झारखंड में 5-6 महीने से पेंशन रुकी: बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर हमला, तत्काल भुगतान की मांग
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में वृद्धावस्था और दिव्यांग पेंशन भुगतान में कथित देरी को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने 15 सितंबर 2026 को रांची में राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर कड़ा हमला बोला। मरांडी ने दावा किया कि पिछले पाँच-छह महीनों से राज्य में बड़ी संख्या में बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांग व्यक्तियों को उनकी सामाजिक सुरक्षा पेंशन नहीं मिली है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर बकाया राशि जारी करने की माँग की है।
मरांडी के आरोप: क्या है पूरा मामला
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य में हजारों जरूरतमंद परिवारों के लिए हर महीने मिलने वाली पेंशन ही एकमात्र आर्थिक सहारा है। उन्होंने कहा कि इसी राशि से लोग दवाइयाँ खरीदते हैं, घर का राशन जुटाते हैं और रोजमर्रा की बुनियादी जरूरतें पूरी करते हैं।
मरांडी ने तर्क दिया कि कुछ सौ या एक हजार रुपए की यह राशि किसी संपन्न व्यक्ति के लिए भले ही मामूली हो, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर बुजुर्ग, विधवा या दिव्यांग व्यक्ति के लिए यह जीवन-रेखा के समान है। उनके अनुसार, किसी के लिए यह दवा और इलाज का एकमात्र जरिया है, तो किसी के लिए घर का चूल्हा जलाने का साधन।
आम जनता पर असर
नेता प्रतिपक्ष ने चेतावनी दी कि पेंशन में लंबे समय तक देरी होने से जरूरतमंद लोगों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि कई लाभार्थी इस समय भोजन और दवा जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं।
गौरतलब है कि झारखंड जैसे राज्य में, जहाँ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आदिवासी-वनवासी समुदायों की बड़ी आबादी सरकारी कल्याण योजनाओं पर निर्भर है, वहाँ सामाजिक सुरक्षा पेंशन की देरी सीधे तौर पर सबसे कमजोर तबके को प्रभावित करती है।
सरकार से माँग
मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि सरकार का यह दायित्व है कि वह बेसहारा और जरूरतमंद लोगों को समय पर सामाजिक सुरक्षा का लाभ उपलब्ध कराए। उन्होंने माँग की कि सरकार वृद्धावस्था और दिव्यांग पेंशन के लंबित भुगतान की स्थिति पर तत्काल संज्ञान ले और बकाया राशि अविलंब जारी करे।
उन्होंने यह भी कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि भले ही कम हो, लेकिन जिन लोगों की आय का कोई अन्य साधन नहीं है, उनके लिए यह केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि सम्मान के साथ जीवन जीने का आधार है।
सरकार की प्रतिक्रिया
मरांडी की ओर से किए गए इन दावों पर 15 सितंबर 2026 तक झारखंड सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में विपक्ष और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर राजनीतिक खींचतान तेज है।
क्या होगा आगे
विपक्ष के इस दबाव के बाद अब सभी की नजरें सोरेन सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि सरकार बकाया पेंशन जल्द जारी नहीं करती, तो यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और गर्म होने की संभावना है, क्योंकि आगामी हफ्तों में विधानसभा सत्र की भी संभावना है।