गारे पाल्मा सेक्टर-2 खदान से कोयले की आपूर्ति शुरू, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के बीच ऊर्जा संबंधों में मजबूती
सारांश
Key Takeaways
- गारे पाल्मा सेक्टर-2 खदान से कोयले की पहली खेप की रवानगी शुरू।
- महाराष्ट्र के पावर प्लांट को ईंधन की सप्लाई में मजबूती।
- प्रोजेक्ट से 3,400 से अधिक रोजगार के अवसर।
- स्थानीय विकास के लिए 35 करोड़ रुपए का बजट।
- पर्यावरण सुरक्षा के उपायों पर जोर।
नई दिल्ली, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्थित 'गारे पाल्मा सेक्टर-2' (जीपी2) कोयला खदान से कोयले की पहली खेप की रवानगी आज आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई।
इस विकास से महाराष्ट्र के पावर प्लांट को ईंधन की सप्लाई में मजबूती मिलने की उम्मीद है, जिससे लंबे समय के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
यह कोयला ब्लॉक महाराष्ट्र स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड के लिए विकसित किया जा रहा है, जो कि एक सरकारी कंपनी है और राज्य में बिजली उत्पादन में प्रमुख भूमिका निभाती है।
कोयला भेजने की प्रक्रिया के आरंभ होते ही, छत्तीसगढ़ से आने वाला कोयला अब सीधे महाराष्ट्र के थर्मल पावर स्टेशनों को समर्थन देगा, जिससे ईंधन की सप्लाई अधिक स्थिर और भरोसेमंद होगी।
गारे पाल्मा सेक्टर-2 खदान में लगभग 655 मिलियन टन कोयले का भंडार होने का अनुमान है, और इसकी अधिकतम उत्पादन क्षमता हर साल 23.6 मिलियन टन है।
यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से चालू होने पर छत्तीसगढ़ के लिए रॉयल्टी, डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (डीएमएफ) के योगदान, गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) और अन्य करों के जरिए काफी कमाई का स्रोत बनेगा।
समय के साथ, कुल सीधे राजस्व की संभावना लगभग 29,000 करोड़ रुपए होने का अनुमान है। इसके अलावा, यह प्रोजेक्ट स्थानीय आर्थिक विकास को भी प्रोत्साहित करेगा।
इससे 3,400 से अधिक सीधे रोजगार के अवसर उत्पन्न होने की संभावना है, साथ ही परिवहन, निर्माण, आतिथ्य और अन्य सहायक सेवाओं के क्षेत्रों में भी अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिलेंगे।
इससे इस क्षेत्र में लोगों की आजीविका में काफी सुधार होने की उम्मीद है।
यह प्रोजेक्ट कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के माध्यम से सामुदायिक विकास पर भी ध्यान केंद्रित करता है।
स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, स्वच्छता, आधारभूत संरचना और कौशल विकास के कार्यक्रमों के लिए 35 करोड़ रुपए का प्रारंभिक बजट निर्धारित किया गया है।
इसके अतिरिक्त, प्रोजेक्ट के सालाना शुद्ध मुनाफे का 2 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय विकास कार्यों में लगाया जाएगा।
14 प्रभावित गांवों के 1,679 परिवारों के लिए पुनर्वास और पुनः बसाने की योजनाएं लागू की जा रही हैं।
प्रोजेक्ट के डिज़ाइन में पर्यावरण संरक्षण के उपाय शामिल किए गए हैं। पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए वृक्षारोपण, ग्रीन बेल्ट का निर्माण, प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली, जल संरक्षण और खदान बंद होने के बाद भूमि की पुनर्स्थापना जैसे उपाय किए जा रहे हैं।