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दिल्ली-एनसीआर में GRAP क्या है और इसके 4 चरणों में कौन-सी पाबंदियाँ लगती हैं, पूरी जानकारी

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दिल्ली-एनसीआर में GRAP क्या है और इसके 4 चरणों में कौन-सी पाबंदियाँ लगती हैं, पूरी जानकारी

सारांश

दिल्ली-एनसीआर में सर्दियाँ आते ही GRAP का नाम हर साल चर्चा में आता है, लेकिन इसके चार चरण क्या हैं और किस AQI स्तर पर कौन-सी पाबंदी लगती है — यह अधिकांश नागरिकों को नहीं पता। नोएडा का AQI 303 पहुँचने के साथ GRAP-1 लागू है और हालात बिगड़े तो अगले चरण की तैयारी भी ज़रूरी है।

मुख्य बातें

24 अक्टूबर 2026 को नोएडा का AQI 303 — 'बहुत खराब' श्रेणी; PM 2.5 222 और PM 10 269 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर ।
GRAP को पहली बार 2017 में अधिसूचित किया गया था; अब इसे CAQM लागू करता है।
GRAP के चार चरण : चरण-1 (AQI 201–300), चरण-2 (301–400), चरण-3 (401–450), चरण-4 (450+)।
चरण-4 में ट्रकों की एंट्री बैन, स्कूल-कॉलेज बंद, 50% कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम और ऑड-ईवन लागू हो सकता है।
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने प्रदूषण फैलाने वाले वाहन न निकालने की अपील की।
PM 2.5 कण सीधे फेफड़ों और रक्त में प्रवेश कर जाते हैं — हृदय व फेफड़ों के रोगियों के लिए सर्वाधिक खतरनाक।

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है — 24 अक्टूबर 2026 को नोएडा का लाइव AQI 303 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है। हवा में PM 2.5 का स्तर 222 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और PM 10 का स्तर 269 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुँच चुका है। इस पृष्ठभूमि में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) को समझना आम नागरिकों के लिए ज़रूरी हो गया है।

GRAP क्या है और इसे कौन लागू करता है

ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण से निपटने की एक आपातकालीन कार्य योजना है। सरल शब्दों में, यह प्रदूषण स्तर के अनुसार लागू होने वाले कड़े नियमों का एक ऐसा ढाँचा है, जिसमें हवा जितनी ज़्यादा खराब होती है, पाबंदियाँ उतनी ही सख्त होती जाती हैं। इसे पहली बार 2017 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अधिसूचित किया गया था।

वर्तमान में GRAP लागू करने की ज़िम्मेदारी वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की है। CAQM, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के पूर्वानुमानों की निरंतर निगरानी करता है। जब AQI एक निश्चित सीमा पार करता है या अगले कुछ दिनों में हवा बेहद खराब होने की आशंका होती है, तब CAQM संबंधित चरण लागू करने का आदेश देता है।

GRAP के चार चरण और उनकी पाबंदियाँ

चरण-1 (खराब): AQI 201–300 — यह पहली चेतावनी की अवस्था है। इसमें निर्माण और विध्वंस स्थलों पर धूल नियंत्रण के सख्त नियम लागू होते हैं, खुले में कचरा जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध होता है, सड़कों पर पानी का छिड़काव शुरू किया जाता है और 10–15 साल पुराने वाहनों पर सख्ती बढ़ाई जाती है। सरकार पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाने की अपील करती है।

चरण-2 (बहुत खराब): AQI 301–400 — इस स्तर पर डीजल जनरेटर के उपयोग पर रोक लग जाती है, हालाँकि आवश्यक सेवाओं को छूट मिलती है। पार्किंग शुल्क बढ़ाकर निजी वाहनों का उपयोग हतोत्साहित किया जाता है। CNG और इलेक्ट्रिक बसों तथा मेट्रो के फेरे बढ़ाए जाते हैं। तंदूर और कोयले वाले होटलों-ढाबों पर भी प्रतिबंध लागू होता है।

चरण-3 (गंभीर): AQI 401–450 — यह स्थिति अत्यंत खतरनाक है। राष्ट्रीय सुरक्षा और अत्यावश्यक परियोजनाओं को छोड़कर सभी निर्माण व तोड़फोड़ गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लग जाता है। BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल चार पहिया वाहनों के चलने पर रोक लगाई जाती है। प्राइमरी स्कूल बंद करने का निर्णय भी इसी चरण में लिया जाता है।

चरण-4 (बेहद गंभीर/आपातकाल): AQI 450 से ऊपर — यह सबसे चरम अवस्था है। आवश्यक सामग्री ले जाने वाले ट्रकों को छोड़कर दिल्ली में अन्य सभी ट्रकों की एंट्री बंद हो जाती है। स्कूल-कॉलेज बंद कर ऑनलाइन कक्षाएँ चलाई जाती हैं। सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम का आदेश दिया जा सकता है। ऑड-ईवन जैसी योजनाएँ भी इसी चरण में लागू होती हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया

बढ़ते प्रदूषण को लेकर दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने शुक्रवार को नागरिकों से अपील की कि जब तक GRAP-1 लागू है, प्रदूषण फैलाने वाले वाहन सड़क पर न निकालें और सरकार के प्रयासों में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि 'स्थिति अच्छी नहीं है।'

स्वास्थ्य पर असर

AQI 201–300 (खराब) की स्थिति में स्वस्थ लोगों को भी श्वास संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं। हृदय और फेफड़ों के रोगियों के लिए यह विशेष रूप से घातक मानी जाती है। AQI 301 से ऊपर पहुँचने पर स्वास्थ्य आपातकाल की आशंका बन जाती है। PM 2.5 के कण (2.5 माइक्रोमीटर से छोटे) सबसे खतरनाक होते हैं, क्योंकि ये साँस के ज़रिए सीधे फेफड़ों और रक्त में प्रवेश कर जाते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों की शुरुआत के साथ प्रदूषण का वार्षिक संकट एक बार फिर गहराने लगा है।

आगे क्या होगा

CAQM IMD और IITM के अगले कुछ दिनों के मौसम पूर्वानुमान के आधार पर GRAP के अगले चरण को लागू करने का निर्णय ले सकता है। यदि AQI में सुधार नहीं हुआ और हवाओं की गति धीमी रही, तो GRAP-2 की ओर बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों के अनुसार, पराली जलाने की घटनाएँ और मौसमी बदलाव मिलकर आने वाले हफ्तों में स्थिति को और जटिल बना सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एक दशक बाद भी दिल्ली-एनसीआर का AQI नवंबर-दिसंबर में खतरनाक स्तर तक पहुँचना एक अटल 'रिवाज' बन चुका है — यह सवाल उठाता है कि केवल प्रतिक्रियावादी पाबंदियाँ लगाना पर्याप्त है या नहीं। वर्षों से CAQM के आदेशों और उनके क्रियान्वयन के बीच की खाई रिपोर्टों में दर्ज है, फिर भी स्रोत-स्तर पर — पराली, निर्माण धूल, वाहन उत्सर्जन — नीतिगत निरंतरता का अभाव दिखता है। GRAP एक आपात औज़ार है, दीर्घकालिक समाधान नहीं; जब तक वायु प्रदूषण की रोकथाम को साल भर की प्राथमिकता नहीं बनाया जाएगा, हर सर्दियों में यही चक्र दोहराया जाएगा।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

GRAP (ग्रैप) क्या है और इसे क्यों लागू किया जाता है?
GRAP यानी ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान, दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण बढ़ने पर लागू होने वाली एक आपातकालीन कार्य योजना है। इसे 2017 में पर्यावरण मंत्रालय ने अधिसूचित किया था और अब CAQM इसे लागू करता है। AQI एक निश्चित सीमा पार करते ही या खराब हवा का पूर्वानुमान आते ही CAQM संबंधित चरण का आदेश देता है।
GRAP के चार चरण कौन-से हैं और उनमें क्या अंतर है?
चरण-1 (AQI 201–300) में धूल नियंत्रण और पुराने वाहनों पर सख्ती होती है। चरण-2 (AQI 301–400) में डीजल जनरेटर बंद और मेट्रो-बस फेरे बढ़ते हैं। चरण-3 (AQI 401–450) में निर्माण कार्य और BS-III/BS-IV वाहन बंद होते हैं। चरण-4 (AQI 450+) में ट्रकों की एंट्री बैन, स्कूल-कॉलेज बंद और वर्क फ्रॉम होम आदेश दिए जा सकते हैं।
24 अक्टूबर 2026 को दिल्ली-एनसीआर का AQI कितना था?
24 अक्टूबर 2026 को नोएडा का लाइव AQI 303 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है। हवा में PM 2.5 का स्तर 222 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और PM 10 का स्तर 269 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुँच गया था।
PM 2.5 इतना खतरनाक क्यों माना जाता है?
PM 2.5 के कण 2.5 माइक्रोमीटर से भी छोटे होते हैं, इसलिए ये साँस के ज़रिए सीधे फेफड़ों और रक्त में प्रवेश कर जाते हैं। हृदय और फेफड़ों के रोगियों के लिए यह विशेष रूप से घातक है। AQI 301 से ऊपर जाने पर स्वस्थ व्यक्तियों को भी श्वास संबंधी गंभीर समस्याएँ हो सकती हैं।
दिल्ली सरकार ने GRAP-1 लागू होने पर नागरिकों से क्या अपील की है?
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने नागरिकों से अपील की है कि जब तक GRAP-1 लागू है, प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को सड़क पर न निकालें और सरकार के प्रयासों में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि स्थिति अच्छी नहीं है।
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