अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चे तेल में साप्ताहिक 8% उछाल, ब्रेंट $109 के पार; होर्मुज बंद रहने का खतरा
सारांश
मुख्य बातें
वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में 16 मई 2025 को समाप्त सप्ताह के दौरान तीव्र उछाल दर्ज की गई, जब अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति बाधित होने की आशंका को हवा दी। शुक्रवार को कारोबारी सत्र के अंत में प्रमुख बेंचमार्क क्रूड अनुबंध 3 प्रतिशत से अधिक की बढ़त लेकर बंद हुए, और पूरे सप्ताह में तेल बाज़ार ने 8 प्रतिशत तक की तेजी देखी।
साप्ताहिक बाज़ार आँकड़े
ब्रेंट क्रूड वायदा शुक्रवार को 3.54 डॉलर यानी 3.35 प्रतिशत की बढ़त के साथ 109.26 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 4.25 डॉलर यानी 4.2 प्रतिशत की तेजी के साथ 105.42 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँचा। पूरे सप्ताह के दौरान ब्रेंट में 7.84 प्रतिशत और WTI में 10.48 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई — जो हाल के महीनों में किसी एक सप्ताह की सबसे तीखी बढ़त है।
होर्मुज जलडमरूमध्य: संकट की धुरी
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक है — इससे वैश्विक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की लगभग 20 प्रतिशत आपूर्ति गुजरती है। यह मार्ग सऊदी अरब, इराक और कतर जैसे खाड़ी देशों के लिए प्राथमिक निर्यात गलियारा है। बाज़ार को पहले उम्मीद थी कि युद्धविराम से जहाजों की आवाजाही सामान्य हो जाएगी, लेकिन दोनों पक्षों की हालिया बयानबाजी ने यह उम्मीद धूमिल कर दी है।
तेहरान और वॉशिंगटन के बीच टकराव
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने कहा कि तेहरान को अमेरिका पर 'कोई भरोसा नहीं' है और ईरान तभी बातचीत करेगा जब वॉशिंगटन गंभीरता दिखाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान दोबारा संघर्ष और कूटनीतिक बातचीत — दोनों के लिए तैयार है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर नाराजगी जताते हुए दोहराया कि तेहरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। ट्रंप ने माँग की कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोले।
चीन का रुख और ताइवान की छाया
अपनी चीन यात्रा के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ इस बात पर सहमति जताई कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। हालाँकि, शी जिनपिंग ने इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की। चीन के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा कि यह संघर्ष 'कभी होना ही नहीं चाहिए था' और इसके जारी रहने की कोई वजह नहीं है। इसी यात्रा के दौरान कथित तौर पर शी जिनपिंग ने चेतावनी दी कि ताइवान मुद्दे का समाधान न होने पर द्विपक्षीय संबंधों को गंभीर खतरा हो सकता है, जिससे अमेरिका-चीन तनाव भी एक बार फिर उभरता दिखा।
आगे क्या होगा
यह तनाव ऐसे समय में उभरा है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पहले से ही आपूर्ति-श्रृंखला की अनिश्चितताओं से जूझ रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति चालू खाते के घाटे और ईंधन मूल्य-निर्धारण पर दबाव बढ़ा सकती है।