कच्चे तेल में बड़ी उछाल: हॉर्मुज स्ट्रेट विवाद से ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल के पार
सारांश
Key Takeaways
- ब्रेंट क्रूड का जून फ्यूचर्स 23 अप्रैल को 103.35 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा — पिछले बंद भाव से 4 प्रतिशत अधिक।
- WTI क्रूड 1.62 प्रतिशत बढ़कर 94.47 डॉलर प्रति बैरल पर आया।
- हॉर्मुज स्ट्रेट 50 दिनों से अधिक समय से बंद, वैश्विक तेल-गैस आपूर्ति का पांचवां हिस्सा प्रभावित।
- अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने 31 जहाजों को वापस लौटने का आदेश दिया।
- ईरानी संसद स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने नाकाबंदी हटने तक स्ट्रेट न खोलने की घोषणा की।
- भारत के आयात बिल और चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ने की आशंका, सरकार ने कहा ईंधन आउटलेट सामान्य रूप से चालू।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
मुंबई, 23 अप्रैल: हॉर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने को लेकर गहरी अनिश्चितता के चलते वैश्विक कच्चे तेल बाजार में गुरुवार को एक बार फिर जोरदार तेजी देखी गई। ब्रेंट क्रूड का भाव 103.35 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव से करीब 4 प्रतिशत अधिक है। यह स्थिति भारत समेत उन तमाम देशों के लिए चिंताजनक है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मध्य-पूर्व के तेल पर निर्भर हैं।
बाजार में क्या हो रहा है?
इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज (ICE) पर ब्रेंट क्रूड का जून फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट सुबह के कारोबार में 103.35 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था। वहीं, न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज (NYMEX) पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड का जून फ्यूचर्स 1.62 प्रतिशत की बढ़त के साथ 94.47 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
विश्लेषकों के अनुसार यह उछाल मुख्य रूप से हॉर्मुज स्ट्रेट की अनिश्चित स्थिति की वजह से है। यह जलमार्ग 50 दिनों से अधिक समय से बंद है, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का करीब पांचवां हिस्सा प्रभावित हो चुका है।
अमेरिका-ईरान तनाव की पृष्ठभूमि
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी नेताओं की ओर से यूनिफाइड प्रस्ताव मिलने तक युद्धविराम को आगे बढ़ाने की घोषणा की, लेकिन ईरान पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी को नहीं हटाया। इस निर्णय ने बाजार की चिंताओं को और गहरा कर दिया।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि अमेरिकी नाकाबंदी के तहत 31 जहाजों को वापस मुड़ने या बंदरगाह लौटने का आदेश दिया गया है। यह कदम वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक गंभीर संकेत है।
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मौजूदा हालात में हॉर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोला जाएगा। उनका कहना था कि अमेरिका द्वारा इस जलमार्ग को अवरुद्ध करना सीजफायर का उल्लंघन है और इससे ईरानी बंदरगाहों को सीधे निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक अमेरिका यह नाकाबंदी नहीं हटाता, पूर्ण युद्धविराम संभव नहीं है।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत आयात के जरिए पूरा करता है, जिसमें मध्य-पूर्व की हिस्सेदारी बड़ी है। हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाला तेल भारत के लिए सबसे सस्ता और सुलभ विकल्प रहा है।
कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से भारत के आयात बिल पर भारी दबाव पड़ सकता है, जिससे चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ने और रुपये पर दबाव आने की आशंका है। इसके अलावा, पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर भी असर पड़ सकता है, हालांकि सरकार का कहना है कि देशभर में खुदरा ईंधन आउटलेट सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।
गौरतलब है कि यह संकट ऐसे समय में आया है जब भारत पहले से ही वैश्विक व्यापार युद्ध और मुद्रास्फीति के दबाव से जूझ रहा है। ऊर्जा महंगाई का असर सीधे परिवहन, कृषि और उत्पादन लागत पर पड़ता है जो अंततः आम उपभोक्ता की जेब तक पहुंचता है।
ऐतिहासिक संदर्भ और आगे की राह
हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव कोई नई बात नहीं है। 2019 में भी इस जलमार्ग के पास टैंकरों पर हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतें एक दिन में 15 प्रतिशत तक उछली थीं। लेकिन इस बार 50 दिनों से अधिक की नाकाबंदी ने आपूर्ति श्रृंखला को कहीं अधिक गहरी चोट पहुंचाई है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका-ईरान के बीच कोई ठोस समझौता नहीं होता, तो ब्रेंट क्रूड के 110-115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। आने वाले दिनों में ईरान परमाणु वार्ता और अमेरिकी विदेश नीति के अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।