ASEAN+3 आर्थिक आउटलुक 2026: क्षेत्र की विकास दर 4.1%, होर्मुज संकट से ऊर्जा कीमतों पर दबाव
सारांश
मुख्य बातें
आसियान प्लस थ्री (ASEAN+3) मैक्रोइकोनॉमिक रिसर्च ऑफिस ने 5 अक्टूबर 2026 को बीजिंग में 'क्षेत्रीय वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (2026)' और 'क्षेत्रीय आर्थिक आउटलुक 2026' का अक्टूबर संस्करण आधिकारिक रूप से जारी किया। रिपोर्ट के अनुसार, मध्य पूर्व में ऊर्जा संकट और वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं के बावजूद यह क्षेत्र समग्र रूप से मजबूत बना हुआ है।
विकास दर और मुद्रास्फीति का अनुमान
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि ASEAN+3 क्षेत्र की आर्थिक विकास दर 2026 और 2027 दोनों वर्षों में 4.1 प्रतिशत रहेगी। मुद्रास्फीति दर 2026 में 1.6 प्रतिशत और 2027 में 1.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
आंकड़ों के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़े मजबूत निर्यात और निवेश इस क्षेत्र की वृद्धि के प्रमुख चालक बने हुए हैं। गौरतलब है कि यह वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौर में इस क्षेत्र की उल्लेखनीय स्थिरता को दर्शाता है।
होर्मुज संकट और ऊर्जा कीमतों पर असर
होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजरानी बाधित होने से ऊर्जा कीमतों में उछाल आया है, जिसने वैश्विक मुद्रास्फीति को लेकर बाजार की चिंताओं को फिर से हवा दे दी है। रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती ऊर्जा कीमतें और अल नीनो के कारण खाद्य कीमतों पर पड़ने वाला दबाव इस क्षेत्र में मुद्रास्फीति को ऊपर धकेल सकता है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएँ पहले से ही दबाव में हैं और उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर अमेरिकी डॉलर की ऊँची ब्याज दरों का बोझ बना हुआ है।
क्षेत्र का लचीलापन: प्रमुख निष्कर्ष
रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि प्रतिकूल बाहरी कारकों और अमेरिकी डॉलर की बढ़ती ब्याज दरों के दबाव के बावजूद, ASEAN देशों और चीन, जापान एवं दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्थाओं ने मजबूत लचीलापन प्रदर्शित किया है।
ASEAN+3 में दक्षिण-पूर्व एशिया के दस देशों के साथ-साथ चीन, जापान और दक्षिण कोरिया शामिल हैं — यह समूह वैश्विक GDP में एक बड़ी हिस्सेदारी रखता है। इस क्षेत्र की स्थिरता वैश्विक व्यापार और निवेश प्रवाह के लिए महत्वपूर्ण संकेत है।
आगे की चुनौतियाँ
विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव, होर्मुज मार्ग की अनिश्चितता और अल नीनो के दीर्घकालिक प्रभाव इस क्षेत्र के लिए 2027 में भी प्रमुख जोखिम बने रह सकते हैं। AI-संचालित निर्यात वृद्धि की गति यदि बनी रही तो यह इन दबावों को काफी हद तक संतुलित कर सकती है।