24 अक्टूबर 2026
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तमिलनाडु: मानसून में स्कूल सुरक्षा पर शिक्षा विभाग का बड़ा सर्कुलर, इमारतों की जांच के आदेश

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तमिलनाडु: मानसून में स्कूल सुरक्षा पर शिक्षा विभाग का बड़ा सर्कुलर, इमारतों की जांच के आदेश

सारांश

मानसून की तेज़ बारिश के बीच तमिलनाडु के शिक्षा विभाग ने स्कूलों को इमारत जांच, जलनिकासी और खतरनाक ढाँचों को अलग करने के कड़े निर्देश दिए हैं। यह सर्कुलर राज्य भर के स्कूल प्रमुखों, मुख्य शिक्षा अधिकारियों और स्थानीय निकायों के लिए समन्वित कार्रवाई का आदेश है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु शिक्षा विभाग ने 24 अक्टूबर 2026 को सभी स्कूलों के लिए सुरक्षा जांच का सर्कुलर जारी किया।
छतों, पैरापेट दीवारों और सनशेड की तत्काल जांच अनिवार्य की गई; असुरक्षित इमारतों को बैरिकेड से अलग करने का निर्देश।
खुले कुओं, भूमिगत टंकियों और सेप्टिक टैंकों को कंक्रीट या लोहे के ढक्कन से ढकना होगा।
खतरनाक ढाँचों की जानकारी PWD, कलेक्टर कार्यालय, ग्राम पंचायत और नगर निकायों को देना अनिवार्य।
निर्माणाधीन स्कूलों में बैरिकेड लगाना और छात्रों की आवाजाही रोकना जरूरी।
स्कूल मैदान में जमा बारिश के पानी की तत्काल निकासी सुनिश्चित करने के निर्देश।

तमिलनाडु के स्कूली शिक्षा विभाग ने 24 अक्टूबर 2026 को सभी स्कूल प्रमुखों और मुख्य शिक्षा अधिकारियों को एक विस्तृत सर्कुलर जारी किया है, जिसमें मानसून की तेज बारिश के मद्देनज़र स्कूल परिसरों की संरचनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इस सर्कुलर में इमारतों की भौतिक जांच, जलभराव हटाने और खतरनाक ढाँचों को अलग करने जैसे उपायों पर विशेष ज़ोर दिया गया है। चेन्नई सहित पूरे राज्य में लगातार बारिश से स्कूल भवनों की पहले से मौजूद कमज़ोरियाँ उजागर होने की आशंका ने इस कदम को आवश्यक बना दिया है।

सर्कुलर में क्या निर्देश दिए गए हैं

शिक्षा विभाग के सर्कुलर के अनुसार, स्कूल प्रमुखों को छतों, पैरापेट दीवारों और सनशेड की जांच करनी होगी कि कहीं उनमें रिसाव या क्षति तो नहीं है। असुरक्षित पाई गई इमारतों को बैरिकेड लगाकर अलग करना होगा और पानी की टंकियों की संरचनात्मक मज़बूती की भी समीक्षा अनिवार्य की गई है।

इसके अलावा, स्कूल प्रमुखों को ऐसी इमारतों की सूची तैयार करने को कहा गया है जो उपयोग में नहीं हैं, अत्यधिक पुरानी हैं या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं और जिन्हें ध्वस्त किए जाने की ज़रूरत है। इस सूची को संबंधित अधिकारियों के साथ साझा करते हुए कार्रवाई में तेज़ी लाने का निर्देश दिया गया है।

स्थानीय निकायों और विभागों से समन्वय

विभाग ने स्पष्ट किया है कि ग्राम पंचायतों, नगर पंचायतों और नगर पालिकाओं को खतरनाक ढाँचों की जानकारी तुरंत देनी होगी। साथ ही, लोक निर्माण विभाग (PWD) और कलेक्टर कार्यालय को भी सूचित किया जाना अनिवार्य किया गया है ताकि भवन ध्वस्तीकरण की अनुमतियाँ शीघ्र प्राप्त की जा सकें।

सर्कुलर में स्कूल प्रबंधन, शिक्षा अधिकारियों, स्थानीय निकायों और इंजीनियरिंग विभागों के बीच समन्वित कार्रवाई पर विशेष बल दिया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में मानसून की बारिश चरम पर है और स्कूली इमारतों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में चिंता है।

जलभराव और भूमिगत ढाँचों पर विशेष ध्यान

मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे स्कूल परिसर में मौजूद खुले कुओं, भूमिगत पानी की टंकियों, रेनवाटर हार्वेस्टिंग ढाँचों और सेप्टिक टैंकों की जांच करें। छात्रों को इनमें गिरने से बचाने के लिए इन्हें कंक्रीट या लोहे के ढक्कन से ढकना होगा।

जिन स्कूलों के मैदान में बारिश का पानी जमा हो जाता है, वहाँ प्रधानाध्यापकों को जलनिकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। गौरतलब है कि जमा पानी न केवल दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है, बल्कि इमारतों की नींव को भी कमज़ोर करता है।

निर्माणाधीन स्कूलों के लिए अलग दिशानिर्देश

सर्कुलर के अनुसार, जिन स्कूलों में निर्माण कार्य जारी है, वहाँ काम वाली जगह को बैरिकेड से घेरना अनिवार्य होगा और वहाँ छात्रों व अनधिकृत व्यक्तियों की आवाजाही पूरी तरह रोकनी होगी। निर्माण में उपयोग होने वाले उपकरण और सामग्री छात्रों की पहुँच से दूर रखे जाने का निर्देश भी दिया गया है।

चेन्नई के मुख्य शिक्षा कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि प्रधानाध्यापकों को दीवारों की जांच करने, सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर स्थानीय निकायों से समन्वय बनाने और जहाँ ज़रूरी हो, वहाँ दीवारें बदलने के लिए अनुरोध भेजने का निर्देश दिया गया है।

आगे क्या होगा

विभाग ने स्कूल प्रमुखों को स्पष्ट किया है कि जांच के बाद तुरंत सुधारात्मक कदम उठाना उनकी ज़िम्मेदारी है — केवल निरीक्षण पर्याप्त नहीं होगा। यह सर्कुलर राज्य सरकार की उस व्यापक कोशिश का हिस्सा है, जिसमें मानसून के दौरान सार्वजनिक संस्थानों की संरचनात्मक सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। आने वाले हफ्तों में जिला-स्तरीय अनुपालन रिपोर्टें शिक्षा विभाग को प्रेषित की जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल अनुपालन की निगरानी का है। राज्य में सैकड़ों सरकारी स्कूल भवन दशकों पुराने हैं और उनकी मरम्मत का बजट वर्षों से अपर्याप्त रहा है — बारिश का मौसम हर साल इन कमज़ोरियों को उजागर करता है, फिर भी स्थायी समाधान के बजाय आपातकालीन सर्कुलर ही जारी होते हैं। जब तक शिक्षा विभाग जिला-स्तरीय अनुपालन रिपोर्टों को सार्वजनिक नहीं करता और खतरनाक भवनों की मरम्मत के लिए निर्धारित समयसीमा तय नहीं होती, यह आदेश कागज़ पर ही रह सकता है। बच्चों की सुरक्षा के लिए एकबारगी जांच नहीं, बल्कि संस्थागत जवाबदेही का ढाँचा चाहिए।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु शिक्षा विभाग का स्कूल सुरक्षा सर्कुलर क्या है?
यह 24 अक्टूबर 2026 को जारी एक आधिकारिक निर्देश है, जिसमें राज्य के सभी स्कूल प्रमुखों और मुख्य शिक्षा अधिकारियों को मानसून के दौरान इमारतों की संरचनात्मक जांच, जलभराव हटाने और खतरनाक ढाँचों को अलग करने के आदेश दिए गए हैं। यह सर्कुलर छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जारी किया गया है।
स्कूलों को किन-किन चीज़ों की जांच करने को कहा गया है?
स्कूल प्रमुखों को छतों, पैरापेट दीवारों, सनशेड, पानी की टंकियों, खुले कुओं, भूमिगत टंकियों, रेनवाटर हार्वेस्टिंग ढाँचों और सेप्टिक टैंकों की जांच करने को कहा गया है। इसके अलावा अत्यधिक पुरानी या क्षतिग्रस्त इमारतों की अलग से सूची भी बनानी होगी।
खतरनाक स्कूल भवनों के बारे में किसे सूचित करना होगा?
खतरनाक ढाँचों की जानकारी ग्राम पंचायतों, नगर पंचायतों, नगर पालिकाओं, लोक निर्माण विभाग (PWD) और कलेक्टर कार्यालय को देना अनिवार्य किया गया है। उद्देश्य है कि भवन ध्वस्तीकरण की अनुमतियाँ जल्द से जल्द मिल सकें।
यह सर्कुलर छात्रों की सुरक्षा के लिए क्यों ज़रूरी है?
मानसून की लगातार बारिश से इमारतों की पहले से मौजूद कमज़ोरियाँ और बढ़ सकती हैं, जिससे दीवारें गिरने, छत धँसने या जलभराव में बच्चों के गिरने जैसी दुर्घटनाएँ हो सकती हैं। समय रहते जांच और कार्रवाई से ऐसे खतरों को टाला जा सकता है।
निर्माणाधीन स्कूलों के लिए क्या विशेष निर्देश हैं?
जिन स्कूलों में निर्माण कार्य जारी है, वहाँ काम वाली जगह को बैरिकेड से घेरना और छात्रों की आवाजाही पूरी तरह रोकना अनिवार्य किया गया है। निर्माण सामग्री और उपकरण भी छात्रों की पहुँच से दूर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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