दिवाली-छठ पर रेलवे की सुरक्षा तैयारी: जीआरपी-आरपीएफ का 8वाँ अखिल भारतीय सम्मेलन, भीड़ प्रबंधन की नई रणनीति
सारांश
मुख्य बातें
त्योहारी सीजन में रेल यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने 24 अक्टूबर 2026 को 8वें अखिल भारतीय जीआरपी प्रमुख सम्मेलन में दिवाली और छठ के दौरान भीड़ प्रबंधन, समन्वित तैनाती और तकनीक-आधारित निगरानी पर विस्तृत रणनीति तय की। नई दिल्ली में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के जीआरपी प्रमुखों ने सर्वोत्तम अनुभव साझा किए और एजेंसियों के बीच तालमेल को मजबूत करने के उपाय सुझाए।
सम्मेलन की अध्यक्षता और प्रमुख उपस्थिति
इस सम्मेलन की अध्यक्षता सोनाली मिश्रा, महानिदेशक, आरपीएफ ने की। बैठक में सतीश कुमार, अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, रेलवे बोर्ड, बोर्ड के अन्य सदस्य तथा देशभर के जीआरपी प्रमुख उपस्थित रहे। रेल मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य रेलवे सुरक्षा से जुड़ी उभरती चुनौतियों का समाधान निकालना और आरपीएफ, जीआरपी तथा राज्य पुलिस के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना था।
दिल्ली मंडल का भीड़ प्रबंधन मॉडल
उत्तरी रेलवे के दिल्ली मंडल ने सम्मेलन में अपना भीड़ नियंत्रण मॉडल प्रस्तुत किया, जिसमें दिल्ली पुलिस, जीआरपी और दिल्ली मेट्रो के साथ समन्वित कार्ययोजना शामिल है। इस मॉडल के अंतर्गत सीसीटीवी निगरानी, सार्वजनिक घोषणाएँ, बैरिकेडिंग, निर्धारित प्रतीक्षा क्षेत्र और विशेष नियंत्रण कक्षों की स्थापना जैसे उपाय शामिल हैं। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब दिवाली और छठ के अवसर पर प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की संख्या में भारी वृद्धि देखी जाती है।
पिंक पेट्रोल और ड्रोन निगरानी की नई पहल
दक्षिण मध्य रेलवे ने अपने 'पिंक पेट्रोल: आइज़ इन द स्काई, शक्ति ऑन द ग्राउंड' मॉडल की जानकारी दी, जिसमें ड्रोन-आधारित निगरानी को महिला सुरक्षा कर्मियों की त्वरित प्रतिक्रिया टीमों के साथ एकीकृत किया गया है। यह मॉडल विशेष रूप से महिला यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। गौरतलब है कि यात्री सुरक्षा में तकनीक के बढ़ते उपयोग को भारतीय रेलवे की नई प्राथमिकता के रूप में देखा जा रहा है।
रेलमदद से जुड़ेगी जीआरपी, ट्रेन पर पथराव भी एजेंडे में
सम्मेलन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जीआरपी कर्मियों को रेलमदद प्लेटफॉर्म से जोड़ना रही। सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम्स (सीआरआईएस) द्वारा उठाए गए इस कदम का उद्देश्य यात्री शिकायतों के निपटारे को अधिक प्रभावी बनाना और सूचनाओं के आदान-प्रदान को तेज करना है। इसके अलावा, ट्रेनों पर पथराव की घटनाओं को भी गंभीर चुनौती के रूप में चिन्हित किया गया — अधिकारियों ने संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष गश्त, युवाओं के बीच जागरूकता अभियान और आरपीएफ-जीआरपी समन्वय को और मजबूत करने पर जोर दिया।
प्रोजेक्ट दिशा: ट्रैक के आसपास बच्चों को जोड़ने की पहल
मध्य रेलवे के पुणे मंडल ने 'प्रोजेक्ट दिशा' (सुरक्षा, सद्भाव और जागरूकता के लिए समर्पित पहल) की जानकारी साझा की। इसके तहत रेलवे ट्रैक के आसपास रहने वाले बच्चों को शिक्षा, मनोरंजन, सुरक्षा जागरूकता और सामुदायिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। इस परियोजना में गैर-सरकारी संगठनों (NGO), राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के स्वयंसेवकों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है, जिसका लक्ष्य पथराव, चोरी और अवैध रूप से ट्रैक पार करने जैसी खतरनाक गतिविधियों को हतोत्साहित करना है। रेल मंत्रालय का मानना है कि सामुदायिक जागरूकता और निवारक उपायों से ऐसी घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है, और त्योहारी मौसम में यह समन्वित व तकनीक-सक्षम सुरक्षा व्यवस्था रेल यात्राओं को अधिक सुरक्षित बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।