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चुनाव आयोग हर कदम संविधान और पारदर्शिता से उठाता है: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार

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चुनाव आयोग हर कदम संविधान और पारदर्शिता से उठाता है: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार

सारांश

चुनाव आयोग ने 10 राज्यों के 200 अधिकारियों को एक मंच पर लाकर डिजिटल युग की गलत सूचनाओं से लड़ने की रणनीति बनाई। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने दोहराया कि आयोग का हर कदम संविधान और पारदर्शिता की कसौटी पर खरा है।

मुख्य बातें

चुनाव आयोग (ECI) ने 8 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में मीडिया और संचार अधिकारियों का एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया।
10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 200 अधिकारी सम्मेलन में शामिल हुए।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि आयोग का हर कार्य भारत के संविधान और चुनावी कानूनों पर आधारित और पूर्णतः पारदर्शी है।
विवेक जोशी ने डीपफेक , सिंथेटिक मीडिया और AI -जनित भ्रामक सामग्री के खतरों पर अधिकारियों को सचेत किया।
सम्मेलन में प्रेस नोट लेखन, सोशल मीडिया संचार और इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब के माध्यम से युवा मतदाताओं से जुड़ने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने 8 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में मीडिया और संचार अधिकारियों के लिए एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन में 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 200 अधिकारियों को एक मंच पर लाया गया, ताकि चुनावी संचार को सुदृढ़ किया जा सके और डिजिटल युग में फैलती गलत सूचनाओं से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

मुख्य चुनाव आयुक्त का संदेश

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग का प्रत्येक कार्य भारत के संविधान, चुनावी कानूनों और समय-समय पर जारी लिखित निर्देशों के आधार पर पूर्ण पारदर्शिता के साथ किया जाता है। उन्होंने प्रतिभागियों को सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं और नैरेटिव के प्रति सतर्क रहने की चेतावनी दी।

ज्ञानेश कुमार ने यह भी कहा कि हालिया विधानसभा चुनावों में दर्ज रिकॉर्ड मतदान इस बात का प्रमाण है कि भारतीय मतदाता देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं पर गहरा भरोसा रखते हैं। उन्होंने अधिकारियों से गलत जानकारी को रोकने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया।

डिजिटल खतरों पर चुनाव आयुक्त की चेतावनी

चुनाव आयुक्त डॉ. विवेक जोशी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीपफेक, सिंथेटिक मीडिया और अन्य भ्रामक डिजिटल सामग्री से उत्पन्न होते खतरों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनके अनुसार इस तरह की सामग्री का मुख्य उद्देश्य 'लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के भरोसे को कमज़ोर करना' है।

डॉ. जोशी ने भाग लेने वाले अधिकारियों से आग्रह किया कि वे आयोग के नियमों, निर्देशों और निर्धारित संचार दिशानिर्देशों का पालन करते हुए ऐसी भ्रामक सामग्री का प्रभावी मुकाबला करें। यह ऐसे समय में आया है जब देश में चुनाव-केंद्रित फर्ज़ी खबरों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।

सम्मेलन में किन विषयों पर हुई चर्चा

आयोग की ओर से जारी बयान के अनुसार, सम्मेलन में वोटर लिस्ट प्रबंधन से लेकर मतदान तक के पूरे चुनाव चक्र को कवर करने वाली संचार रणनीतियों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए। प्रतिभागियों को मुख्य संवैधानिक प्रावधानों और मीडिया से जुड़े कानूनी पहलुओं की जानकारी भी दी गई।

व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्रों में अधिकारियों को प्रभावी प्रेस नोट तैयार करने, पारंपरिक और सोशल मीडिया के ज़रिए आधिकारिक संचार को प्रभावी बनाने, तथा इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब के माध्यम से युवा मतदाताओं से जुड़ने के तरीके सिखाए गए। सम्मेलन में शामिल अधिकारियों ने प्रदर्शनी और मीडिया कॉर्नर का भ्रमण भी किया।

सम्मेलन में कौन-कौन शामिल हुए

इस कॉन्फ्रेंस में मीडिया नोडल अधिकारी, सोशल मीडिया नोडल अधिकारी, जिला मीडिया नोडल अधिकारी, जिला जनसंपर्क अधिकारी और राज्य जनसंपर्क विभागों के वरिष्ठ प्रतिनिधि सम्मिलित हुए। गौरतलब है कि यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब आगामी चुनावों की तैयारियाँ तेज़ हो रही हैं और संचार तंत्र को मज़बूत करना प्राथमिकता बन गई है।

आगे की राह

सम्मेलन में वोटर लिस्ट तैयार करने, मतदान प्रक्रियाओं और मतगणना का सजीव प्रदर्शन भी किया गया, ताकि अधिकारी इन प्रक्रियाओं को जनता के सामने सटीक और विश्वसनीय तरीके से प्रस्तुत कर सकें। आयोग का लक्ष्य है कि प्रशिक्षित अधिकारी अपने-अपने राज्यों में चुनावी जागरूकता और पारदर्शिता की इस मुहिम को आगे बढ़ाएँ।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा प्रशिक्षण कक्ष से बाहर है। डीपफेक और AI-जनित भ्रामक सामग्री की रफ़्तार उस गति से कहीं अधिक है जिससे सरकारी तंत्र प्रतिक्रिया दे पाता है। 200 अधिकारियों को प्रशिक्षित करना शुरुआत है, पर जब तक आयोग के पास रियल-टाइम फैक्ट-चेकिंग और प्लेटफॉर्म कंपनियों के साथ बाध्यकारी समझौते नहीं होंगे, तब तक 'पारदर्शिता' का दावा केवल कागज़ी रहेगा। रिकॉर्ड मतदान जनता के भरोसे का संकेत ज़रूर है, लेकिन यह भरोसा तभी टिकेगा जब गलत सूचनाओं का मुकाबला ज़मीन पर दिखे।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चुनाव आयोग ने 8 जुलाई का सम्मेलन क्यों बुलाया?
चुनावी संचार को मज़बूत करने और डिजिटल युग में फैलती गलत सूचनाओं से निपटने के लिए ECI ने यह एक दिवसीय सम्मेलन बुलाया। इसमें 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 200 मीडिया और संचार अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पारदर्शिता पर क्या कहा?
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग का हर कार्य भारत के संविधान, चुनावी कानूनों और लिखित निर्देशों के आधार पर पूर्ण पारदर्शिता के साथ किया जाता है। उन्होंने अधिकारियों से सोशल मीडिया पर भ्रामक नैरेटिव के प्रति सतर्क रहने और सक्रिय रूप से गलत जानकारी रोकने का आग्रह किया।
डॉ. विवेक जोशी ने डीपफेक और AI के खतरों पर क्या कहा?
चुनाव आयुक्त डॉ. विवेक जोशी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीपफेक और सिंथेटिक मीडिया का उद्देश्य लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के भरोसे को कमज़ोर करना है। उन्होंने अधिकारियों से आयोग के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए इन खतरों का प्रभावी मुकाबला करने को कहा।
सम्मेलन में अधिकारियों को क्या प्रशिक्षण दिया गया?
अधिकारियों को प्रभावी प्रेस नोट लेखन, पारंपरिक और सोशल मीडिया पर आधिकारिक संचार, गलत जानकारी से निपटने की रणनीति और इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब के ज़रिए युवा मतदाताओं से जुड़ने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। वोटर लिस्ट प्रबंधन, मतदान और मतगणना प्रक्रिया का सजीव प्रदर्शन भी किया गया।
इस सम्मेलन में किन अधिकारियों ने भाग लिया?
सम्मेलन में मीडिया नोडल अधिकारी, सोशल मीडिया नोडल अधिकारी, जिला मीडिया नोडल अधिकारी, जिला जनसंपर्क अधिकारी और राज्य जनसंपर्क विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। ये सभी 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए थे।
राष्ट्र प्रेस
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