ब्रेंट क्रूड 78.39 डॉलर पर फिसला, अमेरिका-ईरान अंतरिम समझौते से तेल बाज़ार में बिकवाली
सारांश
मुख्य बातें
अंतरराष्ट्रीय तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड बुधवार, 17 जून को 0.72 प्रतिशत गिरकर 78.39 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया — यानी यह 80 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी करीब 1 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75.35 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया। इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित अंतरिम समझौते की खबरें हैं, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने की उम्मीद बढ़ी है।
समझौते की पृष्ठभूमि और मुख्य शर्तें
इस सप्ताह हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन के तहत अप्रैल में घोषित युद्धविराम को 60 दिनों के लिए और बढ़ा दिया गया है, ताकि दोनों पक्ष स्थायी शांति समझौते पर बातचीत जारी रख सकें। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि तेहरान परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद ईरान को तेल निर्यात की अनुमति दी जाएगी।
समझौते की शर्तों के अनुसार, अमेरिका ईरान के बंदरगाहों पर लगाए गए अपने प्रतिबंध हटाएगा, जबकि तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों और अन्य समुद्री यातायात को गुजरने की अनुमति देगा। गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल द्वारा हमले शुरू किए जाने के बाद से ईरान ने इस रणनीतिक जलमार्ग को प्रभावी रूप से बाधित कर रखा था।
तेल बाज़ार पर असर
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अत्यंत संवेदनशील मार्ग है — दुनिया का लगभग पाँचवाँ हिस्सा समुद्री तेल व्यापार इसी से होकर गुजरता है। ईरान द्वारा इस मार्ग की नाकेबंदी हटने की संभावना से बाज़ार में आपूर्ति बढ़ने का अनुमान है, जिसने कीमतों पर दबाव बनाया। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक माँग को लेकर पहले से ही अनिश्चितता बनी हुई थी।
भारतीय रुपए को मिला सपोर्ट
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सीधा लाभ भारतीय रुपए को मिला। बुधवार को घरेलू मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 31 पैसे की बढ़त के साथ 94.29 पर कारोबार कर रही थी, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 94.56 पर बंद हुई थी। विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की निकासी में कमी आना एक और सकारात्मक संकेत है।
विशेषज्ञों ने कहा, 'ब्रेंट क्रूड में तेज गिरावट के बाद इसका भाव 79 डॉलर के आसपास आ गया है। साथ ही FCNR(B) डिपॉजिट योजना के ज़रिए भारत में बड़े पैमाने पर पूंजी प्रवाह की उम्मीद है। इससे रुपए में और मजबूती आ सकती है, जो FII को बिकवाली से और हतोत्साहित करेगी।'
विशेषज्ञों की राय और आगे की संभावनाएँ
विशेषज्ञों का मानना है कि रुपए में मजबूती की संभावना को देखते हुए FII फिर से खरीदारी शुरू कर सकते हैं। इससे भारतीय शेयर बाज़ार को मजबूती मिलने और बाज़ार में स्थिरता बने रहने की संभावना है। हालाँकि, विश्लेषकों ने यह भी सावधान किया कि अमेरिका-ईरान वार्ता अभी अंतिम रूप नहीं ले चुकी है और किसी भी भू-राजनीतिक उलटफेर से तेल की कीमतें फिर उछल सकती हैं।
आने वाले हफ्तों में OPEC+ की उत्पादन नीति और अमेरिका-ईरान वार्ता की प्रगति तेल बाज़ार की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।