केन्या ने भारत के डीपीआई मॉडल को अपनाकर शासन व्यवस्था में क्रांति ला दी
सारांश
Key Takeaways
- केन्या ने भारत के डीपीआई को अपनाया है।
- यूपीआई और डिजीलॉकर जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
- सरकारी सेवाओं की गति में सुधार होगा।
- डिजिटल व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
- यह अन्य अफ्रीकी देशों के लिए एक उदाहरण है।
नई दिल्ली, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केन्या ने अपनी शासन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) को अपनाया है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इसमें यूपीआई जैसे तात्कालिक भुगतान प्रणाली और डिजीलॉकर जैसी डिजिटल दस्तावेज भंडारण सुविधाएं शामिल हैं।
इंडिया नैरेटिव की रिपोर्ट में कहा गया है कि केन्या की प्रशासनिक संरचना, जो लंबे समय से देरी और बिखरे हुए पहचान प्रणाली की समस्याओं का सामना कर रही थी, अब भारतीय डिजिटल सिस्टम के द्वारा महत्वपूर्ण परिवर्तन करने जा रही है। इससे सरकारी सेवाओं की गति बढ़ेगी और तेजी से विकसित हो रही अफ्रीकी अर्थव्यवस्था में डिजिटल वाणिज्य को बढ़ावा मिलेगा।
रिपोर्ट के अनुसार, "2023 से 2026 के बीच यूपीआई जैसे भुगतान प्रणाली और डिजीलॉकर जैसी दस्तावेज भंडारण के पायलट प्रोजेक्ट्स एक मजबूत दक्षिण-दक्षिण साझेदारी का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। इससे केन्या महाद्वीप में डिजिटल क्षेत्र का अग्रणी देश बन सकता है और आम जनता के लिए सरकारी प्रक्रियाएं सरल होंगी।"
यूपीआई जैसे सिस्टम को केन्या के नागरिकों को प्रदान किए जाने वाले विशिष्ट व्यक्तिगत आईडी नंबर 'माईशा नंबा' के साथ जोड़ा जा रहा है, जिससे शिक्षा सुधार और केनेक जैसे पोर्टल्स को मजबूती मिलेगी।
इन पायलट प्रोजेक्ट्स का उद्देश्य पहचान, भुगतान और सुरक्षित दस्तावेज सत्यापन को एक जगह लाना है, ताकि सरकार से नागरिकों तक सेवाएं (जी2सी), शिक्षा सुधार और छोटे व्यवसायों के भुगतान प्रणाली को सुधार सकें। इसके साथ ही यह एम-पेसा जैसे मौजूदा मोबाइल मनी प्लेटफार्म के साथ भी सामंजस्य स्थापित करेगा।
रिपोर्ट के अनुसार, इस सिस्टम के पूर्ण कार्यान्वयन के बाद यह रेमिटेंस, व्यापारिक भुगतान और सरकारी सेवाओं को गति प्रदान करेगा, साथ ही धोखाधड़ी पर नियंत्रण लगाने में भी सहायता करेगा।
अप्रैल 2026 में पायलट प्रोजेक्ट्स के दौरान बेहतर परिणाम देखने को मिले, जैसे तेज आईडी प्रक्रिया, कम भ्रष्टाचार और मजबूत डिजिटल संप्रभुता। रिपोर्ट में कहा गया है कि "केन्या केवल अपनाने ही नहीं, बल्कि अफ्रीकी आवश्यकताओं के अनुसार डीपीआई को ढाल भी रहा है।"
डिजीलॉकर जैसे टूल्स ने दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया को हफ्तों से घटाकर मिनटों में कर दिया है, जिससे लोगों को लंबी लाइनों से राहत मिली है। वहीं यूपीआई और माइशा नंबा का एकीकरण शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक कई क्षेत्रों को लाभ पहुंचा सकता है। केन्या में लगभग 60 प्रतिशत तकनीकी पहुंच होने के कारण डिजिटल भुगतान को और बढ़ावा मिलने की संभावना है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत का डिजिटल 'स्टैक' — आधार आईडी, यूपीआई भुगतान और डिजीलॉकर वॉल्ट — 1.4 अरब लोगों तक डिजिटल सेवाएं पहुंचा चुका है। 2023-24 तक यूपीआई कुल लेनदेन का 70 प्रतिशत हिस्सा बन चुका है और इससे बिना बैंक वाले लोगों को भी वित्तीय सेवाओं तक पहुंच मिली है।
डिजीलॉकर अकेले 50 करोड़ उपयोगकर्ताओं को सेवाएं दे रहा है और अरबों सुरक्षित दस्तावेजों को संभाल रहा है, जिससे यह प्रमाणित होता है कि डीपीआई कम लागत में भी समावेशी विकास प्रदान कर सकता है।
फरवरी 2026 में, केन्या ने 'इंडिया एआई इंपैक्ट समिट' के दौरान भारत के नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (एनईजीडी) के साथ मिलकर एक कस्टमाइज्ड डिजीलॉकर पायलट के लिए कार्यान्वयन ढांचा (इम्प्लीमेंटेशन फ्रेमवर्क) पर हस्ताक्षर किए थे।