UP के धार्मिक स्थलों पर बारकोड सुविधा: 575 परियोजनाओं में 14 आस्था स्थलों पर काम पूरा
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों पर आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अब किसी गाइड या स्थानीय जानकार पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। प्रदेश सरकार ने 15 सितंबर 2026 को जानकारी दी कि धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों पर शिलालेख के साथ बारकोड लगाने की पहल शुरू की गई है — जिसे स्मार्टफोन से स्कैन करते ही संबंधित स्थल का इतिहास, पुरातात्विक महत्व और धार्मिक मान्यताएँ तत्काल उपलब्ध हो जाएँगी।
योजना का दायरा और अब तक की प्रगति
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 575 परियोजनाएँ स्वीकृत की गई हैं, जिनमें शिलालेख और बारकोड की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। इनमें से अब तक 14 आस्था स्थलों पर यह कार्य पूरा हो चुका है। शेष स्थलों पर कार्यदायी संस्थाओं के माध्यम से काम आगे बढ़ाया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य केवल स्थलों की पहचान दर्ज करना नहीं, बल्कि उन्हें जानकारी और पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित करना भी है।
किन स्थलों पर काम पूरा हुआ
जिन प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों पर शिलालेख एवं बारकोड लगाने का काम पूरा हो चुका है, उनमें शामिल हैं — नार्दानंद ऋषि आश्रम, मैनपुरी; सामौर बाबाधाम, फिरोजाबाद; वनखंडेश्वर मंदिर, उखरैंड; च्यवन ऋषि आश्रम, मैनपुरी; राधाकृष्णन मंदिर, फिरोजाबाद; कल्याणी माता मंदिर, प्रयागराज; श्री दुर्वासा आश्रम, प्रयागराज; शूलकंटेश्वर महादेव मंदिर, प्रयागराज और श्री दशाश्वमेध मंदिर, प्रयागराज।
इसके अतिरिक्त पगलानंद आश्रम, प्रयागराज; कमन्हिया बाबा मंदिर, अयोध्या; प्राचीन शिवाला मंदिर, अयोध्या; प्राचीन ज्वालादेवी मंदिर, सुचितागंज-सोहावल, अयोध्या और गहनाग बाबा मंदिर, अयोध्या में भी यह कार्य संपन्न हो चुका है।
आम श्रद्धालुओं और पर्यटकों पर असर
किसी प्राचीन मंदिर, आश्रम या धार्मिक परिसर में पहुँचने वाला व्यक्ति अब वहाँ लगे बारकोड को स्कैन कर उस स्थान से जुड़े इतिहास, महत्व और मान्यताओं को अपनी भाषा और सुविधानुसार जान सकेगा। विशेष रूप से ऐसे छोटे और अपेक्षाकृत कम चर्चित स्थल — जिनका स्थानीय ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व तो है, लेकिन जिनकी जानकारी व्यापक स्तर पर लोगों तक नहीं पहुँच पाती — इस पहल से नई पहचान पा सकेंगे।
सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था नई पीढ़ी को स्थानीय धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में भी सहायक सिद्ध होगी।
विरासत पर्यटन और डिजिटल जुड़ाव
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी जैसे प्रमुख तीर्थ नगरों में बुनियादी ढाँचे के व्यापक विस्तार में जुटी है। बारकोड-युक्त शिलालेखों की यह पहल, धार्मिक और विरासत पर्यटन को डिजिटल माध्यम से सशक्त बनाने की दिशा में एक व्यावहारिक कदम है। मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, आने वाले समय में परियोजनाएँ पूरी होने के साथ-साथ प्रदेश के और अधिक धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थल इस सुविधा से जुड़ते जाएँगे।