13 अक्टूबर 2026
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IMF चेतावनी: होर्मुज बंद रहने से 2026 में खाड़ी देशों की GDP में बड़ी गिरावट, क्रूड $95.74 तक पहुँचने का अनुमान

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IMF चेतावनी: होर्मुज बंद रहने से 2026 में खाड़ी देशों की GDP में बड़ी गिरावट, क्रूड $95.74 तक पहुँचने का अनुमान

सारांश

IMF की ताज़ा WEO रिपोर्ट एक कड़ी चेतावनी है — होर्मुज बंद रहने से कुवैत, इराक और कतर की GDP 16% तक सिकुड़ सकती है, क्रूड $95.74 तक पहुँच सकता है और वैश्विक खाद्य-उर्वरक कीमतों में भी उछाल आने के आसार हैं। भारत फिलहाल सुरक्षित जोन में है, लेकिन ऊर्जा-आयातक देशों के लिए संकट गहराने का खतरा है।

मुख्य बातें

IMF की अक्टूबर 2026 WEO रिपोर्ट के अनुसार मध्य पूर्व एवं मध्य एशिया की विकास दर 2026 में -0.3% रह सकती है, जो 2025 के 3.7% से तीव्र गिरावट है।
क्रूड ऑयल की औसत कीमत 2026 में $95.74 प्रति बैरल और 2027 में $87.39 रहने का अनुमान; 2025 में यह $67.74 थी।
कुवैत (16.7%) , इराक (16%) , कतर (15.6%) और बहरीन (11.3%) को 2026 में सबसे बड़ी GDP गिरावट का सामना करना पड़ सकता है।
ईरान की अर्थव्यवस्था 7.6% सिकुड़ सकती है और मुद्रास्फीति 78.6% तक पहुँचने का अनुमान है।
प्राकृतिक गैस 48% , उर्वरक 10% और खाद्य कीमतें 5% तक बढ़ सकती हैं; भारत को अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रखा गया है।
होर्मुज से पहले प्रतिदिन 2 करोड़ बैरल — वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का एक-चौथाई — गुजरता था।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने 13 अक्टूबर 2026 को जारी अपनी अक्टूबर 2026 वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (WEO) रिपोर्ट में आगाह किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के लंबे समय तक बंद रहने और मध्य पूर्व में जारी सशस्त्र संघर्ष के कारण मध्य पूर्व एवं मध्य एशिया क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि दर 2025 के 3.7 प्रतिशत से गिरकर 2026 में -0.3 प्रतिशत तक सिकुड़ सकती है। यह अप्रैल 2026 के अनुमान की तुलना में 2.2 प्रतिशत अंक की कटौती है और वैश्विक ऊर्जा बाज़ार के लिए एक गंभीर संकेत है।

मुख्य आर्थिक अनुमान

IMF के अनुसार, 2026 में कच्चे तेल की औसत कीमत $95.74 प्रति बैरल रहने का अनुमान है — जो 2025 के $67.74 प्रति बैरल की तुलना में करीब 41 प्रतिशत अधिक है। प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी 48 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव बताई गई है। इसके दूसरे-तीसरे दर्जे के प्रभावों में उर्वरक कीमतों में 10 प्रतिशत और खाद्य कीमतों में 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी शामिल है। 2027 में क्रूड के $87.39 प्रति बैरल तक आने का अनुमान है, जो होर्मुज मार्ग के दोबारा खुलने पर मजबूत रिकवरी का संकेत देता है।

खाड़ी देशों पर असर

सबसे गहरी चोट छोटे तेल-निर्भर खाड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने का अनुमान है। रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, 2026 में कुवैत की GDP 16.7 प्रतिशत, इराक की 16 प्रतिशत, कतर की 15.6 प्रतिशत और बहरीन की 11.3 प्रतिशत सिकुड़ सकती है। IMF के अनुसार ऊर्जा उत्पादन और परिवहन में बाधा इन देशों के लिए सबसे बड़ा झटका होगी।

हालाँकि रिपोर्ट यह भी कहती है कि 2027 में तेज वापसी संभव है — इराक 19 प्रतिशत, कतर 18.8 प्रतिशत, कुवैत 17.1 प्रतिशत और बहरीन 13.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर सकते हैं।

सऊदी अरब पर प्रभाव अपेक्षाकृत सीमित रहेगा क्योंकि उसके पास निर्यात के विविध वैकल्पिक मार्ग हैं; फिर भी उसकी अर्थव्यवस्था 2026 में 3.3 प्रतिशत सिकुड़ सकती है और 2027 में 7.9 प्रतिशत बढ़ सकती है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की अर्थव्यवस्था 2026 में 3.9 प्रतिशत घट सकती है और 2027 में 7.7 प्रतिशत की रफ्तार पकड़ सकती है। उल्लेखनीय है कि ओमान इस रुझान से अलग रहेगा और 2026 में 4.1 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।

ईरान की स्थिति

IMF के अनुमान के अनुसार, ईरान की अर्थव्यवस्था 2026 में 7.6 प्रतिशत सिकुड़ सकती है। सैन्य तनाव में वृद्धि, नौसैनिक नाकेबंदी और कड़े प्रतिबंधों का संयुक्त दबाव इस गिरावट का कारण बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में मुद्रास्फीति 78.6 प्रतिशत तक पहुँच सकती है — जो आम नागरिकों की क्रय शक्ति को गहरी चोट पहुँचाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब ईरान पहले से ही बहु-स्तरीय प्रतिबंधों के बोझ तले दब रहा था।

होर्मुज जलडमरूमध्य का वैश्विक महत्व

IMF की रिपोर्ट याद दिलाती है कि युद्ध शुरू होने से पहले होर्मुज जलडमरूमध्य से प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता था — जो वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का करीब एक-चौथाई है। खाड़ी देशों ने कुछ निर्यात वैकल्पिक बंदरगाहों के जरिए मोड़ा है, और खाड़ी क्षेत्र के बाहर उत्पादन में भी प्रतिदिन लगभग 20 लाख बैरल की वृद्धि हुई है। गौरतलब है कि यह नहर मात्र एक व्यापारिक मार्ग नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की धुरी है।

भारत पर असर और वैश्विक चेतावनी

IMF ने स्पष्ट किया है कि भारत मजबूत घरेलू माँग और सेवा क्षेत्र के बल पर अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में है और उसे उन ऊर्जा-आयातक उभरती अर्थव्यवस्थाओं की श्रेणी से अलग रखा गया है जिनके विकास अनुमान में कटौती की गई है।

हालाँकि कोष ने चेतावनी दी है कि ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों को ऊँचे आयात बिल, मुद्रा विनिमय दर पर दबाव, कम वास्तविक आय और सीमित राजकोषीय क्षमता जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। यदि मध्य पूर्व में तनाव और गहराता है, तो वैश्विक महंगाई, आर्थिक वृद्धि और वित्तीय संतुलन पर दबाव और बढ़ेगा — एक ऐसा परिदृश्य जिसके लिए नीति-निर्माताओं को अभी से तैयार रहना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

खाद्य और मुद्रास्फीति की गणित को उलट सकती है। जो बात मुख्यधारा की कवरेज अक्सर चूक जाती है, वह यह है कि कुवैत और इराक जैसी 16-17% सिकुड़ने वाली अर्थव्यवस्थाएँ 2027 में उतनी ही तेज़ वापसी दिखा सकती हैं — यह 'V-शेप' रिकवरी परिदृश्य तभी सच होगा जब होर्मुज वास्तव में खुले। भारत का 'बेहतर स्थिति में' होना सुकूनदेह है, लेकिन $95 प्रति बैरल क्रूड लंबे समय तक टिके तो घरेलू महंगाई और चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ना तय है — जिसका ज़िक्र रिपोर्ट में है, पर नीतिगत तैयारी का खाका अभी स्पष्ट नहीं।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IMF की अक्टूबर 2026 WEO रिपोर्ट में मध्य पूर्व के बारे में क्या कहा गया है?
IMF के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहने और मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण मध्य पूर्व एवं मध्य एशिया क्षेत्र की विकास दर 2026 में -0.3% रह सकती है, जो 2025 के 3.7% से तीव्र गिरावट है। 2027 में होर्मुज खुलने पर 6.3% की रिकवरी का अनुमान है।
2026 में क्रूड ऑयल की कीमत कितनी रहने का अनुमान है?
IMF के अनुसार 2026 में कच्चे तेल की औसत कीमत $95.74 प्रति बैरल रह सकती है, जो 2025 के $67.74 प्रति बैरल से करीब 41% अधिक है। 2027 में यह घटकर $87.39 प्रति बैरल होने का अनुमान है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से किन देशों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा?
IMF के अनुमान के अनुसार सबसे बड़ा झटका कुवैत (-16.7%), इराक (-16%), कतर (-15.6%) और बहरीन (-11.3%) को लगेगा। ये सभी देश तेल निर्यात के लिए होर्मुज मार्ग पर अत्यधिक निर्भर हैं।
भारत पर होर्मुज संकट का क्या असर होगा?
IMF ने भारत को उन ऊर्जा-आयातक उभरती अर्थव्यवस्थाओं की श्रेणी से अलग रखा है जिनके विकास अनुमान में कटौती की गई है। मजबूत घरेलू माँग और सेवा क्षेत्र के कारण भारत अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में बना हुआ है, हालाँकि ऊँचे आयात बिल और मुद्रा दबाव की चुनौती बनी रहेगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
युद्ध शुरू होने से पहले होर्मुज से प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता था, जो वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का करीब एक-चौथाई है। इसके बंद होने से ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में व्यापक बाधा उत्पन्न होती है और कीमतें तेज़ी से बढ़ती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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