ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर के पार, पश्चिम एशिया तनाव से 5 महीने के उच्च स्तर पर; भारत पर महंगाई का खतरा
सारांश
मुख्य बातें
अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड मंगलवार को 110.08 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया — 0.48 प्रतिशत की तेज़ी के साथ यह लगभग पाँच महीने का उच्चतम स्तर है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, ईरान की होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चेतावनियों और क्षेत्रीय ऊर्जा अवसंरचना पर हमलों की खबरों ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। इसी के साथ अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 0.46 प्रतिशत की बढ़त के साथ 99 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँच गया।
ईरान की होर्मुज चेतावनी ने बाज़ार को हिलाया
ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा अरेफ ने कहा है कि देश की सुरक्षा के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण स्थापित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अपने मित्र देशों के लिए इस मार्ग से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित कर सकता है, लेकिन मौजूदा हालात के लिए अमेरिका ज़िम्मेदार है और उसे इसकी कीमत चुकानी होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के कुल समुद्री तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा वहन करता है। इस मार्ग पर कोई भी अस्थिरता वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को गहरे प्रभावित कर सकती है।
क्षेत्रीय हमलों ने बढ़ाई आपूर्ति की चिंता
रिपोर्टों के अनुसार, हूती विद्रोहियों ने यमन में एक सैन्य प्रशिक्षण शिविर को निशाना बनाया है। इसके अलावा सऊदी अरब की ऊर्जा, हवाई अड्डा और सैन्य सुविधाओं पर भी हमलों की घटनाएँ सामने आई हैं। इन घटनाओं ने बाज़ार में यह आशंका पैदा कर दी है कि यदि क्षेत्रीय संघर्ष और गहरा हुआ तो ऊर्जा आपूर्ति में गंभीर व्यवधान आ सकता है।
गौरतलब है कि ब्रेंट क्रूड वर्ष 2026 में अब तक लगभग 80 प्रतिशत की बढ़त दर्ज कर चुका है। बाज़ार विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका-ईरान तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के लगातार बने रहने से ऊर्जा बाज़ार पर दोहरा दबाव है।
आपूर्ति पक्ष से कुछ राहत के संकेत
अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल की आपूर्ति युद्ध-पूर्व स्तर के लगभग 80 प्रतिशत तक वापस आ चुकी है, हालाँकि रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है।
इराक के तेल मंत्री ने बताया कि इस महीने देश का तेल निर्यात 34 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक हो चुका है और यह युद्ध-पूर्व स्तर के करीब पहुँच रहा है। इराक ने क्षेत्रीय मानकों की तुलना में आकर्षक छूट देकर निर्यात बढ़ाने की रणनीति अपनाई है।
भारत की अर्थव्यवस्था पर असर
भारत अपनी ज़रूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में यह उछाल घरेलू मोर्चे पर भी चिंता पैदा करता है। यदि ब्रेंट क्रूड की कीमतें लंबे समय तक ऊँचे स्तर पर बनी रहीं, तो ईंधन लागत, परिवहन खर्च और उपभोक्ता महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) महंगाई को काबू में रखने की कोशिश कर रहा है। ऊर्जा आयात बिल के बढ़ने से चालू खाता घाटा (CAD) और रुपये पर भी दबाव आ सकता है।
आगे क्या होगा
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में बाज़ार की नज़र पश्चिम एशिया की स्थिति, होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रमों और ओपेक की प्रतिक्रिया पर बनी रहेगी। यदि तनाव और बढ़ा तो कच्चे तेल में अतिरिक्त तेज़ी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।