5 अक्टूबर 2026
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जम्मू में ₹1.22 करोड़ की वित्तीय धोखाधड़ी: ईओडब्ल्यू ने तीन आरोपियों के खिलाफ सांबा कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की

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जम्मू में ₹1.22 करोड़ की वित्तीय धोखाधड़ी: ईओडब्ल्यू ने तीन आरोपियों के खिलाफ सांबा कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की

सारांश

जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच की ईओडब्ल्यू ने ₹1.22 करोड़ की निवेशक ठगी में तीन कंपनियों के अधिकारियों के खिलाफ सांबा कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। मुख्य आरोपी फरार है। RBI पहले ही दो कंपनियों के NBFC लाइसेंस रद्द कर चुका था, जबकि तीसरी कभी पंजीकृत ही नहीं थी।

मुख्य बातें

जम्मू ईओडब्ल्यू ने 5 अक्टूबर 2026 को सांबा की अतिरिक्त मुंसिफ जेएमआईसी कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
आरोपियों पर सांबा निवासियों से ₹1,22,96,324 की ठगी का आरोप है।
तीन आरोपी — राजेश कुमार राय , मनोज कुमार , विक्रम सिंह — मेट्रोपॉलिटन फाइनेंस , मानसर फाइनेंस और वैभव परिवार इंडिया प्रोजेक्ट्स से जुड़े थे।
RBI पहले ही दो कंपनियों के NBFC लाइसेंस रद्द कर चुका था; तीसरी कंपनी कभी पंजीकृत नहीं थी।
मुख्य आरोपी राजेश कुमार राय फरार है; सीआरपीसी धारा 512 के तहत कार्यवाही का अनुरोध किया गया।
जाँच अधिकारी इंस्पेक्टर तरनजीत सिंह ; एसएसपी फैसल कुरैशी ने जनता को सतर्क रहने की अपील की।

जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू), जम्मू ने सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को सांबा जिले के निवेशकों से ₹1,22,96,324 की ठगी के मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ अतिरिक्त मुंसिफ जेएमआईसी कोर्ट, सांबा में औपचारिक चार्जशीट दाखिल कर दी। यह मामला फर्जी वित्तीय योजनाओं के जरिए आम नागरिकों की मेहनत की कमाई हड़पने से जुड़ा है।

आरोपी कौन हैं

ईओडब्ल्यू के बयान के अनुसार, तीन आरोपियों की पहचान राजेश कुमार राय (मैनेजिंग डायरेक्टर), मनोज कुमार (एरिया/ब्रांच मैनेजर) और विक्रम सिंह (असिस्टेंट ब्रांच मैनेजर) के रूप में की गई है। ये तीनों मेट्रोपॉलिटन फाइनेंस लिमिटेड, मानसर फाइनेंस लिमिटेड और वैभव परिवार इंडिया प्रोजेक्ट्स लिमिटेड से संबद्ध थे।

इनमें से राजेश कुमार राय फरार है और जाँच से लगातार बच रहा है। क्राइम ब्रांच ने अदालत से सीआरपीसी की धारा 512 के तहत उसके खिलाफ कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया है।

धोखाधड़ी का तरीका

इंस्पेक्टर तरनजीत सिंह की अगुवाई में हुई जाँच से सामने आया कि आरोपियों ने सांबा के निवासियों को कंपल्सरी कन्वर्टिबल प्रेफरेंस शेयर्स (सीसीपीएस) और फिक्स्ड डिपॉजिट जैसी योजनाओं में बड़े रिटर्न का लालच देकर निवेश करवाया। कुल मिलाकर निवेशकों से ₹1,22,96,324 इकट्ठे किए गए — जिसमें मानसर फाइनेंस लिमिटेड के नाम पर ₹8,87,442 और मेट्रोपॉलिटन फाइनेंस लिमिटेड के नाम पर ₹1,14,08,882 शामिल हैं।

आरोप है कि मैच्योरिटी पर रकम लौटाने की बजाय आरोपियों ने ऐसे चेक जारी किए जो बाउंस हो गए और निवेशकों को उनकी जमा-पूँजी वापस नहीं मिली।

आरबीआई और नियामक उल्लंघन

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की जाँच में पाया गया कि मानसर फाइनेंस लिमिटेड और मेट्रोपॉलिटन फाइनेंस लिमिटेड के एनबीएफसी (NBFC) पंजीकरण कानूनी नियमों का पालन न करने के कारण रद्द कर दिए गए थे। इससे भी आगे, वैभव परिवार इंडिया प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को कभी एनबीएफसी के रूप में पंजीकृत ही नहीं किया गया था — यानी यह कंपनी पूरी तरह अनधिकृत रूप से जनता से धन जुटा रही थी।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में अनधिकृत वित्तीय कंपनियों द्वारा ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में निवेशकों को फँसाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।

साक्ष्य और जाँच

जाँच के दौरान सीसीपीएस सर्टिफिकेट, डिबेंचर, मनी रिसीट और बैंक रिकॉर्ड सहित कई महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य जब्त किए गए। मनोज कुमार और विक्रम सिंह के खिलाफ जब्त दस्तावेजों और गवाहों की सूची के साथ चार्जशीट कोर्ट में प्रस्तुत की गई है।

जनता के लिए चेतावनी

जम्मू ईओडब्ल्यू के एसएसपी क्राइम ब्रांच फैसल कुरैशी ने आम नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की किसी भी संदिग्ध वित्तीय योजना की सूचना तुरंत क्राइम ब्रांच ईओडब्ल्यू, जम्मू को दें। गौरतलब है कि सांबा जैसे छोटे शहरों में वित्तीय साक्षरता की कमी का फायदा उठाकर ऐसे गिरोह अक्सर सक्रिय होते हैं। आने वाले दिनों में सुनवाई के साथ मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी सांबा में पैसा जुटता रहा — यह नियामकीय सूचना के प्रसार की विफलता है। फरार मुख्य आरोपी के खिलाफ धारा 512 का आवेदन आवश्यक है, लेकिन असली जवाबदेही का सवाल यह है कि इन कंपनियों की गतिविधियाँ इतने समय तक नजरअंदाज क्यों रहीं। पीड़ित निवेशकों के लिए चार्जशीट पहला कदम है — असली राहत तब मिलेगी जब जब्त संपत्तियों से वसूली सुनिश्चित हो।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू में ₹1.22 करोड़ की वित्तीय धोखाधड़ी का मामला क्या है?
यह मामला सांबा जिले के निवेशकों को सीसीपीएस और फिक्स्ड डिपॉजिट जैसी योजनाओं में उच्च रिटर्न का लालच देकर ₹1,22,96,324 ठगने से जुड़ा है। जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच की ईओडब्ल्यू ने इस मामले में 5 अक्टूबर 2026 को सांबा कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है।
इस मामले में कौन-कौन से आरोपी हैं और वे किन कंपनियों से जुड़े थे?
तीन आरोपी हैं — राजेश कुमार राय (मैनेजिंग डायरेक्टर), मनोज कुमार (एरिया/ब्रांच मैनेजर) और विक्रम सिंह (असिस्टेंट ब्रांच मैनेजर)। ये मेट्रोपॉलिटन फाइनेंस लिमिटेड, मानसर फाइनेंस लिमिटेड और वैभव परिवार इंडिया प्रोजेक्ट्स लिमिटेड से संबद्ध थे।
RBI की जाँच में इन कंपनियों के बारे में क्या सामने आया?
RBI की जाँच में पाया गया कि मानसर फाइनेंस लिमिटेड और मेट्रोपॉलिटन फाइनेंस लिमिटेड के NBFC पंजीकरण नियमों का उल्लंघन करने के कारण रद्द किए जा चुके थे। वैभव परिवार इंडिया प्रोजेक्ट्स लिमिटेड कभी NBFC के रूप में पंजीकृत ही नहीं थी, यानी वह पूरी तरह अनधिकृत रूप से जनता से धन जुटा रही थी।
मुख्य आरोपी राजेश कुमार राय के खिलाफ क्या कार्यवाही हो रही है?
राजेश कुमार राय फरार है और जाँच से बच रहा है। क्राइम ब्रांच ने सांबा कोर्ट से सीआरपीसी की धारा 512 के तहत उसके खिलाफ कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया है, जो फरार आरोपियों की अनुपस्थिति में सुनवाई और सजा की प्रक्रिया से संबंधित है।
इस धोखाधड़ी से कैसे बचें और शिकायत कहाँ करें?
एसएसपी क्राइम ब्रांच ईओडब्ल्यू फैसल कुरैशी ने जनता को सलाह दी है कि किसी भी वित्तीय योजना में निवेश से पहले कंपनी का RBI से NBFC पंजीकरण सत्यापित करें। किसी भी संदिग्ध वित्तीय गतिविधि की शिकायत क्राइम ब्रांच ईओडब्ल्यू, जम्मू को करें।
राष्ट्र प्रेस
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