ट्रंप का ऐलान: ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षा 'किसी न किसी तरह' होगी खत्म, 159 जहाज़ों को बनाया निशाना
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 6 जून 2026 को स्पष्ट संकेत दिया कि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को 'किसी न किसी तरह' समाप्त कर दिया जाएगा — चाहे वह किसी कूटनीतिक समझौते के ज़रिए हो या फिर 'किसी मुश्किल तरीके' से। विस्कॉन्सिन के चिप्पेवा फॉल्स में कृषि-केंद्रित एक सभा को संबोधित करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान को परमाणु-सशस्त्र राष्ट्र बनने से रोकने का अपना मकसद 'काफी हद तक' हासिल कर लिया है।
ट्रंप के बयान का सार
ट्रंप ने कहा, 'हमें परमाणु हथियार के खतरे को खत्म करना था। हम ऐसा नहीं होने देने वाले थे। हमने इसे काफी हद तक पूरा कर लिया है — और किसी न किसी तरह, यह काम पूरा हो गया है।' उन्होंने यह भी कहा कि 'या तो यह किसी समझौते से खत्म होगा या फिर किसी मुश्किल तरीके से।' उल्लेखनीय है कि ट्रंप ने चल रही बातचीत या किसी संभावित सैन्य कार्रवाई के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दी, लेकिन संकेत दिया कि घटनाक्रम 'जल्द ही और स्पष्ट' हो जाएगा।
सैन्य कार्रवाई के दावे
ट्रंप ने ईरान के विरुद्ध सैन्य अभियानों का भी उल्लेख किया और दावा किया कि चार दिनों में 159 ईरानी जहाज़ों को निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा, 'ईरान के पास अब कोई नौसेना नहीं है।' ट्रंप ने इस अभियान को अमेरिकी सैन्य शक्ति का प्रमाण बताते हुए कहा कि संघर्ष के दौरान लगाई गई नाकाबंदी 'अभूतपूर्व' थी — 'ऐसी नाकाबंदी पहले कभी नहीं हुई।' उन्होंने यह भी कहा कि उनका प्रशासन ईरान से जुड़े 'अधूरे कामों' को अभी भी निपटा रहा है।
ऊर्जा और कृषि पर असर
ट्रंप ने ईरान की स्थिति को अमेरिकी किसानों और ऊर्जा बाज़ार से सीधे जोड़ा। उन्होंने कहा, 'आपके लिए खाद की कीमतें काफी कम होने वाली हैं। खाद सस्ती होगी, ऊर्जा सस्ती होगी, और तेल व गैस की कीमतें भी काफी कम हो जाएंगी।' उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरान की स्थिति का समाधान आर्थिक दबाव को कम करने में मदद करेगा। यह बयान ऐसे समय में आया जब अमेरिकी ग्रामीण समुदाय ऊर्जा लागत को लेकर चिंतित हैं।
आगे क्या होगा
ट्रंप ने कहा, 'हम एक ऐसे मोड़ पर हैं जहाँ हम ईरान के मामले से बहुत जल्द बाहर निकलेंगे, और यह बहुत मज़बूत स्थिति होगी।' हालाँकि, उन्होंने किसी समयसीमा या समझौते की शर्तों का खुलासा नहीं किया। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण बने हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें इस घटनाक्रम पर टिकी हैं।