कच्चे तेल में 3% की गिरावट: अमेरिका-ईरान स्विट्जरलैंड वार्ता से आपूर्ति संकट की आशंका घटी
सारांश
मुख्य बातें
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें 22 जून 2026 को सोमवार को 3 प्रतिशत तक लुढ़क गईं, जब अमेरिका और ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच स्विट्जरलैंड में वार्ता का पहला दौर संपन्न हुआ। आपूर्ति बाधा की आशंकाओं में कमी और ईरानी तेल निर्यात बढ़ने की संभावना ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ार को राहत दी।
बाज़ार में क्या हुआ
अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 2 प्रतिशत से अधिक गिरकर लगभग 79 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। कारोबार की शुरुआत में यह 82 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर था। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट के साथ करीब 75 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
गौरतलब है कि इससे पहले पिछले सप्ताह भी तेल की कीमतों में 8 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हुई थी। बाज़ार को उम्मीद थी कि खाड़ी क्षेत्र में फंसी तेल खेपों की आपूर्ति फिर से शुरू हो सकती है।
वार्ता का विवरण और ईरान की स्थिति
स्विट्जरलैंड में हुई इस बातचीत का उद्देश्य नाज़ुक युद्धविराम को आगे बढ़ाना और पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय तनाव को कम करना था। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान को तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के निर्यात के लिए छूट मिली है। इसके अलावा, कुछ फंसी हुई संपत्तियों को जारी करने और देश के पुनर्निर्माण एवं विकास कार्यक्रम शुरू करने पर भी सहमति बनी है।
हालांकि, बाद में खबरें आईं कि नए भू-राजनीतिक तनाव के बाद ईरान ने स्विट्जरलैंड में जारी वार्ता से कथित तौर पर खुद को अलग कर लिया, जिससे एशिया-प्रशांत के शेयर बाज़ार मिले-जुले संकेतों के साथ खुले।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी अनिश्चितताओं के बावजूद ब्रेंट क्रूड का 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बने रहना इस बात का संकेत है कि बाज़ार किसी बड़े सशस्त्र संघर्ष की संभावना को फिलहाल कीमतों में शामिल नहीं कर रहा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि क्षेत्र की भू-राजनीतिक स्थिति अभी भी बदल सकती है और उस पर निरंतर निगरानी की ज़रूरत है।
विशेषज्ञों के अनुसार, 'वैश्विक निवेशकों का रुख अभी भी सतर्क बना हुआ है।' यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील की किसी भी औपचारिक घोषणा की अनुपस्थिति में बाज़ार केवल राजनयिक संकेतों पर ही प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
भारत और तेल आयातक देशों पर असर
कच्चे तेल की कीमतों में आई इस गिरावट का सकारात्मक असर भारतीय शेयर बाज़ार पर भी देखने को मिला — सोमवार को शुरुआती कारोबार में प्रमुख बेंचमार्क बढ़त के साथ कारोबार करते नज़र आए।
बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह गिरावट राहत लेकर आ सकती है, जिससे आयात लागत कम होगी, महंगाई पर दबाव घटेगा और चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है। आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका-ईरान वार्ता का अगला दौर किस रूप में आकार लेता है।