ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी: हमले जारी रहे तो नौसैनिक नाकाबंदी तक संभव
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 8 जुलाई 2026 को अंकारा में हुए नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान को कड़ी चेतावनी दी कि यदि तेहरान ने हमले जारी रखे, तो अमेरिका न केवल और बड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा, बल्कि ईरान पर नौसैनिक नाकाबंदी भी लगा सकता है। ट्रंप ने यह बातें नाटो महासचिव मार्क रूटे और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ अलग-अलग बैठकों के दौरान कहीं।
ट्रंप का सख्त रुख और चेतावनी
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी कूटनीतिक वार्ता पर उनका भरोसा लगभग खत्म हो चुका है। हालांकि, उन्होंने अपने दूतों को बातचीत जारी रखने की अनुमति देने की बात कही। ट्रंप ने कहा, 'शायद हम आज रात उन्हें फिर जोरदार जवाब देंगे, मैं उन्हें थोड़ी चेतावनी भी दूंगा।' जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या इसका मतलब पूर्ण युद्ध है, तो ट्रंप ने सीधा उत्तर देने से परहेज किया।
संघर्ष विराम उल्लंघन का आरोप
ट्रंप ने ईरान पर हाल में किए गए अमेरिकी सैन्य हमलों का बचाव करते हुए आरोप लगाया कि तेहरान ने अंतिम संस्कार के लिए माँगे गए अस्थायी संघर्ष विराम का उल्लंघन किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने कुछ समय के लिए सैन्य कार्रवाई रोकी थी, लेकिन इसके बाद ईरान ने फिर से आक्रामक कदम उठाने शुरू कर दिए। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच परमाणु मुद्दे पर बातचीत पहले से ही अनिश्चितता में थी।
खार्ग द्वीप पर हमले के निर्देश
ट्रंप ने खुलासा किया कि उन्होंने अमेरिकी सेना को हालिया अभियान में खार्ग द्वीप — जो ईरान का सबसे बड़ा तेल निर्यात केंद्र है — पर पाइपलाइनों को छोड़कर बाकी सभी ठिकानों को निशाना बनाने के निर्देश दिए थे। गौरतलब है कि खार्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात की रीढ़ माना जाता है और इस पर हमला वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी संवेदनशील संकेत है।
रक्षा मंत्री हेगसेथ का बयान
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बताया कि अमेरिकी सेना ने उन ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जिनका उपयोग होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों को धमकाने के लिए किया जा रहा था। हेगसेथ ने कहा, 'मंगलवार रात हमने कई छोटी नावों को निशाना बनाया, जिनका इस्तेमाल वे जहाजों को परेशान करने के लिए कर रहे थे।' उन्होंने यह भी बताया कि ड्रोन और मिसाइल भंडारण स्थल, तटीय रक्षा ठिकाने, रडार स्टेशन और निगरानी केंद्र भी इन हमलों का हिस्सा थे।
आगे क्या होगा
कूटनीतिक मोर्चे पर अमेरिकी दूत बातचीत जारी रखेंगे, लेकिन ट्रंप के ताजा बयानों से यह स्पष्ट है कि वाशिंगटन का धैर्य सीमा पर है। विश्लेषकों के अनुसार, नौसैनिक नाकाबंदी की संभावना होर्मुज स्ट्रेट के जरिए होने वाले वैश्विक तेल व्यापार को सीधे प्रभावित कर सकती है। आने वाले दिनों में ईरान की प्रतिक्रिया और अमेरिकी सैन्य गतिविधियाँ इस संकट की दिशा तय करेंगी।