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एसपी वैद बोले — चीन की दादागिरी पर भारत देता है उसी की भाषा में जवाब, आईटीबीपी डीजी का बयान सही

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एसपी वैद बोले — चीन की दादागिरी पर भारत देता है उसी की भाषा में जवाब, आईटीबीपी डीजी का बयान सही

सारांश

पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने साफ कहा — चीन की धमकाने वाली रणनीति नई नहीं, भारत उसे समझता है और उसी की भाषा में जवाब देता है। अरुणाचल फेस-ऑफ से लेकर नशामुक्त भारत तक, एक सुरक्षा विशेषज्ञ का व्यापक आकलन।

मुख्य बातें

पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने आईटीबीपी डीजी शत्रुजीत सिंह कपूर के बयान को सही ठहराया — अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के साथ फेस-ऑफ जारी है।
वैद के अनुसार चीन की पीएलए का व्यवहार धमकाने वाला है, लेकिन इसका अर्थ भारतीय भूमि पर कब्जा नहीं है।
कांग्रेस पर पलटवार — वैद ने 1962 के अक्साई चिन कब्जे की याद दिलाई जब पंडित नेहरू प्रधानमंत्री थे।
पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे के बयान को 'संतुलित' बताया — सीमा विवाद बातचीत से हल होगा।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त भारत के लक्ष्य का समर्थन किया।
वकील प्रशांत भूषण के 'लोकतंत्र बचाओ दिवस' आह्वान पर चेतावनी — हिंसा पर कानूनी कार्रवाई होगी।

जम्मू-कश्मीर पुलिस के पूर्व महानिदेशक एसपी वैद ने 23 अक्टूबर 2026 को अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के साथ जारी फेस-ऑफ, भारत-चीन सीमा विवाद पर पूर्व सेना प्रमुख के बयान और देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के आह्वान समेत कई राष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर के बयान को पूरी तरह सही ठहराते हुए कहा कि भारत चीन की भाषा समझता है और उसी भाषा में जवाब देता है।

अरुणाचल में फेस-ऑफ और आईटीबीपी का रुख

वैद ने कहा कि आईटीबीपी महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर का बयान पूरी तरह तथ्यों पर आधारित है। उनके अनुसार, चीन और उसकी पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) का व्यवहार धमकाने वाला रहा है — वह अपने लगभग सभी पड़ोसी देशों पर दबाव बनाने और उनकी भूमि पर दावा जताने की कोशिश करता है। वैद ने लद्दाख में कुछ वर्ष पूर्व हुई घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियाँ चीन की रणनीतिक प्रकृति का हिस्सा हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आईटीबीपी डीजी के बयान का अर्थ यह नहीं है कि चीन ने भारतीय भूमि पर कब्जा कर लिया है। उनके शब्दों में, 'भारत उनकी भाषा समझता है और उसी भाषा में जवाब भी देता है।' उन्होंने आईटीबीपी के जवानों की वीरता की सराहना करते हुए कहा कि वे अपनी भूमि की सुरक्षा में पूरी तरह सक्षम हैं।

कांग्रेस पर पलटवार — 1962 का संदर्भ

वैद ने इस मुद्दे पर कांग्रेस के रुख को निशाने पर लेते हुए कहा कि 1962 में जब चीन ने अक्साई चिन पर कब्जा किया था और भारत-चीन युद्ध हुआ था, तब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और पंडित जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री थे। उनका आरोप था कि अक्साई चिन का पूरा क्षेत्र उसी कालखंड में चीन के कब्जे में चला गया।

उन्होंने यह भी कहा कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) और कांग्रेस के बीच जो भी समझौता हुआ था, उसकी पूरी जानकारी आज तक देश को नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि इस विषय को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं, क्योंकि भारतीय सेना और आईटीबीपी हर चुनौती का मुँहतोड़ जवाब देने में सक्षम हैं।

पूर्व सेना प्रमुख नरवणे के बयान पर समर्थन

पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे के भारत-चीन सीमा विवाद पर दिए गए बयान को वैद ने 'संतुलित और समझदारी भरा' बताया। उन्होंने कहा कि नरवणे का मानना है कि यह विवाद बातचीत के जरिए ही सुलझेगा। वैद ने इस दृष्टिकोण से सहमति जताते हुए कहा कि भारत की प्राथमिकता सीमा विवाद का समाधान पहले करना है, व्यापार और अन्य द्विपक्षीय मसले बाद में।

प्रशांत भूषण के 'लोकतंत्र बचाओ दिवस' आह्वान पर टिप्पणी

वकील प्रशांत भूषण द्वारा 23 अक्टूबर को 'लोकतंत्र बचाओ दिवस' मनाने के आह्वान पर वैद ने कहा कि यदि कोई सत्ता परिवर्तन चाहता है, तो उसका रास्ता मतदान है, न कि सड़कों पर हिंसा और अराजकता। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान का समर्थन किया जिसमें उन्होंने कहा था कि लड़ाई 'बैलेट से होगी, बुलेट से नहीं।' वैद ने चेतावनी दी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन स्वीकार्य है, लेकिन हिंसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।

नशामुक्त भारत 2029 के लक्ष्य पर जोर

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 31 दिसंबर 2029 तक देश को नशामुक्त बनाने के लक्ष्य की घोषणा पर वैद ने कहा कि यह प्रधानमंत्री का निर्देश है और इसे पूरा करने के लिए 'ऑल गवर्नमेंट, ऑल सोसायटी' दृष्टिकोण अपनाना होगा। उन्होंने सभी राज्य सरकारों, खुफिया एजेंसियों, पुलिस बलों और नागरिकों की सामूहिक भूमिका पर जोर दिया, और ड्रग कार्टेल तथा तस्करी नेटवर्क के खिलाफ व्यापक अभियान की आवश्यकता बताई।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका राजनीतिक रंग स्पष्ट है — अरुणाचल फेस-ऑफ की आड़ में कांग्रेस पर 1962 का वार। यह ध्यान देने वाली बात है कि वे उस घटना की जवाबदेही तय कर रहे हैं जो छह दशक पुरानी है, जबकि मौजूदा सीमा प्रबंधन की जवाबदेही का प्रश्न अनुत्तरित रहता है। नरवणे के बयान पर उनकी सहमति संकेत देती है कि रक्षा प्रतिष्ठान में एक धारा अभी भी कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देती है। नशामुक्त भारत 2029 का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, परंतु 'ऑल सोसायटी' दृष्टिकोण के बिना ठोस क्रियान्वयन ढाँचे के, यह घोषणा महज आह्वान बनकर रह सकती है।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसपी वैद ने आईटीबीपी डीजी के बयान को सही क्यों बताया?
एसपी वैद के अनुसार, आईटीबीपी डीजी शत्रुजीत सिंह कपूर का बयान इस तथ्य पर आधारित है कि चीन और उसकी पीएलए का व्यवहार धमकाने वाला है और वह समय-समय पर पड़ोसी देशों पर दबाव बनाती है। वैद ने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं कि भारत की जमीन पर कब्जा हुआ है — भारत उसी की भाषा में जवाब देता है।
अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन फेस-ऑफ क्या है?
अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच समय-समय पर आमना-सामना (फेस-ऑफ) की घटनाएँ होती हैं, जहाँ चीन की पीएलए सीमा पर दबाव बनाने की कोशिश करती है। आईटीबीपी डीजी ने इसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था, जिसे एसपी वैद ने सटीक और उचित बयान बताया।
पूर्व सेना प्रमुख नरवणे ने भारत-चीन सीमा विवाद पर क्या कहा था?
पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे ने कहा था कि भारत-चीन सीमा विवाद का समाधान बातचीत से ही निकलेगा। एसपी वैद ने इस बयान को 'संतुलित और समझदारी भरा' बताया और कहा कि भारत सरकार भी यही मानती है कि सीमा विवाद पहले हल हो, व्यापार बाद में।
नशामुक्त भारत 2029 का लक्ष्य क्या है?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 दिसंबर 2029 तक देश को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य घोषित किया है, जो प्रधानमंत्री का निर्देश बताया गया है। एसपी वैद ने इसके लिए 'ऑल गवर्नमेंट, ऑल सोसायटी' दृष्टिकोण की वकालत की और सभी राज्य सरकारों, खुफिया एजेंसियों, पुलिस तथा नागरिकों की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया।
प्रशांत भूषण के 'लोकतंत्र बचाओ दिवस' पर एसपी वैद की क्या राय है?
एसपी वैद ने कहा कि सत्ता परिवर्तन का रास्ता वोट से होना चाहिए, सड़क पर हिंसा से नहीं। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि हिंसा होती है तो दंगाइयों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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