15 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

झारखंड में 5-6 महीने से पेंशन रुकी: बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर हमला, तत्काल भुगतान की मांग

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
झारखंड में 5-6 महीने से पेंशन रुकी: बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर हमला, तत्काल भुगतान की मांग

सारांश

झारखंड में बुजुर्गों और दिव्यांगों की पेंशन कथित तौर पर पाँच-छह महीने से रुकी है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार को सीधे निशाने पर लेते हुए तत्काल बकाया भुगतान की माँग की — सरकार की ओर से अभी तक कोई जवाब नहीं।

मुख्य बातें

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने 15 सितंबर 2026 को झारखंड सरकार पर वृद्धावस्था और दिव्यांग पेंशन रोकने का आरोप लगाया।
मरांडी के दावे के अनुसार, पिछले पाँच-छह महीनों से बड़ी संख्या में जरूरतमंद लाभार्थियों को पेंशन नहीं मिली।
उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से तत्काल हस्तक्षेप कर बकाया राशि जारी करने की माँग की।
पेंशन की कुछ सौ से एक हजार रुपए की मासिक राशि बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों के लिए एकमात्र आर्थिक आधार बताई गई।
मरांडी के आरोपों पर 15 सितंबर 2026 तक झारखंड सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।

झारखंड में वृद्धावस्था और दिव्यांग पेंशन भुगतान में कथित देरी को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने 15 सितंबर 2026 को रांची में राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर कड़ा हमला बोला। मरांडी ने दावा किया कि पिछले पाँच-छह महीनों से राज्य में बड़ी संख्या में बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांग व्यक्तियों को उनकी सामाजिक सुरक्षा पेंशन नहीं मिली है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर बकाया राशि जारी करने की माँग की है।

मरांडी के आरोप: क्या है पूरा मामला

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य में हजारों जरूरतमंद परिवारों के लिए हर महीने मिलने वाली पेंशन ही एकमात्र आर्थिक सहारा है। उन्होंने कहा कि इसी राशि से लोग दवाइयाँ खरीदते हैं, घर का राशन जुटाते हैं और रोजमर्रा की बुनियादी जरूरतें पूरी करते हैं।

मरांडी ने तर्क दिया कि कुछ सौ या एक हजार रुपए की यह राशि किसी संपन्न व्यक्ति के लिए भले ही मामूली हो, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर बुजुर्ग, विधवा या दिव्यांग व्यक्ति के लिए यह जीवन-रेखा के समान है। उनके अनुसार, किसी के लिए यह दवा और इलाज का एकमात्र जरिया है, तो किसी के लिए घर का चूल्हा जलाने का साधन।

आम जनता पर असर

नेता प्रतिपक्ष ने चेतावनी दी कि पेंशन में लंबे समय तक देरी होने से जरूरतमंद लोगों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि कई लाभार्थी इस समय भोजन और दवा जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं।

गौरतलब है कि झारखंड जैसे राज्य में, जहाँ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आदिवासी-वनवासी समुदायों की बड़ी आबादी सरकारी कल्याण योजनाओं पर निर्भर है, वहाँ सामाजिक सुरक्षा पेंशन की देरी सीधे तौर पर सबसे कमजोर तबके को प्रभावित करती है।

सरकार से माँग

मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि सरकार का यह दायित्व है कि वह बेसहारा और जरूरतमंद लोगों को समय पर सामाजिक सुरक्षा का लाभ उपलब्ध कराए। उन्होंने माँग की कि सरकार वृद्धावस्था और दिव्यांग पेंशन के लंबित भुगतान की स्थिति पर तत्काल संज्ञान ले और बकाया राशि अविलंब जारी करे।

उन्होंने यह भी कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि भले ही कम हो, लेकिन जिन लोगों की आय का कोई अन्य साधन नहीं है, उनके लिए यह केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि सम्मान के साथ जीवन जीने का आधार है।

सरकार की प्रतिक्रिया

मरांडी की ओर से किए गए इन दावों पर 15 सितंबर 2026 तक झारखंड सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में विपक्ष और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर राजनीतिक खींचतान तेज है।

क्या होगा आगे

विपक्ष के इस दबाव के बाद अब सभी की नजरें सोरेन सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि सरकार बकाया पेंशन जल्द जारी नहीं करती, तो यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और गर्म होने की संभावना है, क्योंकि आगामी हफ्तों में विधानसभा सत्र की भी संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन झारखंड में पेंशन वितरण की संरचनात्मक खामियाँ कोई नई बात नहीं हैं — आधार-सीडिंग त्रुटियाँ, बैंकिंग पहुँच की कमी और बजटीय देरी इस राज्य में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को बार-बार बाधित करती रही हैं। असली सवाल यह है कि यदि पेंशन सच में पाँच-छह महीने से रुकी है, तो सरकारी निगरानी तंत्र इतने समय तक मूकदर्शक क्यों बना रहा। सरकार की चुप्पी — जवाब नहीं, खंडन नहीं — खुद एक संकेत है।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बाबूलाल मरांडी ने झारखंड सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
मरांडी ने दावा किया है कि झारखंड में बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों को पिछले पाँच-छह महीनों से वृद्धावस्था और दिव्यांग पेंशन का भुगतान नहीं हुआ है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से तत्काल बकाया राशि जारी करने की माँग की है।
झारखंड में वृद्धावस्था पेंशन क्यों मायने रखती है?
झारखंड जैसे राज्य में बड़ी संख्या में बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए यह मासिक पेंशन आय का एकमात्र स्रोत है। इसी राशि से वे दवाइयाँ, राशन और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करते हैं, इसलिए इसमें देरी सीधे उनकी बुनियादी जरूरतों को प्रभावित करती है।
झारखंड सरकार ने मरांडी के आरोपों पर क्या कहा?
15 सितंबर 2026 तक झारखंड सरकार की ओर से मरांडी के दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। न खंडन किया गया और न ही कोई स्पष्टीकरण जारी किया गया।
झारखंड में पेंशन भुगतान में देरी के क्या कारण हो सकते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, झारखंड में आधार-सीडिंग की त्रुटियाँ, बैंकिंग पहुँच की कमी और बजटीय देरी पहले भी सामाजिक सुरक्षा पेंशन वितरण को बाधित करती रही हैं। हालाँकि, मौजूदा देरी के सटीक कारण सरकार की ओर से अभी तक स्पष्ट नहीं किए गए हैं।
इस मुद्दे पर आगे क्या होने की संभावना है?
विपक्ष के बढ़ते दबाव के बाद अब सरकार की प्रतिक्रिया पर नजरें टिकी हैं। यदि बकाया पेंशन जल्द जारी नहीं हुई, तो यह मुद्दा आगामी विधानसभा सत्र में भी उठाया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले