संशोधित GRAP में बड़े बदलाव: इंटर-सिटी बस और डीजी सेट के नियम अब स्टेज-1 से लागू
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का संशोधित संस्करण 29 सितंबर 2026 को जारी किया गया, जिसमें इंटर-सिटी बसों और डीजल जनरेटर (डीजी) सेट से जुड़े प्रावधानों को पहले के स्टेज-2 से हटाकर अब स्टेज-1 से ही लागू करने का निर्णय लिया गया है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के तकनीकी सदस्य डॉ. एसडी अत्री ने बताया कि आयोग की बैठक में संशोधित GRAP शेड्यूल को औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद नए निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
संशोधन की पृष्ठभूमि
डॉ. अत्री ने बताया कि इससे पहले नवंबर 2025 में जारी GRAP शेड्यूल लागू था, जिसे सर्वोच्च न्यायालय की भी मंजूरी प्राप्त थी। गौरतलब है कि हर वर्ष हितधारकों और विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श के बाद GRAP शेड्यूल की समीक्षा की जाती है। इसी प्रक्रिया के अंतर्गत GRAP की उप-समिति ने इस बार शेड्यूल में बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया, जिसे आयोग ने स्वीकृति दे दी।
इंटर-सिटी बसों से जुड़ा पहला बड़ा बदलाव
संशोधित GRAP में पहला प्रमुख परिवर्तन इंटर-सिटी बसों से संबंधित है। पहले इन बसों से जुड़े प्रावधान स्टेज-2 में सूचीबद्ध थे, लेकिन अब इन्हें स्टेज-1 में शामिल कर दिया गया है। डॉ. अत्री ने स्पष्ट किया कि दिल्ली में BS-6 मानक से कम उत्सर्जन वाली बसों का प्रवेश पहले से प्रतिबंधित है। राजधानी में केवल CNG, BS-6 डीजल और इलेक्ट्रिक बसें ही संचालित हो सकती हैं। चूँकि यह व्यवस्था पूरे वर्ष लागू रहती है, इसलिए इसे तार्किक रूप से स्टेज-1 में स्थानांतरित किया गया है।
डीजी सेट से जुड़ा दूसरा अहम बदलाव
दूसरा बड़ा बदलाव डीजल जनरेटर (डीजी) सेट से जुड़ा है। डॉ. अत्री के अनुसार, डीजी सेट को लेकर करीब 76 ऐसे निर्देश हैं जो पूरे वर्ष प्रभावी रहते हैं। इनमें डीजी सेट की क्षमता से संबंधित प्रावधान, ड्यूल-फ्यूल किट, वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण और 800 किलोवाट से अधिक क्षमता वाले डीजी सेट से जुड़े नियम शामिल हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जब ये प्रावधान साल भर लागू रहते हैं, तो इन्हें GRAP के बाद के चरणों में लागू करने का कोई औचित्य नहीं बनता।
समन्वय और व्यापक उद्देश्य
CAQM के तकनीकी सदस्य ने बताया कि संशोधित GRAP तैयार करते समय परिवहन और ठोस कचरा प्रबंधन सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े उपायों को भी तार्किक रूप से एकीकृत किया गया है। इसका केंद्रीय उद्देश्य प्रदूषण नियंत्रण के स्थायी उपायों और GRAP के चरणबद्ध प्रावधानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली-एनसीआर में अक्तूबर-नवंबर के दौरान वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के 'गंभीर' श्रेणी में पहुँचने का सिलसिला हर साल चिंता का विषय बनता है।
आगे की राह
संशोधित GRAP शेड्यूल अब तत्काल प्रभाव से लागू है। आयोग का स्पष्ट संकेत है कि जो उपाय पहले केवल प्रदूषण की उच्च स्थिति में सक्रिय होते थे, उन्हें आधारभूत वर्ष-पर्यंत अनुपालन के रूप में स्थापित किया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दृष्टिकोण से एनसीआर के शहरों में प्रवर्तन की खंडित प्रकृति को कम किया जा सकता है।