ब्रेंट क्रूड 4.90% टूटकर $83 पर, अमेरिका-ईरान समझौते और होर्मुज के खुलने से तेल बाज़ार में बड़ी राहत
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते की पुष्टि और होर्मुज जलडमरूमध्य को पुनः खोलने की घोषणा के बाद सोमवार, 15 जून को वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में करीब 5 प्रतिशत की तीखी गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाज़ारों में यह एकल-दिवसीय सबसे बड़ी गिरावटों में से एक रही, जिसने महंगाई और आपूर्ति-व्यवधान की आशंकाओं को एक झटके में काफी हद तक शांत कर दिया।
कितना टूटा कच्चा तेल
अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड शुरुआती कारोबार में 4.90 प्रतिशत की गिरावट के साथ $83.05 प्रति बैरल पर आ गया। वहीं अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड इससे भी तेज़ — 5.74 प्रतिशत — टूटकर करीब $80 प्रति बैरल पर पहुँच गया। बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट सीधे तौर पर भू-राजनीतिक तनाव में आई कमी का प्रतिबिंब है।
ट्रंप की घोषणा और होर्मुज का खुलना
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो चुका है।" इसके साथ ही उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क के तत्काल खोलने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की अनुमति देने की भी घोषणा की। ट्रंप ने लिखा, "दुनिया के जहाज अपने इंजन चालू करें। तेल को बहने दें!"
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक कच्चे तेल आपूर्ति का लगभग पाँचवाँ हिस्सा वहन करता है। इस मार्ग के बंद होने की आशंका ने पिछले कई हफ्तों से तेल की कीमतों को ऊँचा बनाए रखा था।
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।
वैश्विक और घरेलू बाज़ारों पर असर
इस सकारात्मक घटनाक्रम की लहर वैश्विक शेयर बाज़ारों तक भी पहुँची। जापान के निक्केई, हांगकांग के हैंग सेंग, दक्षिण कोरिया के कोस्पी और इंडोनेशिया के जकार्ता कंपोजिट सहित प्रमुख एशियाई सूचकांक तेज़ी के साथ खुले — इनमें से कुछ बाज़ारों में 5 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई।
घरेलू मोर्चे पर भी राहत दिखी। BSE सेंसेक्स और NSE निफ्टी दोनों शुरुआती कारोबार में 1 प्रतिशत से अधिक की मज़बूती के साथ खुले। अमेरिकी फ्यूचर्स भी सकारात्मक रुख के साथ कारोबार करते नज़र आए।
महंगाई पर संभावित राहत
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड का $83 के स्तर पर आना उन देशों के लिए बड़ी राहत है जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं — भारत उनमें सबसे आगे है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक केंद्रीय बैंक महंगाई को काबू में लाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समझौता स्थायी रूप से लागू होता है, तो ईंधन लागत में कमी से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर सकारात्मक दबाव पड़ सकता है।
आगे की नज़र स्विट्जरलैंड में होने वाले MoU पर टिकी है — यदि वह निर्धारित समय पर हस्ताक्षरित होता है, तो तेल बाज़ार में यह नरमी और गहरी हो सकती है।