटन को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। प्राचीन वास्तुकला, नदी-संगम का नैसर्गिक सौंदर्य और आध्यात्मिक वातावरण मिलकर इस स्थान को उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थ स्थलों में स्थापित करते हैं। आने वाले सावन सोमवारों पर यहाँ श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है।