भारतीय रेलवे में एआई और डिजिटल तकनीक का क्रांतिकारी विस्तार, सुरक्षा में सुधार
सारांश
Key Takeaways
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग रेलवे सुरक्षा में सुधार के लिए हो रहा है।
- इंटीग्रेटेड पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम (आईपीआईएस) यात्री सुविधाओं में सुधार लाने में सहायक है।
- टनल कम्युनिकेशन सिस्टम सुरक्षा और संचार को मजबूत कर रहा है।
- आईपीएमपीएलएस तकनीक रेलवे नेटवर्क की क्षमता को बढ़ा रही है।
- डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को साकार करने में रेलवे की नई पहलों का योगदान है।
नई दिल्ली, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारतीय रेलवे की सुरक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि “कैमरे सिस्टम की आंखें और एआई उसका दिमाग होगा।” उन्होंने बताया कि यह तकनीकी परिवर्तन रेलवे सुरक्षा को मजबूत करने में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो रहा है।
यात्री सुविधाओं में भी उल्लेखनीय सुधार किया गया है। इंटीग्रेटेड पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम (आईपीआईएस) का विस्तार किया गया है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक ट्रेन इंडिकेटर बोर्ड, कोच गाइडेंस सिस्टम और पब्लिक एड्रेस सिस्टम शामिल हैं। आईपीआईएस को नेशनल ट्रेन इंक्वायरी सिस्टम (एनटीईएस) से जोड़ा गया है, जिससे ट्रेनों से संबंधित जानकारी और घोषणाएं रियल-टाइम में उपलब्ध हो रही हैं। अब तक यह सुविधा 1,405 रेलवे स्टेशनों पर लागू की जा चुकी है।
संचार व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न रेलवे जोनों में टनल कम्युनिकेशन सिस्टम भी लागू किया गया है। विशेषकर उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) परियोजना में यह प्रणाली अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रही है। इससे सुरंगों के भीतर काम कर रहे कर्मचारियों और कंट्रोल सेंटर के बीच निर्बाध संचार संभव हो सका है, जिससे कठिन इलाकों में सुरक्षा और समन्वय में वृद्धि हुई है।
रेलवे के टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर को भी आधुनिक किया गया है। इंटरनेट प्रोटोकॉल मल्टी-प्रोटोकॉल लेबल स्विचिंग (आईपीएमपीएलएस) तकनीक के माध्यम से एक उच्च क्षमता वाला नेटवर्क तैयार किया जा रहा है, जो वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करेगा। इससे वीडियो निगरानी, मोबाइल ट्रेन रेडियो कम्युनिकेशन (एमटीआरसी), पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (पीआरएस), अनरिजर्व्ड टिकटिंग सिस्टम (यूटीएस), फ्रेट ऑपरेशंस इंफॉर्मेशन सिस्टम (एफओआईएस), स्काडा और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी सेवाओं को बेहतर समर्थन मिलेगा।
अब तक आईपीएमपीएलएस तकनीक 1,396 रेलवे स्टेशनों पर सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी है, जो डिजिटल रूप से एकीकृत रेलवे नेटवर्क की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इन पहलों से स्पष्ट है कि भारतीय रेलवे अत्याधुनिक तकनीक और नवाचार का उपयोग कर एक सुरक्षित, स्मार्ट और अधिक कुशल रेल नेटवर्क विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही, टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, एआई आधारित प्रणाली और बेहतर यात्री सूचना सेवाएं ‘डिजिटल इंडिया’ के विजन को भी मजबूती प्रदान कर रही हैं।