भारतीय रेलवे की सुरक्षा में AI, ड्रोन और CCTV का बड़ा विस्तार, वैष्णव ने की उच्चस्तरीय समीक्षा

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भारतीय रेलवे की सुरक्षा में AI, ड्रोन और CCTV का बड़ा विस्तार, वैष्णव ने की उच्चस्तरीय समीक्षा

सारांश

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उच्चस्तरीय बैठक में साफ किया — भारतीय रेलवे की सुरक्षा अब AI, ड्रोन और CCTV के त्रिकोण पर टिकी है। हाल की आगजनी घटनाओं में असामाजिक तत्वों की संलिप्तता के संकेतों के बाद RPF मिशन मोड में है और यात्रियों से हेल्पलाइन 139 पर सतर्कता बरतने की अपील की गई है।

मुख्य बातें

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 21 मई को नई दिल्ली में उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
भारतीय रेलवे ट्रेन व यात्री सुरक्षा के लिए AI , ड्रोन और CCTV का मिशन मोड में उपयोग कर रहा है।
हाल की आगजनी घटनाओं सहित कई मामलों की प्रारंभिक जाँच में असामाजिक तत्वों की संलिप्तता के संकेत मिले हैं।
RPF और GRP के बीच सूचना-साझाकरण और समन्वय को और मज़बूत करने पर सहमति बनी।
यात्रियों से संदिग्ध गतिविधि की सूचना हेल्पलाइन नंबर 139 पर देने की अपील की गई।
साइबर सुरक्षा सुदृढ़ीकरण और AI-आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम की तैनाती पर भी चर्चा हुई।

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार, 21 मई को स्पष्ट किया कि भारतीय रेलवे ट्रेनों, यात्रियों, स्टेशन परिसरों और विस्तृत रेल नेटवर्क की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों का व्यापक उपयोग मिशन मोड में किया जा रहा है। यह घोषणा नई दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक के दौरान की गई, जिसमें देशभर के फील्ड अधिकारी भी शामिल हुए।

बैठक का मुख्य एजेंडा

रेल मंत्रालय ने वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में देशभर के फील्ड अधिकारियों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया। बैठक का केंद्रीय उद्देश्य रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) के बीच सूचना-साझाकरण तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाकर परिचालन समन्वय को सुदृढ़ करना था।

मंत्री वैष्णव ने कहा कि RPF के बीट स्तर पर खुफिया जानकारी जुटाने की प्रणाली को मज़बूत किया जा रहा है, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते पहचाना और निष्प्रभावी किया जा सके।

असामाजिक तत्वों की संलिप्तता की आशंका

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि पिछले कुछ दिनों में हुई कई घटनाओं — जिनमें आगजनी की कुछ हालिया घटनाएँ भी शामिल हैं — की प्रारंभिक जाँच में असामाजिक तत्वों की संलिप्तता के संकेत मिले हैं। RPF इन मामलों की सक्रिय रूप से जाँच कर रही है।

आधिकारिक बयान के अनुसार, कई मामलों में रेलवे की त्वरित और सक्रिय कार्रवाई के चलते बड़े हादसों को टाल पाना संभव हुआ। गौरतलब है कि यह समीक्षा ऐसे समय में आई है जब रेलवे नेटवर्क पर सुरक्षा संबंधी घटनाओं को लेकर सार्वजनिक चिंता बढ़ी हुई है।

तकनीक-आधारित सुरक्षा ढाँचे को मज़बूती

बैठक में AI-आधारित निगरानी एवं मॉनिटरिंग सिस्टम की तैनाती, CCTV कवरेज का विस्तार, कैमरों की गुणवत्ता उन्नयन और साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ करने पर विशेष ज़ोर दिया गया। इसके अतिरिक्त, रेलवे बोर्ड मुख्यालय और फील्ड ज़ोन के बीच परिचालन सुरक्षा समन्वय को बेहतर बनाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाने पर सहमति बनी।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारतीय रेलवे विश्व के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में से एक है और प्रतिदिन करोड़ों यात्रियों को सेवा प्रदान करता है — जिससे सुरक्षा की चुनौती स्वाभाविक रूप से विशाल है।

यात्रियों से सहयोग की अपील

मंत्रालय ने यात्रियों से यात्रा के दौरान और स्टेशन परिसर में सतर्क एवं जागरूक रहने की अपील की है। रेलवे परिसर में किसी भी संदिग्ध गतिविधि या व्यक्ति की जानकारी तुरंत रेलवे हेल्पलाइन नंबर 139 पर देने का आग्रह किया गया है।

बैठक में यह भी तय किया गया कि यात्रियों को असामाजिक गतिविधियों की रोकथाम में सक्रिय भागीदार बनाने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएँगे — यानी सुरक्षा केवल तकनीक तक सीमित नहीं, बल्कि जन-भागीदारी पर भी आधारित होगी।

आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि AI-संचालित निगरानी और ड्रोन-आधारित गश्त का संयोजन रेलवे सुरक्षा में गुणात्मक बदलाव ला सकता है, बशर्ते कि फील्ड स्तर पर प्रशिक्षण और बुनियादी ढाँचा पर्याप्त हो। रेलवे के इस कदम से उम्मीद है कि आने वाले महीनों में सुरक्षा घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी और यात्रियों का विश्वास और मज़बूत होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन का है — भारत के विशाल रेल नेटवर्क के हज़ारों छोटे स्टेशनों और दूरदराज़ के ट्रैक खंडों तक AI और ड्रोन की पहुँच कब और कैसे होगी, यह स्पष्ट नहीं किया गया। हाल की आगजनी घटनाओं में 'असामाजिक तत्वों' की संलिप्तता का उल्लेख गंभीर है, लेकिन जाँच के ठोस निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किए गए — जो पारदर्शिता की दृष्टि से चिंताजनक है। RPF और GRP के बीच समन्वय की कमी पुरानी समस्या है; बैठकें पहले भी हुई हैं, पर दोहरे अधिकार क्षेत्र की संरचनात्मक बाधा बनी हुई है। जब तक फील्ड स्तर पर जवाबदेही और तकनीकी प्रशिक्षण सुनिश्चित नहीं होता, यह पहल भी पिछली घोषणाओं की तरह कागज़ी रह सकती है।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय रेलवे सुरक्षा के लिए AI और ड्रोन का उपयोग कैसे कर रहा है?
भारतीय रेलवे ट्रेनों, यात्रियों और स्टेशन परिसरों की निगरानी के लिए AI-आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम और ड्रोन तैनात कर रहा है। इसके साथ CCTV कवरेज का विस्तार और कैमरों की गुणवत्ता उन्नयन भी किया जा रहा है।
21 मई की रेलवे सुरक्षा समीक्षा बैठक में क्या निर्णय लिए गए?
बैठक में RPF और GRP के बीच सूचना-साझाकरण मज़बूत करने, AI-आधारित निगरानी तैनात करने, साइबर सुरक्षा सुदृढ़ करने और यात्रियों को जागरूकता अभियान से जोड़ने पर सहमति बनी। रेलवे बोर्ड मुख्यालय और फील्ड ज़ोन के बीच परिचालन समन्वय बेहतर करने पर भी ज़ोर दिया गया।
हाल की रेलवे आगजनी घटनाओं में किसकी संलिप्तता बताई जा रही है?
प्रारंभिक जाँच के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में हुई कई घटनाओं — जिनमें आगजनी की कुछ घटनाएँ शामिल हैं — में असामाजिक तत्वों की संलिप्तता के संकेत मिले हैं। RPF इन मामलों की सक्रिय रूप से जाँच कर रही है और अभी तक कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है।
रेलवे परिसर में संदिग्ध गतिविधि की सूचना कहाँ दें?
रेल मंत्रालय ने यात्रियों से अपील की है कि स्टेशन परिसर या ट्रेन में किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की जानकारी तुरंत रेलवे हेल्पलाइन नंबर 139 पर दें। यात्रियों को यात्रा के दौरान सतर्क और जागरूक रहने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
RPF और GRP में क्या अंतर है और इनके बीच समन्वय क्यों ज़रूरी है?
रेलवे सुरक्षा बल (RPF) केंद्र सरकार के अधीन रेलवे संपत्ति और यात्रियों की सुरक्षा करता है, जबकि सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) राज्य सरकारों के अधीन आपराधिक मामलों की जाँच करती है। दोनों के बीच त्वरित सूचना-साझाकरण से घटनाओं पर तेज़ और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित होती है।
राष्ट्र प्रेस
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