3 अगस्त 2026
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अमेरिका-ईरान तनाव: होर्मुज के पास हमले के बाद ब्रेंट क्रूड 93.26 डॉलर पर, 1% उछाल

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अमेरिका-ईरान तनाव: होर्मुज के पास हमले के बाद ब्रेंट क्रूड 93.26 डॉलर पर, 1% उछाल

सारांश

होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी सैन्य हमले के बाद ब्रेंट क्रूड 93.26 डॉलर पर पहुँचा — दुनिया के 20% तेल का रास्ता खतरे में। एशियाई बाज़ार धराशायी, कोस्पी 4% टूटा। ऊर्जा आपूर्ति की अनिश्चितता अब वैश्विक वित्तीय बाज़ारों की दिशा तय कर रही है।

मुख्य बातें

ब्रेंट क्रूड करीब 1 प्रतिशत उछलकर 93.26 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँचा; WTI भी 0.97% बढ़कर करीब 90 डॉलर पर।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान के एयर डिफेंस और रडार ठिकानों पर 'आत्मरक्षा' में हमले किए।
ईरान ने अपाचे हेलीकॉप्टर गिराने में भूमिका से इनकार किया; हमले को 'हादसा' बताया।
अमेरिका के कच्चे तेल भंडार में लगातार आठवीं बार गिरावट दर्ज, कीमतों को अतिरिक्त समर्थन।
दक्षिण कोरिया का कोस्पी लगभग 4% टूटा; निक्केई और हैंग सेंग भी 1% से अधिक गिरे।
घरेलू शेयर बाज़ार शुरुआती कारोबार में 0.5% तक मज़बूत रहे।

वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में 10 जून 2026 को तेज उछाल दर्ज किया गया, जब अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट ईरान के एयर डिफेंस, ग्राउंड कंट्रोल और निगरानी रडार ठिकानों पर हमले किए, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंका तीव्र हो गई। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ 93.26 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया।

मुख्य घटनाक्रम

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह सैन्य कार्रवाई क्षेत्र में अमेरिकी सेना के एक अपाचे हेलीकॉप्टर को कथित तौर पर मार गिराए जाने की घटना के जवाब में 'आत्मरक्षा' के तहत की गई। वहीं, ईरान ने इस घटना में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार करते हुए कहा कि हेलीकॉप्टर दुर्घटना महज एक हादसा थी।

इसके साथ ही, ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि इजरायल लेबनान में हिजबुल्लाह पर हमले जारी रखता है तो वह पुनः संघर्ष में उतर सकता है — जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता का दायरा और व्यापक होने की आशंका है।

तेल बाज़ार पर असर

अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 0.97 प्रतिशत की बढ़त के साथ करीब 90 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका के कच्चे तेल के भंडार में पिछले सप्ताह लगातार आठवीं बार कमी दर्ज की गई, जिसने कीमतों को अतिरिक्त समर्थन दिया। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल गुजरता है, इसलिए वहाँ कोई भी व्यवधान तुरंत वैश्विक कीमतों में प्रतिबिंबित होता है।

वैश्विक शेयर बाज़ारों पर दबाव

भू-राजनीतिक तनाव का असर एशियाई बाज़ारों पर भी साफ़ दिखा। जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक 1 प्रतिशत से अधिक टूट गए, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स लगभग 4 प्रतिशत तक गिर गया।

अमेरिकी बाज़ार भी मंगलवार को दबाव में रहे — नैस्डैक कंपोजिट 0.97 प्रतिशत और एसएंडपी 500 0.26 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। इसके विपरीत, घरेलू शेयर बाज़ारों में बुधवार के शुरुआती कारोबार में करीब 0.5 प्रतिशत तक की मज़बूती देखी गई।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर गहरी अनिश्चितता आने वाले दिनों में तेल बाज़ार और वैश्विक वित्तीय बाज़ारों की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब बाज़ारों को उम्मीद थी कि क्षेत्रीय तनाव धीरे-धीरे शांत होगा।

क्या होगा आगे

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव निवेशकों की चिंता का केंद्र बना हुआ है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और गहराता है तो वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में अस्थिरता का एक नया दौर शुरू हो सकता है, जिसका सीधा असर भारत जैसे तेल-आयात पर निर्भर देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिससे भारत की ऊर्जा आयात लागत सीधे प्रभावित होगी। भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का करीब 85% आयात करता है — ऐसे में हर डॉलर की बढ़त चालू खाते के घाटे और रुपये पर दबाव डालती है। मुख्यधारा की कवरेज तात्कालिक कीमत पर टिकी है, जबकि असली सवाल यह है कि क्या यह संघर्ष लंबा खिंचेगा।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान पर हमला क्यों किया?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह कार्रवाई क्षेत्र में अमेरिकी सेना के एक अपाचे हेलीकॉप्टर को कथित तौर पर मार गिराए जाने की घटना के जवाब में 'आत्मरक्षा' के तहत की गई। ईरान ने इस घटना में किसी भी भूमिका से इनकार किया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव से कच्चे तेल की कीमतें क्यों बढ़ती हैं?
होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया की कच्चे तेल की आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग पर किसी भी व्यवधान की आशंका मात्र से वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में तुरंत तेजी आ जाती है, क्योंकि वैकल्पिक मार्ग महँगे और समय-साध्य हैं।
इस तनाव का भारत पर क्या असर पड़ेगा?
भारत अपनी कच्चे तेल की अधिकांश ज़रूरत आयात से पूरी करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी सीधे ईंधन लागत, व्यापार घाटे और रुपये पर दबाव के रूप में दिखती है। घरेलू शेयर बाज़ार फिलहाल मज़बूत हैं, लेकिन तनाव लंबा खिंचने पर असर बढ़ सकता है।
एशियाई शेयर बाज़ारों पर इस संकट का क्या असर पड़ा?
दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स लगभग 4 प्रतिशत तक गिर गया, जबकि जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंग सेंग 1 प्रतिशत से अधिक टूटे। अमेरिकी नैस्डैक 0.97% और एसएंडपी 500 0.26% की गिरावट के साथ बंद हुए।
क्या अमेरिकी तेल भंडार में कमी भी कीमतों को प्रभावित कर रही है?
हाँ, रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका के कच्चे तेल के भंडार में पिछले सप्ताह लगातार आठवीं बार कमी दर्ज की गई, जिसने भू-राजनीतिक तनाव के साथ मिलकर कीमतों को अतिरिक्त समर्थन दिया।
राष्ट्र प्रेस
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