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कच्चे तेल में 3% की गिरावट: अमेरिका-ईरान स्विट्जरलैंड वार्ता से आपूर्ति संकट की आशंका घटी

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कच्चे तेल में 3% की गिरावट: अमेरिका-ईरान स्विट्जरलैंड वार्ता से आपूर्ति संकट की आशंका घटी

सारांश

स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान वार्ता के पहले दौर के बाद कच्चे तेल की कीमतें 3% तक गिरीं — ब्रेंट 79 डॉलर और WTI 75 डॉलर पर आया। आपूर्ति बाधा की आशंका घटी, लेकिन ईरान के वार्ता से अलग होने की खबरों ने बाज़ार को सतर्क रखा।

मुख्य बातें

ब्रेंट क्रूड 2 प्रतिशत से अधिक गिरकर लगभग 79 डॉलर प्रति बैरल पर आया; कारोबार की शुरुआत में यह 82 डॉलर से ऊपर था।
WTI क्रूड लगभग 3 प्रतिशत गिरकर करीब 75 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
पिछले सप्ताह भी तेल कीमतों में 8 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हुई थी।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान को तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात के लिए छूट मिली है।
बाद में खबरें आईं कि ईरान ने स्विट्जरलैंड वार्ता से कथित तौर पर खुद को अलग कर लिया।
तेल कीमतों में गिरावट से भारत जैसे बड़े आयातक देशों को आयात लागत, महंगाई और चालू खाते के घाटे में राहत मिलने की उम्मीद।

अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें 22 जून 2026 को सोमवार को 3 प्रतिशत तक लुढ़क गईं, जब अमेरिका और ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच स्विट्जरलैंड में वार्ता का पहला दौर संपन्न हुआ। आपूर्ति बाधा की आशंकाओं में कमी और ईरानी तेल निर्यात बढ़ने की संभावना ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ार को राहत दी।

बाज़ार में क्या हुआ

अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 2 प्रतिशत से अधिक गिरकर लगभग 79 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। कारोबार की शुरुआत में यह 82 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर था। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट के साथ करीब 75 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।

गौरतलब है कि इससे पहले पिछले सप्ताह भी तेल की कीमतों में 8 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हुई थी। बाज़ार को उम्मीद थी कि खाड़ी क्षेत्र में फंसी तेल खेपों की आपूर्ति फिर से शुरू हो सकती है।

वार्ता का विवरण और ईरान की स्थिति

स्विट्जरलैंड में हुई इस बातचीत का उद्देश्य नाज़ुक युद्धविराम को आगे बढ़ाना और पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय तनाव को कम करना था। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान को तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के निर्यात के लिए छूट मिली है। इसके अलावा, कुछ फंसी हुई संपत्तियों को जारी करने और देश के पुनर्निर्माण एवं विकास कार्यक्रम शुरू करने पर भी सहमति बनी है।

हालांकि, बाद में खबरें आईं कि नए भू-राजनीतिक तनाव के बाद ईरान ने स्विट्जरलैंड में जारी वार्ता से कथित तौर पर खुद को अलग कर लिया, जिससे एशिया-प्रशांत के शेयर बाज़ार मिले-जुले संकेतों के साथ खुले।

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी अनिश्चितताओं के बावजूद ब्रेंट क्रूड का 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बने रहना इस बात का संकेत है कि बाज़ार किसी बड़े सशस्त्र संघर्ष की संभावना को फिलहाल कीमतों में शामिल नहीं कर रहा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि क्षेत्र की भू-राजनीतिक स्थिति अभी भी बदल सकती है और उस पर निरंतर निगरानी की ज़रूरत है।

विशेषज्ञों के अनुसार, 'वैश्विक निवेशकों का रुख अभी भी सतर्क बना हुआ है।' यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील की किसी भी औपचारिक घोषणा की अनुपस्थिति में बाज़ार केवल राजनयिक संकेतों पर ही प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

भारत और तेल आयातक देशों पर असर

कच्चे तेल की कीमतों में आई इस गिरावट का सकारात्मक असर भारतीय शेयर बाज़ार पर भी देखने को मिला — सोमवार को शुरुआती कारोबार में प्रमुख बेंचमार्क बढ़त के साथ कारोबार करते नज़र आए।

बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह गिरावट राहत लेकर आ सकती है, जिससे आयात लागत कम होगी, महंगाई पर दबाव घटेगा और चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है। आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका-ईरान वार्ता का अगला दौर किस रूप में आकार लेता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि किसी ठोस समझौते की पुष्टि। ईरान के वार्ता से अलग होने की खबरें यह याद दिलाती हैं कि पश्चिम एशिया की भू-राजनीति कितनी तेज़ी से पलट सकती है। पिछले सप्ताह 8% और इस सप्ताह 3% — दो हफ्तों में 11% से अधिक की गिरावट बाज़ार की उस अनिश्चितता को दर्शाती है जो अभी भी किसी स्थायी समाधान की प्रतीक्षा में है। भारत के लिए यह अल्पकालिक राहत है, लेकिन ऊर्जा सुरक्षा की दीर्घकालिक चुनौती बरकरार है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कच्चे तेल की कीमतों में 3% की गिरावट क्यों आई?
22 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में हुई वार्ता के बाद आपूर्ति बाधा की आशंकाएं कम हुईं और ईरानी तेल निर्यात बढ़ने की उम्मीद जगी, जिससे कच्चे तेल की कीमतें 3 प्रतिशत तक गिर गईं। ब्रेंट क्रूड 79 डॉलर और WTI 75 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
ब्रेंट क्रूड और WTI क्रूड की कीमत अभी कितनी है?
22 जून 2026 को ब्रेंट क्रूड 2 प्रतिशत से अधिक गिरकर लगभग 79 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि WTI क्रूड करीब 3 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा।
अमेरिका-ईरान स्विट्जरलैंड वार्ता में क्या तय हुआ?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के अनुसार तेहरान को तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के निर्यात के लिए छूट मिली है और कुछ फंसी हुई संपत्तियों को जारी करने पर सहमति बनी है। हालांकि, बाद में खबरें आईं कि नए भू-राजनीतिक तनाव के कारण ईरान ने वार्ता से कथित तौर पर खुद को अलग कर लिया।
भारत पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का क्या असर होगा?
भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए कीमतों में गिरावट से आयात लागत कम होगी, महंगाई पर दबाव घटेगा और चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। सोमवार को भारतीय शेयर बाज़ार के प्रमुख बेंचमार्क भी शुरुआती कारोबार में बढ़त के साथ नज़र आए।
क्या तेल की कीमतों में यह गिरावट टिकाऊ है?
विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति अभी भी अनिश्चित है और वैश्विक निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड का 80 डॉलर से नीचे रहना बाज़ार के सीमित आशावाद को दर्शाता है, लेकिन किसी नए तनाव की स्थिति में कीमतें फिर उछल सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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