23 अक्टूबर 2026
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गाजीपुर डंपिंग यार्ड और GRAP के बावजूद दिल्ली में प्रदूषण बेकाबू, निवासी बोले— 'कूड़े के पहाड़ से जीना दूभर'

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गाजीपुर डंपिंग यार्ड और GRAP के बावजूद दिल्ली में प्रदूषण बेकाबू, निवासी बोले— 'कूड़े के पहाड़ से जीना दूभर'

सारांश

GRAP लागू होने के बावजूद पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर में हालात नहीं बदले। डंपिंग यार्ड का धुआँ, खुला नाला और खुदी सड़कें निवासियों का दम घोंट रही हैं — और उनका सवाल है कि हर साल यही नाटक क्यों दोहराया जाता है।

मुख्य बातें

21 अक्टूबर 2026 को दिल्ली-एनसीआर में GRAP का पहला चरण लागू किया गया, जब कई इलाकों में AQI 300 के पार पहुँचा।
पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर के निवासियों ने डंपिंग यार्ड से उठते धुएँ, खुले नाले और खुदी सड़कों से उड़ती धूल को प्रदूषण का मुख्य कारण बताया।
निवासी मोहम्मद बिलाल अंसारी के अनुसार GRAP का कोई भी चरण स्थानीय समस्याओं का समाधान नहीं करता।
निवासी मुर्तजा ने बताया कि प्रदूषण के कारण इलाके में बच्चों समेत सभी को साँस लेने में कठिनाई हो रही है।
निवासी संतराम प्रधान ने कहा कि नाला ढकने और सड़क बनाने का वादा वर्षों से अधूरा है; कई सरकारें आईं और गईं पर हालात नहीं बदले।

पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर इलाके में प्रदूषण की समस्या 21 अक्टूबर 2026 को दिल्ली-एनसीआर में लागू किए गए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण के बाद भी जस की तस बनी हुई है। दिल्ली के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 300 के पार पहुँचने के बाद यह कदम उठाया गया था, लेकिन स्थानीय निवासियों का कहना है कि गाजीपुर डंपिंग यार्ड से उठता धुआँ, खुले नाले और खुदी सड़कों से उड़ती धूल उनकी तकलीफ को कम नहीं होने दे रहे।

मुख्य घटनाक्रम

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए प्राधिकरणों ने 21 अक्टूबर 2026 को GRAP का पहला चरण लागू किया। इस चरण के तहत निर्माण-कार्यों पर आंशिक प्रतिबंध, धूल नियंत्रण के उपाय और प्रदूषणकारी वाहनों पर कार्रवाई जैसे कदम शामिल होते हैं। हालाँकि गाजीपुर के निवासियों का आरोप है कि ज़मीनी हकीकत इन निर्देशों से कोसों दूर है।

स्थानीय निवासी मनीष कुमार ने कहा कि विकास और निर्माण कार्यों के नाम पर जगह-जगह सड़कें खोदकर छोड़ दी गई हैं। उनके अनुसार, 'शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होता — अधिकारियों और नेताओं की मिलीभगत के कारण स्थानीय लोगों की परेशानियाँ बनी हुई हैं।'

गाजीपुर डंपिंग यार्ड: पुरानी समस्या, नया दर्द

स्थानीय निवासी संतराम प्रधान ने बताया कि गाजीपुर में प्रदूषण की समस्या कोई नई नहीं है। उन्होंने कहा कि दिल्ली भर का कूड़ा यहाँ डाला जाता है और इलाके में एक बड़ा नाला वर्षों से खुला पड़ा है। नाले को ढकने और सड़क बनाने की बात कई बार की गई, लेकिन काम अब तक अधूरा है। संतराम ने कहा, 'कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन इलाके की बुनियादी समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।'

गौरतलब है कि गाजीपुर का यह डंपिंग यार्ड दशकों से विवाद का केंद्र रहा है। यहाँ जमा कूड़े का पहाड़ बारिश और तेज़ हवा में आग पकड़ लेता है, जिससे आसपास के इलाकों में ज़हरीला धुआँ फैलता है। यह ऐसे समय में और गंभीर हो जाता है जब सर्दियों के आगमन के साथ हवा की गति धीमी पड़ती है और प्रदूषक हवा में घुलते रहते हैं।

आम जनता पर असर

स्थानीय निवासी मोहम्मद बिलाल अंसारी ने कहा कि गाजीपुर में प्रदूषण साल के बारहों महीने रहता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि GRAP का पहला, दूसरा, तीसरा या चौथा चरण — कोई भी चरण लागू होने से स्थानीय लोगों की परेशानी खत्म नहीं होती। डंपिंग यार्ड से उठने वाली बदबू और धुआँ इलाके में जीना मुश्किल बना देते हैं।

मुर्तजा ने बताया कि गाजीपुर डंपिंग यार्ड के आसपास की कॉलोनियों के निवासियों को लंबे समय से साँस लेने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चे भी इस प्रदूषण से बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया

अधिकारियों की ओर से अब तक गाजीपुर की इन विशेष शिकायतों पर कोई औपचारिक जवाब सामने नहीं आया है। GRAP पहले चरण के तहत निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के उपाय अनिवार्य किए गए हैं, लेकिन निवासियों का आरोप है कि इन नियमों का पालन धरातल पर नहीं हो रहा।

क्या होगा आगे

AQI का स्तर यदि और बिगड़ता है तो प्रशासन GRAP के दूसरे या तीसरे चरण की ओर बढ़ सकता है, जिसमें और कड़े प्रतिबंध शामिल होंगे। हालाँकि विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक गाजीपुर जैसे ढाँचागत प्रदूषण स्रोतों का स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक मौसमी कार्रवाई से राहत सीमित ही रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ढाँचागत समस्याएँ — डंपिंग यार्ड, खुले नाले, अधूरे निर्माण — दशकों से अनछुई रहती हैं। सवाल यह है कि मौसमी नीतियाँ उन स्थायी स्रोतों को कैसे नियंत्रित करेंगी जिन्हें साल भर नज़रअंदाज़ किया जाता है। गाजीपुर डंपिंग यार्ड जैसी साइटें प्रदूषण-नियंत्रण की सबसे बड़ी विफलता का प्रतीक हैं — और जब तक इनका स्थायी निपटान नहीं होता, GRAP की हर घोषणा ज़मीन पर बेमानी साबित होती रहेगी।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में GRAP का पहला चरण कब और क्यों लागू किया गया?
21 अक्टूबर 2026 को दिल्ली-एनसीआर में GRAP का पहला चरण लागू किया गया, जब कई इलाकों में AQI 300 के पार पहुँच गया। इस चरण के तहत निर्माण-स्थलों पर धूल नियंत्रण, प्रदूषणकारी वाहनों पर कार्रवाई और खुले में कचरा जलाने पर प्रतिबंध जैसे उपाय लागू होते हैं।
गाजीपुर डंपिंग यार्ड दिल्ली के प्रदूषण के लिए क्यों ज़िम्मेदार माना जाता है?
गाजीपुर डंपिंग यार्ड में दिल्ली भर का कूड़ा डाला जाता है, जहाँ जमा कचरा अक्सर आग पकड़ लेता है और ज़हरीला धुआँ पैदा करता है। सर्दियों में हवा की गति धीमी होने पर यह धुआँ और अधिक नुकसानदेह हो जाता है, जिससे आसपास के इलाकों में साँस लेना मुश्किल हो जाता है।
GRAP लागू होने के बाद भी गाजीपुर के निवासियों को राहत क्यों नहीं मिलती?
निवासियों के अनुसार GRAP केवल मौसमी कदम है, जबकि गाजीपुर की समस्याएँ — डंपिंग यार्ड का धुआँ, खुला नाला, और अधूरे निर्माण कार्यों से उड़ती धूल — साल भर की स्थायी समस्याएँ हैं। तब तक इनका स्थायी समाधान नहीं निकलता, GRAP के किसी भी चरण से स्थानीय राहत सीमित ही रहेगी।
गाजीपुर के प्रदूषण से सबसे ज़्यादा कौन प्रभावित हो रहा है?
स्थानीय निवासी मुर्तजा के अनुसार, गाजीपुर डंपिंग यार्ड के आसपास की कॉलोनियों में रहने वाले सभी लोग प्रभावित हैं, विशेषकर बच्चे जिन्हें साँस लेने में तकलीफ हो रही है। बड़ी संख्या में गरीब आबादी भी इस इलाके में रहती है जो वैकल्पिक आवास की स्थिति में नहीं है।
गाजीपुर में नाला ढकने और सड़क बनाने के वादे का क्या हुआ?
स्थानीय निवासी संतराम प्रधान के अनुसार, नाला ढकने और सड़क बनाने की बात कई बार की गई लेकिन काम अब तक अधूरा है। कई सरकारें आईं और गईं, परंतु ये बुनियादी कार्य पूरे नहीं हुए।
राष्ट्र प्रेस
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