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गौतम गंभीर ने जलियांवाला बाग के शहीदों को दी श्रद्धांजलि, 'शहीद अमर रहते हैं'

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गौतम गंभीर ने जलियांवाला बाग के शहीदों को दी श्रद्धांजलि, 'शहीद अमर रहते हैं'

सारांश

गौतम गंभीर ने जलियांवाला बाग हत्याकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि दी। यह घटना भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक काला अध्याय है। जानें इस त्रासदी का महत्व और इसके प्रभाव।

मुख्य बातें

जलियांवाला बाग हत्याकांड भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।
गौतम गंभीर ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी है।
इस त्रासदी ने विदेशी शासन के प्रति जन जागरूकता बढ़ाई।
ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा की गई बर्बरता ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम की दिशा को बदल दिया।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 379 मौतें हुईं, लेकिन वास्तविक संख्या 1,000 से अधिक है।

नई दिल्ली, 13 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने सोमवार को जलियांवाला बाग में शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की है। जलियांवाला बाग हत्याकांड की 107वीं बरसी 13 अप्रैल, 2026 को है, जो भारत की स्वतंत्रता और संप्रभुता के लिए संघर्ष का एक महत्वपूर्ण और दुखद अध्याय है।

गौतम गंभीर ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "शहीद हमेशा अमर रहते हैं।"

100 वर्षों से भी पहले इसी दिन, 1919 में, अमृतसर में ब्रिटिश औपनिवेशिक अधिकारियों द्वारा की गई यह बर्बरता भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन पर गहरा प्रभाव डाल गई थी। यह त्रासदी जनता के लिए एक चेतावनी बनी, जिसने विदेशी शासन की क्रूरता को उजागर किया और स्वतंत्रता संग्राम के मार्ग को हमेशा के लिए बदल दिया।

यह घटना बैसाखी पर्व के दौरान हुई, जब हजारों श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक जलियांवाला बाग में इकट्ठा हुए थे। इस जनसमूह में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल थे। प्रदर्शनकारियों को इस बात का अंदाजा नहीं था कि ब्रिटिश प्रशासन ने सार्वजनिक सभाओं पर प्रतिबंध लगा रखा है और क्षेत्र में मार्शल लॉ लागू है। इसी बीच, ब्रिगेडियर जनरल रेजिनाल्ड डायर सशस्त्र सैनिकों के साथ वहां पहुंचे और निहत्थे लोगों पर बिना किसी चेतावनी के अंधाधुंध गोलीबारी का आदेश दे दिया।

डायर के साथ दो बख्तरबंद गाड़ियां और राइफलों के साथ गोरखा और बलूची सैनिक थे। इन सैनिकों ने लगभग 10 से 15 मिनट तक निहत्थी भीड़ पर लगातार गोलियां चलाईं। इस बर्बर कृत्य में कुल 1,650 राउंड फायरिंग की गई। हालांकि, तत्कालीन आधिकारिक रिपोर्टों में 379 मौतें और लगभग 1,200 लोग घायल होने की पुष्टि की गई, लेकिन वास्तविक संख्या 1,000 से अधिक होने का अनुमान है।

यह भयानक घटना जलियांवाला बाग में हुई, जो तीन तरफ से इमारतों से घिरा हुआ था। इसका एकमात्र निकास मार्ग भीड़ से भरा हुआ था, जिससे कोई भी भाग नहीं सकता था। इसे अमृतसर हत्याकांड के नाम से भी जाना जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसने भारतीय जनता को जागरूक किया।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जलियांवाला बाग हत्याकांड कब हुआ?
यह हत्याकांड 13 अप्रैल 1919 को हुआ था।
इस घटना का मुख्य कारण क्या था?
ब्रिटिश प्रशासन द्वारा सार्वजनिक सभाओं पर प्रतिबंध और मार्शल लॉ का लागू होना।
इस हत्याकांड में कितने लोग मारे गए थे?
आधिकारिक रिपोर्टों में 379 मौतें बताई गई थीं, लेकिन असली संख्या 1,000 से अधिक मानी जाती है।
गौतम गंभीर ने इस घटना पर क्या कहा?
गौतम गंभीर ने कहा, 'शहीद हमेशा अमर रहते हैं।'
जलियांवाला बाग कहां स्थित है?
जलियांवाला बाग अमृतसर, पंजाब में स्थित है।
राष्ट्र प्रेस
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