8 जुलाई 2026
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अमेरिका-ईरान तनाव: ब्रेंट क्रूड 6.52% उछलकर 80 डॉलर के करीब, भारतीय बाज़ार में 1,677 अंक की गिरावट

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अमेरिका-ईरान तनाव: ब्रेंट क्रूड 6.52% उछलकर 80 डॉलर के करीब, भारतीय बाज़ार में 1,677 अंक की गिरावट

सारांश

ट्रंप ने ईरान पर नए हमलों की घोषणा कर सीजफायर खत्म किया — और होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर संकट की आशंका से ब्रेंट क्रूड 6.52% उछलकर 80 डॉलर के करीब पहुँच गया। भारतीय बाज़ार में सेंसेक्स 1,677 अंक टूटा, निवेशकों में हड़कंप।

मुख्य बातें

ब्रेंट क्रूड 8 जुलाई को 6.52% उछलकर 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँचा।
WTI क्रूड भी 4.85% बढ़कर 75 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान पर रात्रि हमलों की पुष्टि की और सीजफायर समाप्त घोषित किया।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले वाणिज्यिक जहाज़ों पर ईरानी हमलों के जवाब में अमेरिकी कार्रवाई की गई।
सेंसेक्स 1,677.12 अंक (2.15%) गिरकर 76,503.60 पर; निफ्टी 516.65 अंक (2.12%) टूटकर 23,882.05 पर।
निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 2.24% की गिरावट, बाज़ार में व्यापक बिकवाली।

नई दिल्ली, 8 जुलाई: अमेरिका और ईरान के बीच तेज़ होते भू-राजनीतिक संघर्ष के बीच वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को 6 प्रतिशत से अधिक की तीव्र उछाल दर्ज की गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि ईरान पर नए हमलों के बाद दोनों देशों के बीच सीजफायर समाप्त हो गया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर गहरी चिंता पैदा हो गई है। इस खबर ने भारतीय शेयर बाज़ार को भी बड़े झटके दिए।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का दाम 6.52 प्रतिशत यानी 4.69 डॉलर प्रति बैरल की बढ़त के साथ 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँच गया। वहीं, WTI क्रूड भी 4.85 प्रतिशत की तेज़ी के साथ 75 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया। यह एकल-दिवसीय उछाल हाल के महीनों में कच्चे तेल की सबसे तेज़ बढ़त में से एक है।

ट्रंप का कड़ा रुख: 'यह सब खत्म हो गया है'

नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान अंकारा में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने रात में ईरान के खिलाफ नए सैन्य अभियान चलाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये कार्रवाइयाँ होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले वाणिज्यिक जहाज़ों पर ईरान के हमलों के जवाब में की गईं।

ट्रंप ने कहा, 'मेरे हिसाब से, यह सब खत्म हो चुका है। मैं अब उनसे कोई बातचीत नहीं करना चाहता। वे घटिया लोग हैं... वे बीमार मानसिकता वाले लोग हैं। उन्हें बीमार मानसिकता वाले लोग ही चलाते हैं। वे क्रूर और हिंसक लोग हैं और अगर उनके पास परमाणु हथियार होता, तो वे उसका इस्तेमाल कर लेते। जहाँ तक मेरी बात है, यह सब खत्म हो गया है।'

उन्होंने आगे कहा, 'हम कोई समझौता करते हैं... सब सहमत हो जाते हैं। कोई परमाणु हथियार नहीं होगा। हम समझौता करते हैं। वे बाहर जाकर प्रेस से बात करते हैं। वे कहते हैं कि हमने तो इस बारे में कभी बात ही नहीं की। उनमें कुछ गड़बड़ है। वे सनकी हैं। मेरे हिसाब से, यह सब खत्म हो चुका है।'

होर्मुज़ जलडमरूमध्य: वैश्विक तेल आपूर्ति की कुंजी

होर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक समुद्री तेल परिवहन का सबसे संवेदनशील मार्ग है। इस संकरे जलमार्ग से दुनिया का लगभग पाँचवाँ हिस्सा कच्चा तेल गुज़रता है। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में पहले से ही भू-राजनीतिक दबाव चरम पर था। जहाज़ों पर सिलसिलेवार हमलों की खबरों ने आपूर्ति बाधा की आशंका को और गहरा कर दिया है।

भारतीय शेयर बाज़ार पर असर

कच्चे तेल की कीमतों में इस तीव्र उछाल ने भारतीय शेयर बाज़ार में व्यापक बिकवाली को हवा दी। बीएसई सेंसेक्स 1,677.12 अंक यानी 2.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,503.60 पर था, जबकि निफ्टी 50 516.65 अंक यानी 2.12 प्रतिशत टूटकर 23,882.05 पर आ गया।

गिरावट व्यापक रही — निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 962.55 अंक यानी 1.55 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ 61,322.75 पर था, और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 430.10 अंक यानी 2.24 प्रतिशत की गिरावट के साथ 18,783.30 पर रहा।

आगे क्या होगा

ट्रंप के कड़े बयान और ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई के बाद राजनयिक वार्ता की संभावनाएँ फिलहाल धूमिल नज़र आ रही हैं। बाज़ार विश्लेषकों का मानना है कि यदि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव बना रहा, तो कच्चे तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत के आयात बिल और मुद्रास्फीति पर पड़ेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह संकट भारत के लिए दोहरी मार है: महँगा आयात और कमज़ोर बाज़ार। गौरतलब है कि भारत अपनी तेल ज़रूरतों का 85% से अधिक आयात करता है, और कच्चे तेल में हर 10 डॉलर की बढ़त चालू खाते के घाटे पर भारी दबाव डालती है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि इस संकट का असर केवल पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों तक सीमित नहीं — यह मुद्रास्फीति, रुपये की कमज़ोरी और RBI की दर-नीति पर भी असर डालेगा।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कच्चे तेल की कीमत अचानक क्यों बढ़ी?
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा ईरान पर नए सैन्य हमलों की पुष्टि और सीजफायर समाप्त घोषित करने के बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधा की आशंका बढ़ गई। इसी कारण ब्रेंट क्रूड 8 जुलाई को 6.52% उछलकर 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँच गया।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य का तेल कीमतों से क्या संबंध है?
होर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक समुद्री तेल परिवहन का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है, जिससे दुनिया का लगभग पाँचवाँ हिस्सा कच्चा तेल गुज़रता है। इस मार्ग पर किसी भी खतरे की आशंका मात्र से वैश्विक तेल कीमतें तेज़ी से प्रतिक्रिया देती हैं।
भारतीय शेयर बाज़ार पर इसका क्या असर पड़ा?
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण 8 जुलाई को सेंसेक्स 1,677.12 अंक (2.15%) गिरकर 76,503.60 पर और निफ्टी 516.65 अंक (2.12%) टूटकर 23,882.05 पर आ गया। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी क्रमशः 1.55% और 2.24% की गिरावट दर्ज हुई।
ट्रंप ने ईरान के बारे में क्या कहा?
नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान अंकारा में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ रात में नए हमले किए और सीजफायर समाप्त हो गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अब ईरान के साथ किसी भी बातचीत के इच्छुक नहीं हैं।
आगे कच्चे तेल की कीमतें कहाँ जा सकती हैं?
बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार, यदि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव बना रहा और राजनयिक वार्ता बहाल नहीं हुई, तो कच्चे तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। इसका सीधा असर भारत के आयात बिल, मुद्रास्फीति और रुपये की विनिमय दर पर पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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