24 अक्टूबर 2026
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आईटीबीपी डीजी के चीन वाले बयान पर रिटायर्ड कर्नल अजय रैना का पलटवार, बोले — 'गैर-जिम्मेदाराना और राजनीति से प्रेरित'

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आईटीबीपी डीजी के चीन वाले बयान पर रिटायर्ड कर्नल अजय रैना का पलटवार, बोले — 'गैर-जिम्मेदाराना और राजनीति से प्रेरित'

सारांश

रिटायर्ड कर्नल अजय रैना ने आईटीबीपी डीजी के उस बयान को चुनौती दी है जिसमें चीन से लड़ने की भारत की क्षमता पर सवाल उठाए गए थे। उनका तर्क है — ऑपरेशन सिंदूर और गलवान ने पहले ही जवाब दे दिया है; अब ज़रूरत है कि सुरक्षा मुद्दों को राजनीति से दूर रखा जाए।

मुख्य बातें

रिटायर्ड कर्नल अजय रैना ने 24 अक्टूबर 2026 को आईटीबीपी डीजी शत्रुजीत कपूर के चीन-संबंधी बयान को गैर-जिम्मेदाराना और राजनीति से प्रेरित बताया।
कपूर जनवरी 2026 में नियुक्त हुए और 31 अक्टूबर 2026 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं — कर्नल रैना ने 10 महीने के कार्यकाल में इतने बड़े विश्लेषण पर सवाल उठाए।
कर्नल रैना ने ऑपरेशन सिंदूर और गलवान घाटी का उदाहरण देते हुए कहा — भारतीय सेना चीन से निपटने में सक्षम है।
दो साल पहले लद्दाख के एसएसपी द्वारा लिखित रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसे बाद में वापस लिया गया था।
कर्नल रैना ने सभी नेताओं से अपील की कि देश की सुरक्षा को राजनीति से न जोड़ें ।
उन्होंने स्पष्ट किया कि एलएसी पर झड़पें होती हैं पर गोली नहीं चलती — सहमति से हल निकाला जाता है ।

रिटायर्ड कर्नल अजय रैना ने 24 अक्टूबर 2026 को जम्मू में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के चीन को लेकर दिए गए हालिया बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। जम्मू-कश्मीर से ताल्लुक रखने वाले इस वरिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारी ने डीजी के बयान को न केवल गैर-जिम्मेदाराना बताया, बल्कि उसे राजनीति से प्रेरित भी करार दिया।

नियुक्ति पर सवाल: '10 महीने में इतना बड़ा विश्लेषण?'

कर्नल रैना ने डीजी कपूर की योग्यता और कार्यकाल दोनों पर प्रश्नचिह्न लगाया। उन्होंने कहा, 'पहली बात यह है कि वे एक आईपीएस अधिकारी हैं और आईटीबीपी के डीजी की नियुक्ति बाहर (सैन्य बल से बाहर) से होती है। उनकी नियुक्ति जनवरी में हुई थी और 31 अक्टूबर को वे सेवानिवृत्त हो रहे हैं। करीब 10 महीने के अपने कार्यकाल में इतना बड़ा विश्लेषण कर लिया?'

यह टिप्पणी उल्लेखनीय है क्योंकि डीजी कपूर की सेवानिवृत्ति मात्र एक सप्ताह दूर है — और कर्नल रैना का इशारा यह है कि इतने संक्षिप्त कार्यकाल में भारत-चीन सैन्य संतुलन पर कोई आधिकारिक राय देना उचित नहीं था।

ऑपरेशन सिंदूर और गलवान का हवाला

कर्नल रैना ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर आईटीबीपी और भारतीय सेना साथ-साथ तैनात रहती हैं, और युद्ध की स्थिति में सेना का पूरा नियंत्रण होता है। उन्होंने यह भी कहा, 'राष्ट्रीय स्तर पर यह कहना कि भारत चीन से नहीं लड़ सकता और हमारी उनसे बराबरी नहीं है — यह किस आधार पर कहा गया? चीन ने आधुनिकीकरण किया, लेकिन भारतीय सेना ने भी कितना आधुनिकीकरण किया — यह दुनिया ने ऑपरेशन सिंदूर में देखा है।'

गौरतलब है कि कर्नल रैना ने गलवान घाटी की झड़प का भी उल्लेख किया, जहाँ भारतीय सैनिकों ने चीनी सेना का सामना किया था। उन्होंने कहा, 'हमें कोई संदेह नहीं है कि हम चीनी सेना से बिल्कुल निपट सकते हैं और हमने यह गलवान में करके दिखाया है।'

लद्दाख एसएसपी की पुरानी रिपोर्ट का संदर्भ

कर्नल रैना ने एक पुरानी घटना का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, दो साल पहले लद्दाख के एसएसपी ने लिखित में दिया था कि पूर्वी लद्दाख भारत के हाथ से निकल गया है। उन्होंने कहा, 'बाद में जब कार्रवाई हुई तो एसएसपी ने वह रिपोर्ट वापस ले ली।' इस उदाहरण से कर्नल रैना का तात्पर्य था कि ऐसे बयान राष्ट्रीय मनोबल को ठेस पहुँचाते हैं और राजनीतिक हवा में आकर दिए जाते हैं।

देश की सुरक्षा को राजनीति से अलग रखने की अपील

कर्नल रैना ने कहा कि मौजूदा माहौल में, जब देश में विभिन्न मुद्दों पर प्रदर्शन और विरोध हो रहे हैं, ऐसे में आईटीबीपी के डीजी की ओर से इस तरह का बयान देना और विपक्षी नेताओं की इसी भाषा में बयानबाजी करना केवल राजनीति है। उन्होंने कहा, 'आईटीबीपी डीजी को यह शोभा नहीं देता कि वे सार्वजनिक मंच पर कहें कि भारत चीन से लड़ने के काबिल नहीं है।'

उन्होंने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से अपील की कि देश की सुरक्षा के मुद्दे को राजनीति का हथियार न बनाएँ।

एलएसी की वास्तविकता: टकराव नहीं, सहमति

कर्नल रैना ने एलएसी की जमीनी हकीकत भी समझाई। उनके अनुसार, वहाँ कोई सीमा-स्तंभ नहीं है, इसलिए दोनों देशों के सैनिक कभी-कभी एक-दूसरे के क्षेत्र में प्रवेश कर जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया, 'वहाँ कोई गोली नहीं चलती, बल्कि आपस में सहमति बनाई जाती है।' यह टिप्पणी सीमा पर तनाव को लेकर अतिरंजित आख्यानों से अलग एक संयत दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब भारत-चीन संबंध हाल के वर्षों के सबसे सावधान और संवेदनशील दौर में हैं। आगे यह देखना होगा कि आईटीबीपी या रक्षा मंत्रालय की ओर से डीजी के मूल बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह रक्षा प्रतिष्ठान की मुख्यधारा की सोच के ज़्यादा करीब लगता है — लेकिन मुख्यधारा की कवरेज इस बात को नज़रअंदाज़ कर रही है कि डीजी का मूल बयान अभी सार्वजनिक रूप से खंडित नहीं हुआ है।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईटीबीपी डीजी शत्रुजीत कपूर ने चीन के बारे में क्या कहा था?
आईटीबीपी डीजी शत्रुजीत कपूर ने कथित तौर पर कहा था कि भारत चीन से लड़ने की स्थिति में नहीं है और दोनों देशों के बीच बराबरी नहीं है। इसी बयान पर रिटायर्ड कर्नल अजय रैना ने आपत्ति जताई है।
रिटायर्ड कर्नल अजय रैना कौन हैं और उनकी आपत्ति क्यों अहम है?
अजय रैना जम्मू-कश्मीर से जुड़े एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी हैं जिनका एलएसी और सीमा सुरक्षा के मुद्दों पर व्यावहारिक अनुभव है। उनकी आपत्ति इसलिए अहम है क्योंकि वे सेना की परिचालन क्षमता का प्रत्यक्ष ज्ञान रखते हैं और उन्होंने गलवान एवं ऑपरेशन सिंदूर के ठोस उदाहरण देकर डीजी के दावे को चुनौती दी है।
आईटीबीपी डीजी शत्रुजीत कपूर कब सेवानिवृत्त हो रहे हैं?
आईटीबीपी डीजी शत्रुजीत कपूर 31 अक्टूबर 2026 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उनकी नियुक्ति जनवरी 2026 में हुई थी, यानी उनका कुल कार्यकाल करीब 10 महीने का रहा।
एलएसी पर भारत-चीन के बीच झड़पें कैसे होती हैं?
कर्नल रैना के अनुसार, एलएसी पर कोई सीमा-स्तंभ नहीं है, इसलिए दोनों देशों के सैनिक कभी-कभी एक-दूसरे के दावे वाले क्षेत्र में प्रवेश कर जाते हैं। इन झड़पों में गोली नहीं चलती बल्कि आपस में सहमति बनाकर स्थिति सुलझाई जाती है।
क्या पहले भी लद्दाख को लेकर ऐसे विवादित बयान आए हैं?
हाँ, कर्नल रैना के अनुसार दो साल पहले लद्दाख के एसएसपी ने लिखित रिपोर्ट दी थी कि पूर्वी लद्दाख भारत के हाथ से निकल गया है। बाद में जब कार्रवाई हुई तो वह रिपोर्ट वापस ले ली गई। कर्नल रैना ने इसे मौजूदा विवाद के संदर्भ में एक चेतावनी के रूप में उद्धृत किया।
राष्ट्र प्रेस
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