गाजीपुर डंपिंग यार्ड और GRAP के बावजूद दिल्ली में प्रदूषण बेकाबू, निवासी बोले— 'कूड़े के पहाड़ से जीना दूभर'
सारांश
मुख्य बातें
पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर इलाके में प्रदूषण की समस्या 21 अक्टूबर 2026 को दिल्ली-एनसीआर में लागू किए गए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण के बाद भी जस की तस बनी हुई है। दिल्ली के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 300 के पार पहुँचने के बाद यह कदम उठाया गया था, लेकिन स्थानीय निवासियों का कहना है कि गाजीपुर डंपिंग यार्ड से उठता धुआँ, खुले नाले और खुदी सड़कों से उड़ती धूल उनकी तकलीफ को कम नहीं होने दे रहे।
मुख्य घटनाक्रम
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए प्राधिकरणों ने 21 अक्टूबर 2026 को GRAP का पहला चरण लागू किया। इस चरण के तहत निर्माण-कार्यों पर आंशिक प्रतिबंध, धूल नियंत्रण के उपाय और प्रदूषणकारी वाहनों पर कार्रवाई जैसे कदम शामिल होते हैं। हालाँकि गाजीपुर के निवासियों का आरोप है कि ज़मीनी हकीकत इन निर्देशों से कोसों दूर है।
स्थानीय निवासी मनीष कुमार ने कहा कि विकास और निर्माण कार्यों के नाम पर जगह-जगह सड़कें खोदकर छोड़ दी गई हैं। उनके अनुसार, 'शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होता — अधिकारियों और नेताओं की मिलीभगत के कारण स्थानीय लोगों की परेशानियाँ बनी हुई हैं।'
गाजीपुर डंपिंग यार्ड: पुरानी समस्या, नया दर्द
स्थानीय निवासी संतराम प्रधान ने बताया कि गाजीपुर में प्रदूषण की समस्या कोई नई नहीं है। उन्होंने कहा कि दिल्ली भर का कूड़ा यहाँ डाला जाता है और इलाके में एक बड़ा नाला वर्षों से खुला पड़ा है। नाले को ढकने और सड़क बनाने की बात कई बार की गई, लेकिन काम अब तक अधूरा है। संतराम ने कहा, 'कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन इलाके की बुनियादी समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।'
गौरतलब है कि गाजीपुर का यह डंपिंग यार्ड दशकों से विवाद का केंद्र रहा है। यहाँ जमा कूड़े का पहाड़ बारिश और तेज़ हवा में आग पकड़ लेता है, जिससे आसपास के इलाकों में ज़हरीला धुआँ फैलता है। यह ऐसे समय में और गंभीर हो जाता है जब सर्दियों के आगमन के साथ हवा की गति धीमी पड़ती है और प्रदूषक हवा में घुलते रहते हैं।
आम जनता पर असर
स्थानीय निवासी मोहम्मद बिलाल अंसारी ने कहा कि गाजीपुर में प्रदूषण साल के बारहों महीने रहता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि GRAP का पहला, दूसरा, तीसरा या चौथा चरण — कोई भी चरण लागू होने से स्थानीय लोगों की परेशानी खत्म नहीं होती। डंपिंग यार्ड से उठने वाली बदबू और धुआँ इलाके में जीना मुश्किल बना देते हैं।
मुर्तजा ने बताया कि गाजीपुर डंपिंग यार्ड के आसपास की कॉलोनियों के निवासियों को लंबे समय से साँस लेने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चे भी इस प्रदूषण से बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया
अधिकारियों की ओर से अब तक गाजीपुर की इन विशेष शिकायतों पर कोई औपचारिक जवाब सामने नहीं आया है। GRAP पहले चरण के तहत निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के उपाय अनिवार्य किए गए हैं, लेकिन निवासियों का आरोप है कि इन नियमों का पालन धरातल पर नहीं हो रहा।
क्या होगा आगे
AQI का स्तर यदि और बिगड़ता है तो प्रशासन GRAP के दूसरे या तीसरे चरण की ओर बढ़ सकता है, जिसमें और कड़े प्रतिबंध शामिल होंगे। हालाँकि विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक गाजीपुर जैसे ढाँचागत प्रदूषण स्रोतों का स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक मौसमी कार्रवाई से राहत सीमित ही रहेगी।