1 अगस्त 2026
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ट्रंप का संकल्प: ईरान पर हमले जारी रहेंगे जब तक परमाणु खतरा बना रहेगा

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ट्रंप का संकल्प: ईरान पर हमले जारी रहेंगे जब तक परमाणु खतरा बना रहेगा

सारांश

ट्रंप ने साफ किया — ईरान पर हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक वह परमाणु खतरा बना रहेगा। कैंप डेविड की ऐतिहासिक कैबिनेट बैठक के बाद उन्होंने तेहरान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए और हमास समझौते को ईरान नीति की सफलता का प्रमाण बताया।

मुख्य बातें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1 अगस्त को कहा कि ईरान पर सैन्य कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक वह अमेरिकी सेनाओं के लिए खतरा या परमाणु हथियार विकसित करने की स्थिति में है।
ट्रंप के अनुसार ईरान की पूरी नेवी ( 159 जहाज ) और 200 हवाई जहाज नष्ट हो चुके हैं, हालाँकि कुछ सीमित क्षमताएँ शेष हैं।
वार्ता के दौरान ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी अड्डे पर पाँच मिसाइलें दागीं, जिन्हें अमेरिकी सेना ने रोक लिया।
ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व पर भरोसा घटने की बात कही — "वे झूठ बोलते हैं और बातों को गलत तरीके से पेश करते हैं।" हमास के हथियार छोड़ने के प्रस्तावित समझौते को ट्रंप ने ईरान नीति की सफलता का प्रमाण बताया।
कैंप डेविड में आयोजित कैबिनेट बैठक का सीधा टीवी प्रसारण पहली बार किया गया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1 अगस्त को स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान तब तक नहीं रोकेगा, जब तक तेहरान अमेरिकी सेनाओं के लिए खतरा बना रहेगा या परमाणु हथियार विकसित करने की स्थिति में होगा। कैंप डेविड में ऐतिहासिक रूप से पहली बार टीवी पर सीधे प्रसारित कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि ईरानी नेतृत्व के साथ राजनयिक वार्ता सफल होने को लेकर उनका भरोसा घट रहा है।

सैन्य अभियान और ईरान की स्थिति

ट्रंप ने दावा किया कि ईरान को पहले ही भारी सैन्य नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने कहा, "उनके पास 159 जहाज थे — यही उनकी पूरी नेवी थी। उनकी पूरी नेवी अब समुद्र की तलहटी में पड़ी है। उनके पास 200 हवाई जहाज थे, वे सभी नष्ट हो गए।" हालाँकि उन्होंने यह भी माना कि ईरान के पास अभी कुछ सीमित क्षमताएँ शेष हैं — "उनके पास न तो नेवी है, न एयर फोर्स और न ही एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम — लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उनमें कोई क्षमता नहीं है।"

आने वाले हफ्तों को लेकर ट्रंप ने कहा, "हम उन पर जोरदार प्रहार करेंगे और एक समय ऐसा आएगा जब वे कहेंगे कि अब वे इसे और बर्दाश्त नहीं कर सकते।" उन्होंने अनुमान जताया कि कुछ और टकराव हो सकता है, लेकिन ईरान अंततः कमजोर पड़ेगा।

परमाणु हथियार पर अमेरिका की कड़ी रेखा

ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अपना रुख दोहराया — "उनके पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते। अगर ऐसा होता, तो अब तक मध्य पूर्व पूरी तरह तबाह हो चुका होता।" यह ट्रंप की ईरान नीति के तीन मुख्य स्तंभों में से एक है — आर्थिक प्रतिबंध, सैन्य दबाव और कूटनीति।

गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन ने इजराइल को शामिल करके क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्थाओं को मजबूत करने की कोशिश भी की है और तेहरान के सैन्य व वित्तीय नेटवर्क पर दबाव बढ़ाया है।

राजनयिक वार्ता और भरोसे की दरार

ट्रंप ने स्वीकार किया कि बातचीत जारी है, लेकिन ईरान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि समझौता हो सकता है — लेकिन उन पर से मेरा भरोसा कम हो रहा है क्योंकि वे झूठ बोलते हैं और बातों को गलत तरीके से पेश करते हैं।"

ट्रंप ने बताया कि वार्ता के दौरान ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी अड्डे पर पाँच मिसाइलें दागीं, जिन्हें अमेरिकी सेना ने रोक लिया। उन्होंने कहा, "मुझे पीट का फोन आया कि उन्होंने जॉर्डन में हमारे एक बेस पर पाँच मिसाइलें दागी हैं — अमेरिकी सेना ने उन पाँचों को रोक दिया।" इस घटना ने, उनके अनुसार, वार्ता की प्रक्रिया को कमजोर किया है।

हमास समझौते से ईरान नीति का संबंध

ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को हमास के हथियार छोड़ने के प्रस्तावित समझौते में हुई प्रगति से जोड़ा। उन्होंने कहा, "इजराइल के साथ हमारी एक समझ बनी है — इजराइल इससे बहुत खुश है। किसी ने नहीं सोचा था कि हमास से हथियार वापस लेना संभव होगा। यह दिखाता है कि ईरान के मामले में हमें कितनी कामयाबी मिल रही है।"

यूक्रेन और वैश्विक संघर्ष

कैबिनेट बैठक के बाद ट्रंप ने यूक्रेन को अमेरिका के उन्नत हथियार — जैसे पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और टॉमहॉक मिसाइलें — देने की बातचीत की पुष्टि की, लेकिन कहा कि ऐसी तकनीक सामरिक महत्व के कारण बहुत सावधानी से साझा की जाएगी। रूस-यूक्रेन संघर्ष पर उन्होंने कहा, "दोनों पक्षों को कुछ समझौते करने होंगे। हर महीने 25,000 युवा अपनी जान गंवा रहे हैं।"

यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब मध्य पूर्व में तनाव अपने उच्चतम स्तर पर है और अमेरिकी विदेश नीति एक साथ कई मोर्चों पर दबाव में है। आने वाले हफ्तों में ईरान की प्रतिक्रिया और राजनयिक वार्ता की दिशा यह तय करेगी कि यह संकट किस ओर मुड़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि जॉर्डन मिसाइल घटना यह भी दर्शाती है कि तेहरान अभी भी जवाबी कार्रवाई में सक्षम है। हमास समझौते को ईरान नीति की सफलता बताना राजनीतिक दृष्टि से सुविधाजनक है, पर दोनों के बीच कार्य-कारण संबंध स्थापित करना अभी सत्यापन की माँग करता है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने ईरान पर हमले जारी रखने की बात क्यों कही?
ट्रंप ने कहा कि जब तक ईरान अमेरिकी सेनाओं के लिए खतरा बना रहेगा या परमाणु हथियार विकसित करने की स्थिति में होगा, तब तक सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। वार्ता के दौरान जॉर्डन में अमेरिकी अड्डे पर ईरान द्वारा मिसाइलें दागने की घटना ने उनके इस रुख को और कड़ा किया।
कैंप डेविड कैबिनेट बैठक में क्या हुआ?
यह कैंप डेविड में आयोजित पहली ऐसी कैबिनेट बैठक थी जिसका सीधा प्रसारण टीवी पर किया गया। बैठक में कैबिनेट सदस्यों ने अर्थव्यवस्था, रक्षा, स्वास्थ्य और विदेश नीति पर प्रशासन का रुख रखा, जिसके बाद ट्रंप ने पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया।
ट्रंप के अनुसार ईरान की सैन्य स्थिति क्या है?
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के 159 जहाज और 200 हवाई जहाज नष्ट हो चुके हैं और उसके पास न नेवी है, न एयर फोर्स और न एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम। हालाँकि उन्होंने यह भी माना कि ईरान के पास अभी भी कुछ सीमित क्षमताएँ बची हैं।
क्या ईरान के साथ राजनयिक समझौता संभव है?
ट्रंप ने कहा कि समझौता संभव है, लेकिन ईरानी नेतृत्व पर उनका भरोसा घट रहा है क्योंकि वे 'झूठ बोलते हैं और बातों को गलत तरीके से पेश करते हैं।' वार्ता जारी है, लेकिन सैन्य दबाव भी बना रहेगा।
हमास समझौते का ईरान नीति से क्या संबंध है?
ट्रंप ने हमास के हथियार छोड़ने के प्रस्तावित समझौते को ईरान पर बढ़ते दबाव का परिणाम बताया। उनके अनुसार चार-पाँच महीने पहले ऐसी डील नामुमकिन लगती थी, और यह ईरान अभियान की सफलता का संकेत है।
राष्ट्र प्रेस
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