पवन खेड़ा के मामले में असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, तेलंगाना हाईकोर्ट के फैसले को किया खारिज
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 13 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की समस्याएं गंभीर हो रही हैं। अब असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया है। असम सरकार ने तेलंगाना हाई कोर्ट के उस निर्णय को चुनौती दी है, जिसमें पवन खेड़ा को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत प्रदान की गई थी। मुख्य न्यायाधीश से असम सरकार ने त्वरित सुनवाई की मांग की है।
मामला असम में दर्ज की गई एक एफआईआर से संबंधित है, जिसमें पवन खेड़ा पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह केस मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनकी पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के परिवार को लेकर की गई विवादास्पद टिप्पणियों से जुड़ा हुआ है।
पवन खेड़ा ने गिरफ्तारी से बचने के लिए तेलंगाना हाई कोर्ट का सहारा लिया था और ट्रांजिट अग्रिम जमानत की अपील की थी। हाई कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें एक सप्ताह की राहत दी थी, ताकि वह असम की संबंधित अदालत में नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकें। यह आदेश न्यायमूर्ति के. सुजाना ने शुक्रवार को सुनाया था।
सुनवाई के दौरान पवन खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि यह मामला राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि एफआईआर में कई प्रकार के आरोप लगाए गए हैं, जो केवल एक राजनीतिक विरोधी को दबाने का प्रयास है। सिंघवी ने यह भी कहा कि यदि बयान गलत साबित होते हैं, तो यह अधिकतम मानहानि का मामला बनता है, लेकिन गिरफ्तारी का कोई ठोस आधार नहीं है। उन्होंने अदालत को बताया कि पवन खेड़ा फरार नहीं हैं और जांच में पूरा सहयोग करने के लिए तत्पर हैं। ऐसे में सख्त कार्रवाई की कोई आवश्यकता नहीं है।
दूसरी ओर, असम सरकार का तर्क है कि आरोप गंभीर हैं और ऐसे में पवन खेड़ा को राहत देना उचित नहीं है। सरकार ने कहा कि इससे जांच प्रभावित हो सकती है, और इसलिए हाई कोर्ट का आदेश गलत है, जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।