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एलएसी पर तनाव: विदेश मंत्रालय ने कहा — चीनी सेना की अनियमित गश्त बिगाड़ती है सीमा पर स्थिति

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एलएसी पर तनाव: विदेश मंत्रालय ने कहा — चीनी सेना की अनियमित गश्त बिगाड़ती है सीमा पर स्थिति

सारांश

विदेश मंत्रालय ने साफ कहा — चीनी सेना की निर्धारित पैटर्न से हटकर गश्त ही एलएसी पर तनाव की जड़ है। साथ ही लद्दाख के 28 स्थानों पर चीन के 'अवैध' वाले दावे को भी सिरे से खारिज किया। जयशंकर पहले ही कह चुके हैं — संबंध सुधरे हैं, लेकिन सीमा की स्थिति ही तय करेगी कि कितना सामान्यीकरण संभव है।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 23 अक्टूबर 2026 को कहा कि चीनी सेना की निर्धारित गश्ती पैटर्न से विचलन एलएसी पर स्थिति बिगाड़ता है।
बयान आईटीबीपी प्रमुख के उस कथित बयान के बाद आया जिसमें अरुणाचल प्रदेश में चीन से टकराव की बात कही गई थी।
लद्दाख के 28 स्थानों को सर्वे ऑफ इंडिया मानचित्र पर मानक नामों से चिह्नित किए जाने को चीनी प्रवक्ता माओ निंग ने 13 अक्टूबर को 'अवैध और अमान्य' बताया था।
भारत ने दोहराया — लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है; चीन का खंडन यह तथ्य नहीं बदलता।
जयशंकर ने सितंबर में न्यूयॉर्क में कहा था कि भारत-चीन संबंध 2020 के निचले स्तर से सुधरे हैं, लेकिन सीमा की स्थिति ही सामान्यीकरण की सीमा तय करेगी।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में द्विसाप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि जब भी चीनी सेना वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर निर्धारित गश्ती पैटर्न से हटकर गश्त करती है, तो भारत-चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति बिगड़ जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश लंबित मुद्दों को सुलझाने और गलतफहमी व गलत अनुमान से बचने के लिए मौजूदा राजनयिक और सैन्य तंत्रों का उपयोग जारी रखे हुए हैं।

मुख्य बयान और संदर्भ

जायसवाल की यह टिप्पणियाँ ऐसे समय में आई हैं जब भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) प्रमुख के कथित बयान को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कथित तौर पर आईटीबीपी प्रमुख ने कहा था कि बल अरुणाचल प्रदेश में चीन के साथ टकराव से सफलतापूर्वक निपट रहा है। इस बयान ने विपक्षी दलों और मीडिया में तीखी प्रतिक्रिया उत्पन्न की।

जायसवाल ने अपने बयान में कहा, 'जैसा कि हमने पहले भी कहा है, भारत-चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति समय-समय पर तब बिगड़ जाती है जब चीनी सेनाएँ निर्धारित गश्ती पैटर्न से हट जाती हैं।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दोनों पक्ष बेहतर सीमा प्रबंधन के लिए उपयुक्त क्षेत्रों में एलएसी की बेहतर समझ विकसित करने के तरीकों पर चर्चा के लिए सहमत हुए हैं।

लद्दाख के 28 स्थानों का नामकरण विवाद

विदेश मंत्रालय का यह बयान 13 अक्टूबर को चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग की उस टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने भारत के गृह मंत्रालय द्वारा लद्दाख के 28 स्थानों को सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक मानचित्र पर मानक नामों से चिह्नित किए जाने को 'अवैध और अमान्य' करार दिया था।

जायसवाल ने दोहराया कि यह कार्य केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और स्थानीय हितधारकों के परामर्श से किया गया है, और इसका उद्देश्य इन स्थानों की सटीक पहचान को सुगम बनाना तथा आम जनता में बेहतर जागरूकता पैदा करना है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है — चीनी पक्ष द्वारा किसी भी प्रकार का खंडन इस स्थापित तथ्य को नहीं बदल सकता।'

गौरतलब है कि गत सप्ताह भी विदेश मंत्रालय ने यही रुख दोहराया था, जो दर्शाता है कि भारत इस मुद्दे पर अपनी स्थिति से पीछे हटने को तैयार नहीं है।

विदेश मंत्री जयशंकर की सितंबर टिप्पणियाँ

इस ताज़ा बयानबाज़ी से पूर्व, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सितंबर में न्यूयॉर्क दौरे के दौरान कहा था कि सीमा विवाद के चरम दौर की तुलना में भारत-चीन संबंधों में सुधार आया है। उन्होंने कहा था, 'भारत-चीन संबंध 2025 की तुलना में बेहतर हैं, और 2024 की तुलना में तो और भी बेहतर।' हालाँकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह कोई ढाँचागत बदलाव नहीं, बल्कि 2020 की घटनाओं के बाद आई भारी गिरावट से उबरने का प्रयास है।

जयशंकर ने स्वीकार किया कि 2020 के बाद दोनों देशों के बीच सामान्य संपर्क — वीजा, उड़ानें और आधिकारिक आदान-प्रदान — बुरी तरह प्रभावित हुए थे। उन्होंने इसे स्थिरता का स्वाभाविक परिणाम बताया, इस बात का प्रमाण नहीं कि अंतर्निहित मुद्दे समाप्त हो गए हैं।

सीमा शांति: द्विपक्षीय संबंधों की कुंजी

विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर रेखांकित किया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए अनिवार्य है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत और चीन दोनों वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा रहे हैं और व्यापारिक संपर्क धीरे-धीरे फिर से बहाल हो रहे हैं।

आने वाले हफ्तों में दोनों देशों के बीच राजनयिक और सैन्य स्तर पर जारी वार्ता की दिशा यह तय करेगी कि क्या एलएसी पर व्यवहारगत अनुशासन को लेकर कोई ठोस सहमति बन पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाता है कि सरकार 'सब ठीक है' और 'सतर्कता जारी है' — दोनों संदेश एक साथ देना चाहती है। लद्दाख के 28 स्थानों का नामकरण भी महज प्रशासनिक कदम नहीं है — यह संप्रभुता की सक्रिय पुष्टि है जो चीन की नामकरण-राजनीति का सीधा जवाब है। जयशंकर का 'संबंध सुधरे हैं' वाला बयान और एलएसी पर जारी 'समय-समय पर बिगड़ती स्थिति' — ये दोनों एक साथ सच हो सकते हैं, और यही इस रिश्ते की जटिलता है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर सरल बना देती है।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विदेश मंत्रालय ने चीनी सेना की गश्त पर क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 23 अक्टूबर 2026 को कहा कि जब चीनी सेनाएँ एलएसी पर निर्धारित गश्ती पैटर्न से हट जाती हैं, तो सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति बिगड़ जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश मौजूदा राजनयिक और सैन्य तंत्रों के जरिए लंबित मुद्दे सुलझाने में लगे हैं।
लद्दाख के 28 स्थानों के नामकरण पर चीन ने क्या आपत्ति जताई?
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने 13 अक्टूबर को भारत के गृह मंत्रालय द्वारा सर्वे ऑफ इंडिया के मानचित्र पर लद्दाख के 28 स्थानों को मानक नामों से चिह्नित किए जाने को 'अवैध और अमान्य' करार दिया था। भारत ने इस आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि यह कार्य लद्दाख के स्थानीय हितधारकों के परामर्श से किया गया है।
आईटीबीपी प्रमुख के बयान पर विवाद क्यों खड़ा हुआ?
कथित तौर पर आईटीबीपी प्रमुख ने कहा था कि बल अरुणाचल प्रदेश में चीन के साथ टकराव से सफलतापूर्वक निपट रहा है। इस बयान ने राजनीतिक हलकों में यह बहस छेड़ दी कि क्या सीमा पर टकराव की स्थिति जारी है और सरकार उसे किस तरह सार्वजनिक रूप से पेश कर रही है।
विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत-चीन संबंधों पर क्या कहा था?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सितंबर में न्यूयॉर्क दौरे के दौरान कहा था कि भारत-चीन संबंध 2024 और 2025 की तुलना में बेहतर हुए हैं। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई ढाँचागत बदलाव नहीं है, और सीमा की स्थिति ही यह तय करेगी कि दोनों देश संबंधों को कितना सामान्य बना सकते हैं।
एलएसी पर भारत और चीन के बीच तनाव कम करने के लिए क्या तंत्र मौजूद हैं?
दोनों देशों के बीच मौजूदा राजनयिक और सैन्य तंत्र सक्रिय हैं, जिनके जरिए एलएसी पर लंबित मुद्दे सुलझाए जा रहे हैं। इसके अलावा दोनों पक्ष बेहतर सीमा प्रबंधन के लिए उपयुक्त क्षेत्रों में एलएसी की साझा समझ विकसित करने पर भी चर्चा कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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