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अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चे तेल में साप्ताहिक 8% उछाल, ब्रेंट $109 के पार; होर्मुज बंद रहने का खतरा

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अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चे तेल में साप्ताहिक 8% उछाल, ब्रेंट $109 के पार; होर्मुज बंद रहने का खतरा

सारांश

अमेरिका-ईरान टकराव ने इस सप्ताह वैश्विक तेल बाज़ार को हिला दिया — ब्रेंट $109 के पार और WTI में 10% से अधिक की साप्ताहिक बढ़त। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहने की आशंका ने दुनिया की 20% ऊर्जा आपूर्ति पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं।

मुख्य बातें

ब्रेंट क्रूड शुक्रवार को 3.35% बढ़कर 109.26 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ; सप्ताह भर में 7.84% की तेजी।
WTI क्रूड 4.2% उछलकर 105.42 डॉलर पर पहुँचा; साप्ताहिक बढ़त 10.48% ।
होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल और LNG की लगभग 20% आपूर्ति गुजरती है — इसके बंद रहने की आशंका मुख्य कारण।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने कहा — अमेरिका पर 'कोई भरोसा नहीं'; बातचीत तभी जब वॉशिंगटन गंभीरता दिखाए।
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को होर्मुज खोलने का आदेश दिया और परमाणु हथियार विकास पर सख्त रुख दोहराया।
चीन ने संघर्ष को 'अनावश्यक' बताया; शी जिनपिंग ने ताइवान मुद्दे पर कथित तौर पर गंभीर चेतावनी दी।

वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में 16 मई 2025 को समाप्त सप्ताह के दौरान तीव्र उछाल दर्ज की गई, जब अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति बाधित होने की आशंका को हवा दी। शुक्रवार को कारोबारी सत्र के अंत में प्रमुख बेंचमार्क क्रूड अनुबंध 3 प्रतिशत से अधिक की बढ़त लेकर बंद हुए, और पूरे सप्ताह में तेल बाज़ार ने 8 प्रतिशत तक की तेजी देखी।

साप्ताहिक बाज़ार आँकड़े

ब्रेंट क्रूड वायदा शुक्रवार को 3.54 डॉलर यानी 3.35 प्रतिशत की बढ़त के साथ 109.26 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 4.25 डॉलर यानी 4.2 प्रतिशत की तेजी के साथ 105.42 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँचा। पूरे सप्ताह के दौरान ब्रेंट में 7.84 प्रतिशत और WTI में 10.48 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई — जो हाल के महीनों में किसी एक सप्ताह की सबसे तीखी बढ़त है।

होर्मुज जलडमरूमध्य: संकट की धुरी

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक है — इससे वैश्विक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की लगभग 20 प्रतिशत आपूर्ति गुजरती है। यह मार्ग सऊदी अरब, इराक और कतर जैसे खाड़ी देशों के लिए प्राथमिक निर्यात गलियारा है। बाज़ार को पहले उम्मीद थी कि युद्धविराम से जहाजों की आवाजाही सामान्य हो जाएगी, लेकिन दोनों पक्षों की हालिया बयानबाजी ने यह उम्मीद धूमिल कर दी है।

तेहरान और वॉशिंगटन के बीच टकराव

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने कहा कि तेहरान को अमेरिका पर 'कोई भरोसा नहीं' है और ईरान तभी बातचीत करेगा जब वॉशिंगटन गंभीरता दिखाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान दोबारा संघर्ष और कूटनीतिक बातचीत — दोनों के लिए तैयार है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर नाराजगी जताते हुए दोहराया कि तेहरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। ट्रंप ने माँग की कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोले।

चीन का रुख और ताइवान की छाया

अपनी चीन यात्रा के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ इस बात पर सहमति जताई कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। हालाँकि, शी जिनपिंग ने इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की। चीन के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा कि यह संघर्ष 'कभी होना ही नहीं चाहिए था' और इसके जारी रहने की कोई वजह नहीं है। इसी यात्रा के दौरान कथित तौर पर शी जिनपिंग ने चेतावनी दी कि ताइवान मुद्दे का समाधान न होने पर द्विपक्षीय संबंधों को गंभीर खतरा हो सकता है, जिससे अमेरिका-चीन तनाव भी एक बार फिर उभरता दिखा।

आगे क्या होगा

यह तनाव ऐसे समय में उभरा है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पहले से ही आपूर्ति-श्रृंखला की अनिश्चितताओं से जूझ रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति चालू खाते के घाटे और ईंधन मूल्य-निर्धारण पर दबाव बढ़ा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि सरकार पहले से ही ईंधन सब्सिडी के बोझ से जूझ रही है। मुख्यधारा की कवरेज कीमतों पर केंद्रित है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या भारत की रणनीतिक पेट्रोलियम रिज़र्व क्षमता इस तरह के लंबे व्यवधान को झेलने के लिए पर्याप्त है — और इसका जवाब अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस सप्ताह कच्चे तेल की कीमतें इतनी क्यों बढ़ीं?
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहने की आशंका ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट का डर पैदा किया। इससे ब्रेंट क्रूड सप्ताह भर में 7.84% और WTI 10.48% उछला।
होर्मुज जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया की लगभग 20% तेल और LNG आपूर्ति गुजरती है। यह सऊदी अरब, इराक और कतर जैसे प्रमुख खाड़ी देशों का मुख्य निर्यात मार्ग है, इसलिए इसमें कोई भी रुकावट वैश्विक ऊर्जा बाज़ार को सीधे प्रभावित करती है।
ईरान के विदेश मंत्री ने अमेरिका के बारे में क्या कहा?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने कहा कि तेहरान को अमेरिका पर 'कोई भरोसा नहीं' है और ईरान तभी बातचीत करेगा जब वॉशिंगटन गंभीरता दिखाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान संघर्ष और कूटनीतिक बातचीत — दोनों के लिए तैयार है।
इस तेल मूल्य वृद्धि का भारत पर क्या असर होगा?
भारत अपनी ज़रूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज उछाल से आयात बिल बढ़ेगा और चालू खाते के घाटे पर दबाव आएगा। लंबे समय तक ऊँची कीमतें रहने पर घरेलू ईंधन दरों में भी बदलाव की आशंका है।
चीन ने अमेरिका-ईरान संघर्ष पर क्या रुख अपनाया?
चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह संघर्ष 'कभी होना ही नहीं चाहिए था' और इसके जारी रहने की कोई वजह नहीं है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ट्रंप के साथ बैठक में ईरान के परमाणु हथियारों पर सहमति जताई, लेकिन इस पर सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया।
राष्ट्र प्रेस
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