CM योगी ने 8 राज्यों के कलाकारों को किया सम्मानित, 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' का संदेश दिया
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 15 अगस्त 2026 को अपने सरकारी आवास पर आठ राज्यों से आए लोककलाकारों से व्यक्तिगत संवाद किया और उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। स्वतंत्रता दिवस पर लखनऊ के विधानभवन परिसर में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, बिहार, मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के कलाकारों ने अपनी-अपनी लोक परंपराओं की मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। मुख्यमंत्री ने इस अवसर को 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' की भावना का जीवंत उदाहरण बताया।
मुख्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ
कार्यक्रम में विविध लोककलाओं की झलक देखने को मिली। जम्मू-कश्मीर के कलाकारों ने रउफ और डोंगरी नृत्य, महाराष्ट्र ने नमन और डिंडी नृत्य, अरुणाचल प्रदेश ने पराई लोकनृत्य, त्रिपुरा ने डारलॉन्ग लोकनृत्य और बिहार ने झिंझिया लोकनृत्य प्रस्तुत किया। मध्य प्रदेश ने गुदुमबाजा, गुजरात ने तलवार रास, छत्तीसगढ़ ने रेला पाटा और उत्तर प्रदेश के कलाकारों ने कथक की प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्री ने सभी कलाकारों एवं कोरियोग्राफरों को प्रशस्ति पत्र भेंट किए।
कलाकारों से व्यक्तिगत संवाद
छत्तीसगढ़ के कलाकार कुलभूषण चंद्राकर ने मुख्यमंत्री को बताया कि वे करीब 15 वर्ष पहले अयोध्या जा चुके हैं, लेकिन अब नई अयोध्या देखने के लिए उत्सुक हैं। इस पर योगी ने कहा कि 'तब की अयोध्या और आज की अयोध्या में जमीन-आसमान का अंतर है — आज की अयोध्या त्रेता युग का स्मरण कराती है।' कुलभूषण ने यह भी कहा कि पूरे छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री को 'बुलडोजर बाबा' के नाम से जाना जाता है, जिस पर योगी मुस्कुराए और कहा कि 'आप गा सकते हैं, मैं गा नहीं सकता — लेकिन गलत लोगों पर बुलडोजर तो चलवा ही सकता हूँ।'
जम्मू-कश्मीर से पहली बार उत्तर प्रदेश आईं कलाकार श्रुति ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर के दर्शन की इच्छा जताई। मुख्यमंत्री ने तत्काल अधिकारियों को उनके भ्रमण की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। बिहार के सुबोध से कहा कि 'मां जानकी का संबंध भी उस पावन भूमि से है, इसलिए अयोध्या अवश्य जाएँ।' गुजरात के पोरबंदर से आए राजू भाई से बातचीत में मुख्यमंत्री ने महात्मा गांधी की जन्मभूमि और भगवान कृष्ण के सखा सुदामा से जुड़ी मान्यताओं का उल्लेख किया।
लोक परंपराओं को बढ़ावा देने का आह्वान
मुख्यमंत्री ने महोबा के कलाकार जितेंद्र कुमार की आल्हा प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि इस वीर परंपरा को जीवित रखना अत्यंत आवश्यक है। मथुरा के राजेश प्रसाद शर्मा ने मुख्यमंत्री का आभार जताया और मथुरा को तीन बड़े महोत्सव दिए जाने की सराहना की। योगी ने कहा कि अयोध्या का दीपोत्सव, बरसाना का रंगोत्सव, मथुरा की जन्माष्टमी और प्रयागराज के माघ मेले को नई ऊंचाई देने का उद्देश्य लोक परंपराओं को मजबूती देना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 'कलाकार केवल गायन, वादन और नृत्य करने वाले नहीं — वे परंपरा और लोक संस्कृति के वाहक हैं। उनकी प्रस्तुतियों में अतीत छिपा होता है और भविष्य उसी अतीत से प्रेरणा लेता है।' उन्होंने यह भी कहा कि हर जनपद में महोत्सव होने चाहिए ताकि स्थानीय कलाकारों को मंच मिले और लोकगाथाएँ अगली पीढ़ी तक पहुँचें।
सांस्कृतिक एकता का संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि 'बंगाल से महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर से कन्याकुमारी, अरुणाचल प्रदेश से द्वारिका-पुरी तक — जब सभी एक-दूसरे से जुड़ेंगे, तभी एक भारत श्रेष्ठ भारत का संकल्प साकार होगा।' उन्होंने कलाकारों को सलाह दी कि जब भी किसी राज्य में जाएँ तो एक दिन अतिरिक्त निकालकर वहाँ की स्थानीय संस्कृति, स्थलों और खान-पान को अवश्य जानें। वाराणसी की कलाकार सुनिधि पाठक ने दर्शन व्यवस्थाओं के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया, जिस पर योगी ने कहा कि 'बाहर से आने वाले श्रद्धालु भारत की परंपरा में अतिथि हैं — उनका सम्मान करना हमारा दायित्व है।'
यह कार्यक्रम ऐसे समय में आया जब उत्तर प्रदेश सरकार सांस्कृतिक पर्यटन को राज्य की पहचान का केंद्र बनाने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है। आने वाले महीनों में विभिन्न जनपदों में और महोत्सवों के आयोजन की संभावना है।