अमित शाह का बड़ा बयान: 'बाबरी मस्जिद बनाने वालों से गठबंधन से बेहतर 20 साल विपक्ष में रहना'
सारांश
Key Takeaways
- अमित शाह का स्पष्ट बयान
- हुमायूं कबीर का विवादित ऑडियो क्लिप
- टीएमसी और भाजपा के बीच तनाव
- राजनीतिक हलचल का कारण
- एआईएमआईएम का अलग चुनाव लड़ने का निर्णय
कोलकाता, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कोलकाता में भाजपा का घोषणापत्र जारी करते समय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से बाहर आए हुमायूं कबीर से जुड़े स्टिंग विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भाजपा किसी भी कीमत पर बाबरी मस्जिद बनाने वालों के साथ गठबंधन नहीं करेगी।
उन्होंने टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी पर भी कटाक्ष करते हुए यह इशारा किया कि हुमायूं कबीर के वायरल ऑडियो क्लिप के पीछे सत्ताधारी पार्टी का हाथ है। इस ऑडियो क्लिप में हुमायूं कबीर कथित तौर पर राज्य के भाजपा नेताओं को टीएमसी को सत्ता से हटाने में पूरी सहायता देने का आश्वासन दे रहे हैं। जब अमित शाह से बंगाल चुनाव में हुमायूं कबीर और भाजपा के बीच 'डील' के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, "आप ममता की क्षमताओं को कम नहीं आंक सकते, ममता बनर्जी ऐसे 2,000 वीडियो बना सकती हैं।"
अमित शाह ने हुमायूं कबीर की 'आम जनता उन्नयन पार्टी' के साथ किसी भी गठबंधन की संभावना को खारिज करते हुए कहा, "हुमायूं कबीर और भारतीय जनता पार्टी जैसे साउथ पोल और नॉर्थ पोल हैं। हमारा कभी मेल नहीं हो सकता। हम बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने वालों के साथ गठबंधन करने के बजाय अगले 20 साल तक विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे।"
ज्ञात हो कि गुरुवार को पश्चिम बंगाल के मंत्री फिरहाद हकीम और अरूप बिस्वास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुमायूं कबीर का एक कथित ऑडियो क्लिप जारी किया था। इसमें उन्होंने दावा किया था कि कबीर और उनकी 'आम आदमी उन्नयन पार्टी' चुनावों में भाजपा को समर्थन देने का आश्वासन दे रहे थे।
ऑडियो क्लिप में कबीर को किसी अज्ञात व्यक्ति को यह भरोसा देते हुए सुना गया कि अगर भाजपा इस बार अधिकांश हिंदू वोट हासिल करने में सफल रहती है, तो वह मुस्लिम वोटों को विभाजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उनका कहना था कि इसका उद्देश्य राज्य में तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बाहर करना है।
इस ऑडियो क्लिप के लीक होने से राजनीतिक हलचल मच गई है, और सत्ताधारी टीएमसी ने भाजपा पर पैसे के बल पर चुनावों को प्रभावित करने का आरोप लगाया है।
वहीं, असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली एआईएमआईएम ने हुमायूं कबीर की पार्टी से गठबंधन तोड़कर पश्चिम बंगाल में अकेले चुनावी लड़ने का निर्णय लिया है।