एसपी वैद बोले — चीन की दादागिरी पर भारत देता है उसी की भाषा में जवाब, आईटीबीपी डीजी का बयान सही
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर पुलिस के पूर्व महानिदेशक एसपी वैद ने 23 अक्टूबर 2026 को अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के साथ जारी फेस-ऑफ, भारत-चीन सीमा विवाद पर पूर्व सेना प्रमुख के बयान और देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के आह्वान समेत कई राष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर के बयान को पूरी तरह सही ठहराते हुए कहा कि भारत चीन की भाषा समझता है और उसी भाषा में जवाब देता है।
अरुणाचल में फेस-ऑफ और आईटीबीपी का रुख
वैद ने कहा कि आईटीबीपी महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर का बयान पूरी तरह तथ्यों पर आधारित है। उनके अनुसार, चीन और उसकी पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) का व्यवहार धमकाने वाला रहा है — वह अपने लगभग सभी पड़ोसी देशों पर दबाव बनाने और उनकी भूमि पर दावा जताने की कोशिश करता है। वैद ने लद्दाख में कुछ वर्ष पूर्व हुई घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियाँ चीन की रणनीतिक प्रकृति का हिस्सा हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आईटीबीपी डीजी के बयान का अर्थ यह नहीं है कि चीन ने भारतीय भूमि पर कब्जा कर लिया है। उनके शब्दों में, 'भारत उनकी भाषा समझता है और उसी भाषा में जवाब भी देता है।' उन्होंने आईटीबीपी के जवानों की वीरता की सराहना करते हुए कहा कि वे अपनी भूमि की सुरक्षा में पूरी तरह सक्षम हैं।
कांग्रेस पर पलटवार — 1962 का संदर्भ
वैद ने इस मुद्दे पर कांग्रेस के रुख को निशाने पर लेते हुए कहा कि 1962 में जब चीन ने अक्साई चिन पर कब्जा किया था और भारत-चीन युद्ध हुआ था, तब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और पंडित जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री थे। उनका आरोप था कि अक्साई चिन का पूरा क्षेत्र उसी कालखंड में चीन के कब्जे में चला गया।
उन्होंने यह भी कहा कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) और कांग्रेस के बीच जो भी समझौता हुआ था, उसकी पूरी जानकारी आज तक देश को नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि इस विषय को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं, क्योंकि भारतीय सेना और आईटीबीपी हर चुनौती का मुँहतोड़ जवाब देने में सक्षम हैं।
पूर्व सेना प्रमुख नरवणे के बयान पर समर्थन
पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे के भारत-चीन सीमा विवाद पर दिए गए बयान को वैद ने 'संतुलित और समझदारी भरा' बताया। उन्होंने कहा कि नरवणे का मानना है कि यह विवाद बातचीत के जरिए ही सुलझेगा। वैद ने इस दृष्टिकोण से सहमति जताते हुए कहा कि भारत की प्राथमिकता सीमा विवाद का समाधान पहले करना है, व्यापार और अन्य द्विपक्षीय मसले बाद में।
प्रशांत भूषण के 'लोकतंत्र बचाओ दिवस' आह्वान पर टिप्पणी
वकील प्रशांत भूषण द्वारा 23 अक्टूबर को 'लोकतंत्र बचाओ दिवस' मनाने के आह्वान पर वैद ने कहा कि यदि कोई सत्ता परिवर्तन चाहता है, तो उसका रास्ता मतदान है, न कि सड़कों पर हिंसा और अराजकता। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान का समर्थन किया जिसमें उन्होंने कहा था कि लड़ाई 'बैलेट से होगी, बुलेट से नहीं।' वैद ने चेतावनी दी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन स्वीकार्य है, लेकिन हिंसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।
नशामुक्त भारत 2029 के लक्ष्य पर जोर
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 31 दिसंबर 2029 तक देश को नशामुक्त बनाने के लक्ष्य की घोषणा पर वैद ने कहा कि यह प्रधानमंत्री का निर्देश है और इसे पूरा करने के लिए 'ऑल गवर्नमेंट, ऑल सोसायटी' दृष्टिकोण अपनाना होगा। उन्होंने सभी राज्य सरकारों, खुफिया एजेंसियों, पुलिस बलों और नागरिकों की सामूहिक भूमिका पर जोर दिया, और ड्रग कार्टेल तथा तस्करी नेटवर्क के खिलाफ व्यापक अभियान की आवश्यकता बताई।