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ट्रंप का दावा: ईरान ने परमाणु समझौते के ढाँचे को दी मंज़ूरी, अमेरिकी हमले रद्द

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ट्रंप का दावा: ईरान ने परमाणु समझौते के ढाँचे को दी मंज़ूरी, अमेरिकी हमले रद्द

सारांश

ट्रंप का यह यू-टर्न उल्लेखनीय है — कुछ घंटे पहले 'बहुत जोरदार हमले' की चेतावनी थी, और अब हमले रद्द। कथित तौर पर ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व की मंज़ूरी मिलने के बाद परमाणु समझौते का ढाँचा तैयार बताया जा रहा है, लेकिन शर्तों का कोई विवरण सार्वजनिक नहीं हुआ है।

मुख्य बातें

डोनाल्ड ट्रंप ने 12 जून को घोषणा की कि ईरान पर निर्धारित अमेरिकी हमले रद्द कर दिए गए हैं।
ट्रंप का दावा है कि ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व ने परमाणु समझौते के ढाँचे को मंज़ूरी दे दी है।
समझौते के तहत ईरान को स्थायी रूप से परमाणु हथियार हासिल करने से रोका जाएगा।
अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक औपचारिक हस्ताक्षर नहीं हो जाते।
अमेरिका, इज़राइल, सऊदी अरब, यूएई, कतर, तुर्की, पाकिस्तान सहित कई देशों ने कथित तौर पर बातचीत के बिंदुओं को मंज़ूरी दी है।
समझौते की विशेष शर्तें और हस्ताक्षर की तारीख अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 12 जून को घोषणा की कि उन्होंने ईरान पर निर्धारित अमेरिकी हमलों को रद्द कर दिया है, क्योंकि तेहरान के सर्वोच्च नेतृत्व ने कथित तौर पर एक परमाणु समझौते के ढाँचे को मंज़ूरी दे दी है। ट्रंप के अनुसार, इस समझौते के तहत ईरान को स्थायी रूप से परमाणु हथियार हासिल करने से रोका जाएगा। यह घोषणा उस समय आई जब अमेरिका और ईरान के बीच कई हफ्तों से तनाव चरम पर था।

ट्रंप का बयान और समझौते का दावा

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ बातचीत ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व स्तर तक पहुँच चुकी है और वहाँ से मंज़ूरी भी मिल गई है। इसलिए, मैं संयुक्त राज्य अमेरिका का राष्ट्रपति होने के नाते तय किए गए हमलों और बमबारी को रद्द कर रहा हूँ।'

यह घोषणा उनके उस पहले के कड़े बयान से सीधे विपरीत थी, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी थी कि अमेरिका रात में ईरान पर 'बहुत जोरदार हमला' करेगा। गौरतलब है कि यह बदलाव कूटनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

समझौते की शर्तें और प्रमुख देशों की भागीदारी

ट्रंप के अनुसार, बातचीत के अंतिम बिंदुओं को सिद्धांत और विस्तार दोनों स्तरों पर कई देशों ने मंज़ूरी दी है — जिनमें अमेरिका, इज़राइल, सऊदी अरब, यूएई, कतर, तुर्की, पाकिस्तान, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, मिस्र और अन्य देश शामिल हैं। हालाँकि, उन्होंने प्रस्तावित समझौते की विशेष शर्तों या बातचीत के मुद्दों के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दी।

जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान के सर्वोच्च नेता ने इस व्यवस्था को मंज़ूरी दे दी है, तो ट्रंप ने कहा, 'मेरी जानकारी के अनुसार, जवाब हाँ है।'

नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी

ट्रंप ने स्पष्ट किया कि हमले रद्द होने के बावजूद अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी तब तक पूरी तरह लागू रहेगी, जब तक समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर नहीं हो जाते। उन्होंने कहा कि दस्तावेज़ तैयार किए जा रहे हैं और अगले कुछ दिनों में इन्हें अंतिम रूप दिया जाएगा।

यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ईरान के तेल निर्यात और समुद्री गतिविधियों पर लगातार दबाव बनाए हुए है। ट्रंप ने संकेत दिया कि हाल के सैन्य दबाव की वजह से ही ईरान इस समझौते के लिए तैयार हुआ है।

ईरान की सैन्य क्षमताओं पर ट्रंप का दावा

ट्रंप ने दावा किया कि संघर्ष के दौरान ईरान की सैन्य क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुँचा है। उन्होंने कहा, 'उनकी नौसेना खत्म हो चुकी है, उनकी वायुसेना खत्म हो चुकी है, उनकी हवाई रक्षा प्रणाली खत्म हो चुकी है — सब कुछ खत्म हो गया है। अब वे समझदारी दिखाते हुए समझौता करने जा रहे हैं।' इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि संघर्ष के बाद तेहरान में एक नया नेतृत्व समूह उभरकर सामने आया है।

परमाणु हथियार रोकना मुख्य लक्ष्य

ट्रंप ने अपने पूरे बयान में बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना ही बातचीत का एकमात्र उद्देश्य था। उन्होंने कहा, 'ईरान किसी भी तरह, किसी भी रूप में परमाणु हथियार न रखेगा और न ही खरीदेगा। यह एक शानदार समझौता है क्योंकि उनके पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होगा।'

समझौते पर हस्ताक्षर की तारीख और स्थान की घोषणा जल्द किए जाने की उम्मीद है — और इसके साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि यह कूटनीतिक दावा ज़मीन पर कितना टिकाऊ साबित होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन समझौते की कोई भी सत्यापन-योग्य शर्त सार्वजनिक नहीं की गई है — जो एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। 2015 के JCPOA के विपरीत, इस बार न कोई लिखित दस्तावेज़ सामने आया है, न किसी अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण तंत्र का उल्लेख है। ट्रंप के ईरान की सैन्य क्षमताओं के 'पूरी तरह खत्म' होने के दावे भी स्वतंत्र रूप से असत्यापित हैं। ऐसे में यह देखना होगा कि यह 'ऐतिहासिक समझौता' कागज़ पर उतरता है या फिर एक और अधूरी घोषणा बनकर रह जाता है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने ईरान पर हमले क्यों रद्द किए?
ट्रंप के अनुसार, ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व ने अमेरिका के साथ परमाणु समझौते के ढाँचे को मंज़ूरी दे दी है, इसलिए उन्होंने निर्धारित हमले रद्द कर दिए। उन्होंने इसे कई हफ्तों के तनाव के बाद एक बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया।
ईरान-अमेरिका परमाणु समझौते में क्या शामिल है?
ट्रंप के दावे के अनुसार, इस समझौते के तहत ईरान को स्थायी रूप से परमाणु हथियार हासिल करने से रोका जाएगा। हालाँकि, समझौते की विस्तृत शर्तें अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई हैं और दस्तावेज़ तैयार किए जा रहे हैं।
क्या अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी हटाई जाएगी?
नहीं, ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि नौसैनिक नाकेबंदी तब तक पूरी तरह लागू रहेगी जब तक समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर नहीं हो जाते। समझौते पर हस्ताक्षर की तारीख और स्थान की घोषणा जल्द किए जाने की बात कही गई है।
इस समझौते में कौन-कौन से देश शामिल हैं?
ट्रंप के अनुसार, बातचीत के अंतिम बिंदुओं को अमेरिका, इज़राइल, सऊदी अरब, यूएई, कतर, तुर्की, पाकिस्तान, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, मिस्र और अन्य देशों ने मंज़ूरी दी है। हालाँकि इन देशों की ओर से कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं आई है।
क्या ईरान ने इस समझौते की पुष्टि की है?
अभी तक ईरान की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक नहीं हुई है। यह जानकारी पूरी तरह ट्रंप के बयान पर आधारित है, जिसमें उन्होंने कहा कि 'मेरी जानकारी के अनुसार, जवाब हाँ है।'
राष्ट्र प्रेस
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