अमेरिका-ईरान युद्धविराम से ब्रेंट क्रूड 4.8% टूटा, WTI 85 डॉलर प्रति बैरल पर आया
सारांश
मुख्य बातें
वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में 27 जुलाई, सोमवार को भारी बिकवाली का दबाव देखा गया, जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य अभियानों पर विराम के संकेत मिले। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 4.8 प्रतिशत से अधिक यानी करीब 4.64 डॉलर गिरकर 87.55 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया। अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 5.09 प्रतिशत यानी 4.56 डॉलर की गिरावट के साथ 85 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
युद्धविराम संकेत से बाज़ार में राहत
तेल की कीमतों में यह तीव्र गिरावट तब आई जब ईरान ने संकेत दिया कि यदि अमेरिका भी सैन्य अभियान रोकता है, तो वह आगे कोई हमला नहीं करेगा। इस कूटनीतिक संकेत ने बाज़ार में राहत की लहर दौड़ा दी और निवेशकों ने बड़े पैमाने पर बिकवाली शुरू कर दी। इससे पश्चिम एशियाई संघर्ष के कूटनीतिक समाधान की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
पिछले तीन सप्ताह की तेज़ी के बाद पलटाव
यह गिरावट पिछले तीन सप्ताह में तेल की कीमतों में आई तेज़ उछाल के बाद देखने को मिली है। इस दौरान ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गया था। बाज़ार को आशंका थी कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से हॉर्मुज स्ट्रेट और बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट के रास्ते कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हो सकती है — ये दोनों दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा शिपिंग मार्गों में शामिल हैं।
गौरतलब है कि सोमवार की तेज़ गिरावट के बावजूद इस महीने कच्चे तेल की कीमतें अब भी लगभग 40 प्रतिशत ऊँची हैं, क्योंकि आपूर्ति संबंधी बाधाएँ हॉर्मुज स्ट्रेट से बढ़कर लाल सागर तक फैल गई हैं।
भू-राजनीतिक जोखिम अभी भी ऊँचे
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान समर्थित हूती बलों द्वारा सऊदी अरब के लाल सागर स्थित सऊदी अरामको की जिजान और यानबू बंदरगाहों पर हमले का दावा यह दर्शाता है कि भू-राजनीतिक जोखिम अभी भी ऊँचे बने हुए हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हॉर्मुज स्ट्रेट से जहाज़ों की आवाजाही अभी सामान्य स्थिति में नहीं लौटी है, इसलिए आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।
भारतीय रुपये पर असर
तेल की कीमतों में गिरावट का सकारात्मक असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा। सोमवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 41 पैसे की मज़बूती के साथ 96.15 पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 96.56 पर बंद हुआ था।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पश्चिम एशिया के हर कूटनीतिक घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक हॉर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर के शिपिंग मार्गों पर पूर्ण सामान्यता नहीं लौटती, तब तक कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान वार्ता की दिशा और हूती गतिविधियाँ तेल बाज़ार की चाल तय करेंगी।