23 सितंबर 2026
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चुनाव आयोग का बड़ा स्पष्टीकरण: संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत काम, सभी फैसले सर्वसम्मत

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चुनाव आयोग का बड़ा स्पष्टीकरण: संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत काम, सभी फैसले सर्वसम्मत

सारांश

भारत निर्वाचन आयोग ने 23 सितंबर को प्रेस नोट जारी कर उन आरोपों का खंडन किया जिनमें आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए थे। आयोग का कहना है — सभी 40 से अधिक हालिया पहल सर्वसम्मत हैं, अनुच्छेद 324 का पालन हो रहा है और 10 महीने की आंतरिक टिप्पणियों से एकतरफा तस्वीर पेश की जा रही है।

मुख्य बातें

भारत निर्वाचन आयोग ने 23 सितंबर 2026 को प्रेस नोट संख्या ईसीआई/पीएन/119/2026 जारी किया।
आयोग ने स्पष्ट किया कि वह संविधान के अनुच्छेद 324 और मुख्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 के तहत काम करता है।
हाल के महीनों में 40 नई पहल शुरू की गई हैं; सभी निर्णय पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए।
बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल के चुनाव इस अवधि में सफलतापूर्वक संपन्न कराए गए।
डेटा सुरक्षा पर आयोग ने कहा कि ईसीआईनेट सख्त प्रोटोकॉल के तहत काम करता है; ईआरओ और डीईओ कानून के तहत ही अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हैं।

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 23 सितंबर 2026 को एक विस्तृत प्रेस नोट जारी कर स्पष्ट किया कि वह संविधान के अनुच्छेद 324 और वैधानिक नियमों के सख्त दायरे में काम कर रहा है तथा आयोग के सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए जा रहे हैं। प्रेस नोट संख्या ईसीआई/पीएन/119/2026 के माध्यम से आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली पर उठाए जा रहे सवालों का सीधा जवाब दिया।

संवैधानिक दायित्व और कार्यप्रणाली

आयोग ने अपने प्रेस नोट में कहा, 'भारत निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है जो संविधान के अनुच्छेद 324, वैधानिक नियमों और स्थापित संस्थागत परंपराओं के सख्त जनादेश के तहत कार्य करता है। आयोग एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक निकाय के रूप में संचालित होता है।' आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि लिखित नोट्स, टिप्पणियाँ, तकनीकी सुझाव और आंतरिक संतुलन एवं नियंत्रण पारदर्शिता, कानूनी अनुपालन और परिचालन कठोरता सुनिश्चित करने की मानक प्रक्रियाएँ हैं।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम 2023 का पालन

ईसीआई ने स्पष्ट किया कि उसके द्वारा जारी सभी आधिकारिक आदेशों, निर्णयों और प्रशासनिक निर्देशों को पूर्ण कानूनी स्वीकृति प्राप्त है। ये सभी मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) अधिनियम, 2023 के तहत स्थापित प्रक्रियाओं के अनुसार हैं। आयोग ने जोर देकर कहा कि न केवल तीनों आयुक्त, बल्कि आयोग का प्रत्येक अधिकारी मतदाता प्रणाली में सुधार के लिए सुझाव देने के लिए अधिकृत है।

आंतरिक टिप्पणियों पर एकतरफा चित्रण का खंडन

आयोग ने कहा कि 10 महीने की अवधि की कुछ आंतरिक टिप्पणियों को उजागर कर एकतरफा तस्वीर पेश की जा रही है। आयोग के अनुसार, 'किसी भी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग विचार और टिप्पणियाँ सामान्य बात है — वे अंतिम निर्णय से पहले की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं।' यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विभिन्न माध्यमों में सवाल उठाए जा रहे थे।

चुनावी सुधार और हालिया उपलब्धियाँ

आयोग ने बताया कि हाल के महीनों में उसने लगभग 40 नई पहल शुरू की हैं और एसआईआर (SIR) सहित मतदाता सूची संशोधन जैसे कई चुनावी सुधार किए हैं। इस अवधि में बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में प्रमुख चुनावों का सफल संचालन किया गया है। आयोग ने कहा कि ये सभी निर्णय पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णय हैं।

डेटा सुरक्षा और मतदाता सूची पर सफाई

डेटा सुरक्षा और वोटर लिस्ट से नाम हटाने के आरोपों पर आयोग ने कहा कि ईसीआईनेट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म सख्त डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं ताकि अनधिकृत छेड़छाड़ रोकी जा सके। ईआरओ (निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी) और डीईओ (जिला निर्वाचन अधिकारी) कानून के तहत ही पंजीकरण और नाम हटाने की वैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हैं। आयोग ने अंत में यह दोहराया कि वह पूर्ण निष्ठा के साथ अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पालन करने और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत निर्वाचन आयोग ने 23 सितंबर को प्रेस नोट क्यों जारी किया?
आयोग ने प्रेस नोट ईसीआई/पीएन/119/2026 जारी कर उन आरोपों का जवाब दिया जिनमें आयोग की कार्यप्रणाली, आंतरिक असहमति और मतदाता सूची में बदलावों पर सवाल उठाए गए थे। आयोग ने कहा कि 10 महीने की कुछ आंतरिक टिप्पणियों को उजागर कर एकतरफा तस्वीर पेश की जा रही है।
चुनाव आयोग किस कानूनी ढाँचे के तहत काम करता है?
आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 और मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) अधिनियम, 2023 के तहत कार्य करता है। आयोग ने स्पष्ट किया कि उसके सभी आधिकारिक आदेशों और निर्णयों को पूर्ण कानूनी स्वीकृति प्राप्त है।
क्या चुनाव आयोग में सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए जाते हैं?
आयोग ने स्वयं इस बात की पुष्टि की है कि हाल की सभी लगभग 40 नई पहल और चुनावी सुधार पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णय हैं। आयोग ने यह भी कहा कि विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग टिप्पणियाँ मानक प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं, न कि असहमति का प्रमाण।
मतदाता सूची से नाम हटाने पर आयोग का क्या कहना है?
आयोग ने स्पष्ट किया कि ईआरओ (निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी) और डीईओ (जिला निर्वाचन अधिकारी) कानून के तहत ही नामांकन और नाम हटाने की वैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म ईसीआईनेट सख्त डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत काम करता है ताकि अनधिकृत छेड़छाड़ रोकी जा सके।
हाल के महीनों में चुनाव आयोग ने कौन-से प्रमुख चुनाव संपन्न कराए हैं?
आयोग के अनुसार, इस अवधि में बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में प्रमुख चुनावों का सफल संचालन किया गया है। इसके अलावा एसआईआर सहित मतदाता सूची संशोधन जैसे करीब 40 नई पहल और सुधार भी किए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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