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यूपी में महापुरुषों की विरासत संरक्षण अभियान: छह जिलों में प्रतिमाएं स्थापित, बांदा-लखनऊ में काम जारी

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यूपी में महापुरुषों की विरासत संरक्षण अभियान: छह जिलों में प्रतिमाएं स्थापित, बांदा-लखनऊ में काम जारी

सारांश

उत्तर प्रदेश सरकार का महापुरुष विरासत अभियान अब ठोस आकार ले रहा है — अयोध्या से प्रयागराज तक छह जिलों में प्रतिमाएं खड़ी हो चुकी हैं और बांदा, लखनऊ, बुलंदशहर में काम जारी है। संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के मुताबिक यह अभियान युवाओं को राष्ट्र निर्माताओं के आदर्शों से जोड़ने का माध्यम है।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश के संस्कृति विभाग ने छह जिलों — अयोध्या, सीतापुर, प्रयागराज, फर्रुखाबाद, एटा सहित — में प्रमुख प्रतिमाएं स्थापित कीं।
अयोध्या में भगवान सूर्य नारायण ( 6 फीट ), भगवान गणेश ( 10 फीट ) और महर्षि वाल्मीकि ( 6 फीट ) की प्रतिमाएं स्थापित।
एटा, सीतापुर, प्रयागराज और फर्रुखाबाद में 12.5 फीट तक की कांस्य व अश्वारोही प्रतिमाएं लगाई गईं।
बांदा में रानी अवंतीबाई, छत्रपति शिवाजी महाराज व महाराजा छत्रसाल की 12.5 फीट अश्वारोही प्रतिमाओं का निर्माण प्रगति पर।
लखनऊ के चौक चौराहे पर छत्रपति शिवाजी महाराज की 12.5 फीट अश्वारोही कांस्य प्रतिमा का निर्माण जारी।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि अभियान का लक्ष्य युवाओं को महान व्यक्तित्वों के आदर्शों से जोड़ना है।

उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग ने 20 जुलाई 2026 को राष्ट्रनायकों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और साहित्यकारों की विरासत को जीवंत रखने के उद्देश्य से प्रदेशभर में प्रतिमा-स्थापना अभियान की प्रगति सार्वजनिक की। अयोध्या, सीतापुर, प्रयागराज, फर्रुखाबाद और एटा सहित छह जनपदों में प्रमुख प्रतिमाएं स्थापित की जा चुकी हैं, जबकि बांदा, लखनऊ और बुलंदशहर में नई प्रतिमाओं का निर्माण कार्य प्रगति पर है।

किन जिलों में क्या स्थापित हुआ

अयोध्या के सूर्यकुंड में भगवान सूर्य नारायण की 6 फीट ऊंची सैंड स्टोन प्रतिमा, गणेश कुंड में भगवान गणेश की 10 फीट ऊंची सैंड स्टोन प्रतिमा तथा महर्षि वाल्मीकि की 6 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा स्थापित की जा चुकी है। एटा के शहीद स्थल पर बाबू कल्याण सिंह की 12.5 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा और सीतापुर के महमूदाबाद में महंत अवैद्यनाथ की 12.5 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा भी लगाई गई है।

प्रयागराज में कमला बहुगुणा की 6 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा तथा फर्रुखाबाद के जहानगंज रोड स्थित क्षत्रिय भवन में महाराणा प्रताप की 12.5 फीट ऊंची अश्वारोही प्रतिमा स्थापित की जा चुकी है।

बांदा और लखनऊ में निर्माण जारी

बांदा के कालों कुआं चौराहे पर रानी अवंतीबाई की 12.5 फीट ऊंची अश्वारोही कांस्य प्रतिमा का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसी जिले के बड़ा चौराहा (तींदवारी रोड) पर छत्रपति शिवाजी महाराज तथा मवई चौराहे पर महाराजा छत्रसाल की 12.5 फीट ऊंची अश्वारोही कांस्य प्रतिमाएं स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है।

राजधानी लखनऊ के चौक चौराहे पर भी छत्रपति शिवाजी महाराज की 12.5 फीट ऊंची अश्वारोही कांस्य प्रतिमा का निर्माण जारी है। बुलंदशहर के नरौरा समाधि स्थल पर बाबू कल्याण सिंह की 12.5 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा स्थापित किए जाने का प्रस्ताव विचाराधीन है।

मंत्री जयवीर सिंह का बयान

प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले महापुरुषों और राष्ट्रनायकों का जीवन सदियों तक समाज को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन स्मारकों का उद्देश्य केवल प्रतिमाएं स्थापित करना नहीं, बल्कि युवाओं को देश के महान व्यक्तित्वों के आदर्शों, त्याग और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान से जोड़ना है।

गौरतलब है कि यह अभियान ऐसे समय में तेज हुआ है जब उत्तर प्रदेश सरकार सांस्कृतिक पर्यटन और ऐतिहासिक विरासत को राज्य की पहचान से जोड़ने पर विशेष ज़ोर दे रही है।

आगे की योजना

संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार विभाग अन्य महापुरुषों की प्रतिमाओं के निर्माण और स्थापना पर भी कार्य कर रहा है। आने वाले महीनों में बांदा, लखनऊ और बुलंदशहर में चल रहे निर्माण कार्यों के पूर्ण होने के बाद यह अभियान और अधिक जिलों तक विस्तारित किए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार इसका दायरा और गति उल्लेखनीय है। हालांकि, आलोचकों का सवाल यह भी रहेगा कि इन प्रतिमाओं के रखरखाव और उनके इर्द-गिर्द शैक्षणिक ढाँचे की क्या व्यवस्था है, क्योंकि बिना उसके ये स्मारक प्रेरणा के बजाय महज सजावट बनकर रह जाते हैं। यह अभियान ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले सांस्कृतिक पहचान को राजनीतिक एजेंडे के केंद्र में रख रही है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश में किन जिलों में महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं?
अयोध्या, सीतापुर, प्रयागराज, फर्रुखाबाद और एटा सहित छह जनपदों में प्रमुख प्रतिमाएं स्थापित की जा चुकी हैं। बांदा, लखनऊ और बुलंदशहर में निर्माण कार्य अभी जारी है।
अयोध्या में कौन-कौन सी प्रतिमाएं लगाई गई हैं?
अयोध्या के सूर्यकुंड में भगवान सूर्य नारायण की 6 फीट ऊंची सैंड स्टोन प्रतिमा, गणेश कुंड में भगवान गणेश की 10 फीट ऊंची सैंड स्टोन प्रतिमा और महर्षि वाल्मीकि की 6 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा स्थापित की गई है।
बांदा में कौन-सी प्रतिमाएं बन रही हैं?
बांदा के कालों कुआं चौराहे पर रानी अवंतीबाई की 12.5 फीट ऊंची अश्वारोही कांस्य प्रतिमा का निर्माण प्रगति पर है। बड़ा चौराहे पर छत्रपति शिवाजी महाराज और मवई चौराहे पर महाराजा छत्रसाल की 12.5 फीट अश्वारोही प्रतिमाएं भी स्थापित की जानी हैं।
इस अभियान का उद्देश्य क्या है?
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार इसका उद्देश्य केवल प्रतिमाएं स्थापित करना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को राष्ट्र निर्माताओं के आदर्शों, त्याग और योगदान से जोड़ना है। यह अभियान प्रदेशभर में सांस्कृतिक विरासत संरक्षण की व्यापक पहल का हिस्सा है।
लखनऊ में कौन-सी प्रतिमा का निर्माण हो रहा है?
लखनऊ के चौक चौराहे पर छत्रपति शिवाजी महाराज की 12.5 फीट ऊंची अश्वारोही कांस्य प्रतिमा का निर्माण कार्य जारी है। बुलंदशहर के नरौरा समाधि स्थल पर बाबू कल्याण सिंह की प्रतिमा का प्रस्ताव विचाराधीन है।
राष्ट्र प्रेस
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