भुवनेश्वर कुमार का बड़ा बयान: 'भारत के लिए खेल चुका हूं, अब कोई दबाव नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
अनुभवी भारतीय तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय टीम में वापसी अब उनकी प्राथमिकता नहीं है। 36 वर्षीय इस गेंदबाज ने कहा कि देश के लिए खेलने का सपना पूरा हो चुका है और अब वे सिर्फ क्रिकेट के प्रति अपने जुनून के चलते मैदान पर उतरते हैं। उन्होंने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के एक पॉडकास्ट एपिसोड में यह बात कही।
मुख्य बयान: जुनून ही अब प्रेरणा
भुवनेश्वर ने पॉडकास्ट में कहा, 'मैं आईपीएल और घरेलू क्रिकेट इसलिए खेल रहा हूं, क्योंकि मुझे खेल से प्यार है। जब आप युवा होते हैं और भारत के लिए खेलते हैं, तो आप कहते हैं कि आपको खेल से प्यार है। हालांकि, सच कहूं तो, जो आपके नियंत्रण में है उस पर ध्यान दें और ज़्यादा न सोचें। करियर के इस पड़ाव पर अब मैं महसूस कर रहा हूं कि खेल को उसके प्रति जुनून की वजह से भी खेला जाता है।'
उन्होंने आगे कहा, 'मैं पहले ही भारत के लिए खेल चुका हूं। अब मुझे कुछ और हासिल नहीं करना है। अगर मुझे एक और मौका मिलता है, तो यह बहुत अच्छी बात होगी, लेकिन मैं वह अनुभव ले चुका हूं। मैं अभी जो कुछ भी कर रहा हूं, वह खेल के प्रति मेरे प्यार की वजह से है।'
करियर का सफर: 21 टेस्ट, 121 वनडे, 87 टी20
भुवनेश्वर कुमार ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 21 टेस्ट, 121 वनडे और 87 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं। उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला नवंबर 2022 में भारतीय जर्सी में था। इसके बाद से वे घरेलू क्रिकेट और आईपीएल तक सीमित हैं। उन्होंने बताया कि वे यूपी टी20 लीग और घरेलू क्रिकेट में सक्रिय रहकर खेल के संपर्क में बने रहते हैं, और साथ ही खुद को तरोताजा रखने के लिए पर्याप्त ब्रेक भी लेते हैं।
परिवार की भूमिका: पछतावे से मुक्ति
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर जीवन को सहज बनाने में भुवनेश्वर ने अपने परिवार के माहौल को सबसे बड़ा सहारा बताया। उन्होंने कहा, 'मैं पूरी तरह सुकून में हूं, और इसका श्रेय मैं अपने परिवार को देता हूं। घर पर हम कभी क्रिकेट के बारे में बात नहीं करते — न इस बारे में कि क्या मैं भारतीय टीम में वापस आऊंगा, न इस बारे में कि मुझे क्यों नहीं चुना गया या क्या गलत हुआ। इसने बड़ी भूमिका निभाई, और मुझे कोई पछतावा नहीं है।'
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि जब कोई खिलाड़ी टीम से बाहर होता है, तो मन में यह भाव आना स्वाभाविक है कि 'शायद मुझे अभी भी वहां होना चाहिए था।' लेकिन परिवार ने उन्हें इस भावनात्मक उठापटक से उबरने में मदद की।
बदलाव को स्वीकारना: खेल का अटल सत्य
भुवनेश्वर ने पीढ़ियों के बदलाव को खेल की अनिवार्यता बताते हुए कहा, 'मैं समझता हूं कि बदलाव खेल का हिस्सा है। पीढ़ियां बदलती रहती हैं। मैं ऐसा अनुभव करने वाला पहला खिलाड़ी नहीं हूं और निश्चित रूप से आखिरी भी नहीं होऊंगा। परिवार इसमें बड़ी भूमिका निभाता है। मैं जहां हूं, वहां खुश हूं।' यह परिपक्वता उन्हें भारतीय क्रिकेट के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में रखती है जिन्होंने विदाई को गरिमा के साथ स्वीकार किया है।