8 जुलाई 2026
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पश्चिम एशिया तनाव: तेल कीमतों में 6% उछाल, भारत ने संयम बरतने की अपील की

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पश्चिम एशिया तनाव: तेल कीमतों में 6% उछाल, भारत ने संयम बरतने की अपील की

सारांश

पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान टकराव गहराने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल तक उछला। भारत ने संयम और कूटनीति की अपील की — यह संकट भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए सीधी चुनौती है।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 8 जुलाई को पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई और सभी पक्षों से संयम की अपील की।
ब्रेंट क्रूड 6.52% उछलकर लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल और WTI 6% से अधिक बढ़कर करीब 75 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने NATO सम्मेलन में घोषणा की कि वॉशिंगटन-तेहरान संघर्षविराम प्रभावी रूप से समाप्त हो गया है।
ट्रंप ने सेना को खार्ग द्वीप — ईरान के सबसे बड़े तेल निर्यात केंद्र — पर ठिकानों को निशाना बनाने के निर्देश दिए।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
भारत ने ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

विदेश मंत्रालय (MEA) ने 8 जुलाई 2026 को पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य टकराव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर हो रहे नए हमलों को लेकर गहरी चिंता जताई। इसी बीच वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में 6 प्रतिशत से अधिक की तीव्र वृद्धि दर्ज की गई, जिससे भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।

भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार देर रात जारी बयान में कहा, "भारत पश्चिम एशिया में हाल के हमलों और बढ़ते तनाव को लेकर बहुत चिंतित है। ये घटनाएं क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को नुकसान पहुंचा सकती हैं।" उन्होंने आगे कहा कि भारत सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील करता है। साथ ही यह भी जोड़ा कि ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार बिना किसी रुकावट के जारी रहना आवश्यक है।

बयान में कूटनीतिक रास्ते की ओर लौटने की भी अपील की गई — "हम सभी पक्षों से बातचीत और कूटनीति के रास्ते पर लौटने की अपील करते हैं, ताकि इस संघर्ष का शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान निकाला जा सके।"

संघर्षविराम टूटने की पृष्ठभूमि

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंकारा में आयोजित NATO सम्मेलन के दौरान — जहाँ उनकी NATO महासचिव मार्क रूटे और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की से भी मुलाकात हुई — घोषणा की कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच हुआ संघर्षविराम अब प्रभावी रूप से समाप्त हो गया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने अमेरिका की ओर से दिए गए अस्थायी संघर्षविराम का उल्लंघन किया और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर रॉकेट दागे।

ट्रंप ने अपने बयान में कहा, "उन्होंने हमसे कहा था कि अंतिम संस्कार के दौरान हमें निशाना न बनाएं। मैंने कहा था कि ऐसा नहीं करूंगा। हमने ऐसा नहीं किया। बल्कि हमने उनके लिए स्थिति सुरक्षित बनाई। इसके बाद ईरान ने फिर से हमले शुरू कर दिए। इसलिए हमने उन्हें बहुत कड़ा जवाब दिया — मैं कहूंगा कि यह 20 गुना ज्यादा ताकतवर हमला था।"

अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और ईरान को चेतावनी

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने उन ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा पैदा कर रहे थे। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर सकता है यदि तेहरान ने हमले जारी रखे।

ट्रंप ने अमेरिकी सेना को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा, "मैंने सेना से कहा है कि पाइपलाइन को निशाना मत बनाओ, लेकिन खार्ग द्वीप पर बाकी सभी ठिकानों को निशाना बनाओ।" गौरतलब है कि खार्ग द्वीप ईरान का सबसे बड़ा तेल निर्यात केंद्र है। जब उनसे पूछा गया कि क्या इसका मतलब बड़े स्तर पर युद्ध शुरू होना है, तो ट्रंप ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया, लेकिन आगे और हमलों की संभावना से इनकार नहीं किया।

तेल बाज़ार पर असर

इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर पड़ा। ब्रेंट क्रूड की कीमत 6.52 प्रतिशत यानी 4.69 डॉलर उछलकर लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 6 प्रतिशत से अधिक बढ़कर करीब 75 डॉलर प्रति बैरल हो गई।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी कुल तेल ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के ज़रिए पूरा करता है और मध्य-पूर्व इस आपूर्ति शृंखला की धुरी है। होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले तेल की आपूर्ति में कोई भी बाधा भारत के ऊर्जा बिल और मुद्रास्फीति दोनों को प्रभावित कर सकती है।

आगे क्या

फिलहाल स्थिति अत्यंत अनिश्चित बनी हुई है। ट्रंप के बयानों के बाद यह स्पष्ट नहीं है कि कूटनीतिक चैनल पूरी तरह बंद हो गए हैं या नहीं — उन्होंने संकेत दिया कि उनके अधिकारी बातचीत जारी रख सकते हैं। भारत की प्राथमिकता अपनी ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित रखना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। कूटनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि नई दिल्ली इस संकट पर कड़ी नज़र रखे हुए है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली परीक्षा आर्थिक मोर्चे पर होगी — होर्मुज जलडमरूमध्य से भारत की तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है और कीमतों में यह उछाल सीधे चालू खाते के घाटे और खुदरा महंगाई पर दबाव बनाएगा। भारत परंपरागत रूप से पश्चिम एशिया के संघर्षों में तटस्थता बनाए रखता है, लेकिन जब आपूर्ति शृंखला खतरे में हो तो मौन कूटनीति की सीमाएं उजागर होती हैं। ट्रंप के 'संघर्षविराम समाप्त' वाले बयान और खार्ग द्वीप पर हमले के निर्देश यह संकेत देते हैं कि स्थिति और बिगड़ सकती है — ऐसे में नई दिल्ली को केवल अपील से आगे बढ़कर ऊर्जा भंडार और वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों पर सक्रिय रणनीति बनानी होगी।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम एशिया तनाव पर भारत का क्या रुख है?
भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने और कूटनीति के रास्ते पर लौटने की अपील की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 8 जुलाई को जारी बयान में ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की भी आवश्यकता पर बल दिया।
पश्चिम एशिया संकट से तेल की कीमतें कितनी बढ़ीं?
ब्रेंट क्रूड 6.52 प्रतिशत यानी 4.69 डॉलर उछलकर लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गया, जबकि अमेरिकी WTI भी 6 प्रतिशत से अधिक बढ़कर करीब 75 डॉलर प्रति बैरल हो गया। यह वृद्धि अमेरिका-ईरान संघर्षविराम टूटने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नए हमलों की खबरों के बाद आई।
अमेरिका-ईरान के बीच संघर्षविराम क्यों टूटा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार, ईरान ने अमेरिका की ओर से दिए गए अस्थायी संघर्षविराम का उल्लंघन करते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर रॉकेट दागे। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले किए और ट्रंप ने संघर्षविराम को प्रभावी रूप से समाप्त घोषित कर दिया।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भारत के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है और भारत की तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है। इस जलडमरूमध्य पर किसी भी तरह की रुकावट भारत के ऊर्जा आयात बिल और घरेलू महंगाई दोनों को सीधे प्रभावित कर सकती है।
खार्ग द्वीप क्या है और इसे निशाना क्यों बनाया गया?
खार्ग द्वीप ईरान का सबसे बड़ा तेल निर्यात केंद्र है। ट्रंप ने अमेरिकी सेना को निर्देश दिया कि पाइपलाइन को छोड़कर खार्ग द्वीप के बाकी सभी ठिकानों को निशाना बनाया जाए, जो ईरान की तेल निर्यात क्षमता पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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