भुवनेश्वर कुमार की 4 साल बाद टीम इंडिया में वापसी: 'उम्मीद शून्य थी, बस काम करता रहा'
सारांश
मुख्य बातें
तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने 4 साल के लंबे अंतराल के बाद भारतीय क्रिकेट टीम में वापसी की है और अपनी मानसिक यात्रा को साझा करते हुए कहा कि राष्ट्रीय टीम में वापसी की कोई उम्मीद रखे बिना लगातार मेहनत करते रहना ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रही। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में उन्होंने अपने इस दर्शन को खुलकर बयान किया।
मानसिक दृष्टिकोण: उम्मीद नहीं, काम हाँ
भुवनेश्वर ने कहा, 'मुझे खुद से कोई उम्मीद नहीं है। मुझे लगता है कि पिछले 3-4 वर्षों में मेरे लिए चीजें ऐसे ही हुईं। कोई उम्मीद नहीं, बस अपना काम करते रहो। आम तौर पर, हम वर्तमान में रहने की बात करते हैं — मुझे लगता है कि मैं अभी इसी सोच में हूं।' उन्होंने जोड़ा कि राष्ट्रीय टीम से दूरी के दौरान परिपक्वता ही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि रही। उनके अनुसार, 'पिछले चार साल में, मैं कभी इंडियन जर्सी के पीछे नहीं भागा।'
आईपीएल और घरेलू क्रिकेट की भूमिका
भुवनेश्वर ने अपनी वापसी का श्रेय आईपीएल (IPL) और घरेलू क्रिकेट को दिया। उन्होंने कहा, 'पिछले दो आईपीएल में, मैं बिना किसी उम्मीद के गया था। लेकिन ऐसा नहीं था कि मैंने तैयारी नहीं की थी — फिटनेस से लेकर स्किल्स और मानसिक पक्ष, सब पर काम किया।' गौरतलब है कि उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें कभी यह उम्मीद नहीं थी कि दो वर्षों में उन्हें दो आईपीएल खिताब मिलेंगे।
टी20 क्रिकेट की बदलती माँग और गेंदबाज की भूमिका
इस अनुभवी पेसर का मानना है कि आईपीएल ने उन्हें टी20 क्रिकेट की बदलती जरूरतों को समझने में भी मदद की। उन्होंने कहा, 'पिछले कुछ वर्षों में गेम में काफी बदलाव आया है — 200 एक छोटा स्कोर हो गया है।' उन्होंने इम्पैक्ट प्लेयर नियम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इसने बल्लेबाजों की मानसिकता को पहली गेंद से आक्रामक बना दिया है, लेकिन उनका मानना है कि एक परिपक्व गेंदबाज खेल को नियंत्रित कर सकता है। उन्होंने कहा, 'आप चाह सकते हैं कि वे वहीं हिट करें जहां हम चाहते हैं।'
विदेशी दौरे की चुनौतियाँ
भुवनेश्वर ने विदेशी परिस्थितियों, खासकर SENA देशों — दक्षिण अफ्रीका, न्यूज़ीलैंड, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया — में खेलने की चुनौतियों को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि व्हाइट-बॉल क्रिकेट में गेंदबाजों को अब पहले की तुलना में कम 'नेचुरल सपोर्ट' मिलता है, इसलिए मानसिक परिपक्वता अनिवार्य हो गई है।
न्यूज़ीलैंड के खिलाफ सीरीज़ और आत्मविश्वास
भारत ने न्यूज़ीलैंड के खिलाफ पहले टी20 मैच में जीत दर्ज की थी। भुवनेश्वर ने उस मैच पर कहा, 'जिस तरह से बल्लेबाजों ने चेज किया, उससे टीम का आत्मविश्वास बढ़ा है। पहले मैच में जीत आगे के मैचों और सीरीज के लिए हौसला लेकर आती है।' यह वापसी ऐसे समय में आई है जब भारतीय क्रिकेट में नई पीढ़ी की तेज गेंदबाजी के बीच अनुभव की माँग फिर से उभरी है, और भुवनेश्वर का यह पुनर्जन्म उस खालीपन को भरने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।